Datia By-Election का ऐलान होते ही मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद दतिया में पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया। नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया और पार्टी नेतृत्व से उम्मीदवार बदलने की मांग उठाई।
दतिया में कई जगह कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कुछ स्थानों पर बाजार बंद कराने और हाईवे पर चक्काजाम की कोशिश भी की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता को अचानक टिकट से बाहर करना कार्यकर्ताओं की भावनाओं के विपरीत है।
जिलाध्यक्ष ने भी जताई नाराजगी
भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने प्रदेश नेतृत्व को पत्र भेजकर टिकट वितरण पर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि जिला संगठन के कई पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से विरोध दर्ज कराया है।
उन्होंने कहा कि यदि अगले 24 घंटे के भीतर उम्मीदवार चयन पर दोबारा विचार नहीं किया गया तो कार्यकर्ता आगे की रणनीति तय करेंगे। हालांकि, इस दावे पर पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
'15 साल काम करने वाले नेता की अनदेखी' का आरोप
प्रदर्शन कर रहे समर्थकों का कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा वर्षों से दतिया की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे हैं। उनका आरोप है कि नए उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की जमीनी पहचान सीमित है और कार्यकर्ताओं से राय लिए बिना यह फैसला किया गया।
दूसरी ओर, भाजपा की ओर से उम्मीदवार चयन के पीछे की वजह पर अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
आखिर क्यों हो रहा है Datia By-Election?
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद आई। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने चुनावी रणनीति और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नया चेहरा मैदान में उतारा है। हालांकि पार्टी ने इस पर सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।
BJP के लिए क्यों अहम है यह सीट?
दतिया सीट भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में टिकट को लेकर सामने आया असंतोष चुनावी रणनीति पर असर डाल सकता है। अब सबसे बड़ी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या पार्टी नेतृत्व नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने में सफल होता है या फिर यह विवाद चुनाव प्रचार तक जारी रहता है।