Movie Review

पति पत्नी और वो 2 (Pati Patni Aur Woh Do)

5 OUT OF 10
Release Date 15 Jun, 2026
Duration लगभग 2 घंटे 15 मिनट (135 मिनट)
Genre कॉमेडी, रोमांस, ड्रामा

Cast & Crew

Director: मुदस्सर अज़ीज़ (Mudassar Aziz)
Lead Cast: आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह, वामिका गब्बी
Platform: थियेटर में रिलीज़ (OTT प्लेटफॉर्म्स पर भी स्ट्रीमिंग)

बीआर चोपड़ा की विरासत भारतीय सिनेमा की कई यादगार फिल्मों से जुड़ी रही है, लेकिन बदलते दौर में इस प्रतिष्ठित बैनर की नई पेशकश 'पति पत्नी और वो 2' उसी पुराने फॉर्मूले को नए अंदाज में दोहराने की कोशिश करती नजर आती है।

1978 की मूल फिल्म और 2019 के रीमेक में जहां कहानी एक पति, एक पत्नी और एक तीसरे किरदार के इर्द-गिर्द घूमती थी, वहीं इस बार समीकरण थोड़ा और जटिल हो गया है। आयुष्मान खुराना के साथ वामिका गब्बी, सारा अली खान और रकुल प्रीत सिंह को जोड़कर कहानी को नया रंग देने की कोशिश की गई है, लेकिन कई बार यह रोमांटिक कॉमेडी कम और रिश्तों की उलझनों का एक अव्यवस्थित खेल ज्यादा लगती है।

प्रयागराज की पृष्ठभूमि में बुनी गई कहानी

Pati Patni Aur Woh 2 Review की बात करें तो फिल्म की कहानी प्रयागराज में रहने वाले वन अधिकारी प्रजापति पांडे (आयुष्मान खुराना) के इर्द-गिर्द घूमती है। उनकी शादी तेज-तर्रार पत्रकार अपर्णा (वामिका गब्बी) से हुई है।

हालात तब बदलते हैं, जब वह अपनी पुरानी दोस्त चंचल (सारा अली खान) की मदद करने का फैसला करते हैं। इसी बीच उनकी सहकर्मी नीलोफर (रकुल प्रीत सिंह) भी कहानी का हिस्सा बन जाती हैं और गलतफहमियों का सिलसिला शुरू हो जाता है।

कहानी की सबसे बड़ी कमजोरी बनी इसकी महत्वाकांक्षा

फिल्म एक साथ कई किरदारों और कई भावनाओं को संभालने की कोशिश करती है, लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी समस्या बन जाती है।

पटकथा बार-बार झूठ, गलतफहमियों और दोहराव पर निर्भर करती दिखाई देती है। कई स्थितियां बनावटी लगती हैं और हास्य पैदा करने के प्रयास के बावजूद कई दृश्य प्रभाव छोड़ने में असफल रहते हैं।

पृष्ठभूमि संगीत भी कई जगह जरूरत से ज्यादा शोर पैदा करता है और दर्शकों को हंसाने की कोशिश करता हुआ महसूस होता है।

आयुष्मान खुराना ने संभाला मोर्चा

Pati Patni Aur Woh 2 Review में अगर किसी पहलू की सबसे ज्यादा तारीफ की जा सकती है तो वह है आयुष्मान खुराना का प्रदर्शन।

वह एक ऐसे व्यक्ति के किरदार में नजर आते हैं, जो अपने ही बनाए झूठ और परिस्थितियों के जाल में फंसता चला जाता है। अपनी सहज कॉमिक टाइमिंग के दम पर वह कई दृश्यों को संभालते हैं, लेकिन कमजोर लेखन के कारण उनका अभिनय भी कई जगह थका हुआ महसूस होने लगता है।

सारा, रकुल और वामिका को नहीं मिला पर्याप्त स्पेस

सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और वामिका गब्बी जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों के बावजूद फिल्म उनके किरदारों को गहराई नहीं दे पाती।

तीनों कलाकार अपनी भूमिकाओं में प्रभाव छोड़ने की कोशिश करती हैं, लेकिन पटकथा उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं देती। यही वजह है कि उनके किरदार दर्शकों के मन में ज्यादा देर तक नहीं टिकते।

सहायक कलाकारों से मिली थोड़ी राहत

तिग्मांशु धूलिया, विजय राज और आयशा रजा जैसे कलाकार अपने छोटे-छोटे किरदारों में कुछ हल्के-फुल्के पल जरूर लेकर आते हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर भी हल्के व्यंग्य देखने को मिलते हैं, लेकिन ये फिल्म को पूरी तरह संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

क्या देखें या नहीं?

Pati Patni Aur Woh 2 Review के आधार पर कहा जा सकता है कि फिल्म में मनोरंजन के कुछ पल जरूर हैं और आयुष्मान खुराना अपनी मौजूदगी से इसे देखने लायक बनाने की कोशिश करते हैं।

हालांकि, बिखरी हुई पटकथा, जरूरत से ज्यादा भ्रम और कमजोर हास्य इसे एक यादगार रोमांटिक-कॉमेडी बनने से रोकते हैं। अगर आप हल्की-फुल्की और बिना ज्यादा उम्मीदों वाली फिल्म देखना चाहते हैं, तो यह एक बार देखी जा सकती है, लेकिन पहले भाग जैसा प्रभाव छोड़ने में यह काफी पीछे नजर आती है।