Key Highlights
- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मंगलवार को 18वें सिविल सेवा दिवस पर अधिकारियों को संबोधित करेंगे।
- कार्यक्रम का मुख्य विषय 'विकसित भारत: अंतिम छोर तक नागरिक-केंद्रित शासन एवं विकास' है।
- पीएम विश्वकर्मा योजना और गैर-संचारी रोगों पर भी महत्वपूर्ण सत्रों का आयोजन होगा।
नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को 18वां सिविल सेवा दिवस बड़े ही उत्साह और गंभीरता के साथ मनाया जाएगा। इस विशेष अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में देशभर के सिविल सेवा अधिकारियों को संबोधित करेंगे। उनका संबोधन समावेशी विकास और नागरिक केंद्रित शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगा, जो देश के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह कार्यक्रम कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष के आयोजन का केंद्रीय विषय 'विकसित भारतः अंतिम छोर तक नागरिक-केंद्रित शासन एवं विकास' रखा गया है, जो सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का संबोधन होगा। इसके साथ ही कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन स्वागत भाषण देंगे, जो इस महत्वपूर्ण आयोजन की औपचारिक शुरुआत करेंगे।
उद्घाटन सत्र के ठीक बाद, 'सिविल सेवाओं की भूमिका और प्रभावशीलता - एक बाह्य परिप्रेक्ष्य' विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की जाएगी। इसमें सरकार, उद्योग और नीतिगत संस्थानों के कई प्रख्यात व्यक्तित्व एक साथ आएंगे। इस चर्चा का उद्देश्य शासन में जवाबदेही, नवाचार और सेवा वितरण को बढ़ाने के तरीकों पर गहन विचार-विमर्श करना है।
सिविल सेवा दिवस प्रतिवर्ष देशभर के सिविल सेवकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। यह दिन उन्हें नागरिकों के हित के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करने और सार्वजनिक सेवा तथा अपने कार्य में उत्कृष्टता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का अवसर प्रदान करता है। इसका ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि 1947 में इसी दिन सरदार वल्लभभाई पटेल ने अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित किया था। उन्होंने उस संबोधन में सिविल सेवकों को भारत का 'इस्पात ढांचा' बताया था, जो आज भी प्रासंगिक है।
इस आयोजन में कई सत्र होंगे, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक एक साथ मिलकर नागरिक केंद्रित शासन को मजबूत करने और अंतिम छोर तक सेवा वितरण में सुधार लाने की दिशा में गहन चर्चा करेंगे। इन सत्रों में सर्वोत्तम प्रथाओं और अनुभवों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा, जो नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में सहायक होगा।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 'पीएम विश्वकर्मा के माध्यम से सतत आजीविका' विषय पर एक सत्र की अध्यक्षता सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी करेंगे। वहीं, 'भारत में गैर-संचारी रोगों का समाधानः रोकथाम से लेकर उपचार तक' विषय पर सत्र की अध्यक्षता स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा करेंगे। ये सत्र विभिन्न क्षेत्रों में सरकार की प्रमुख पहलों और चुनौतियों पर प्रकाश डालेंगे।