UP Congress News: पीलीभीत में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप, कांग्रेस बोली- SIR के खिलाफ हर स्तर पर लड़ेंगे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने भी पीलीभीत की सदर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में कई लोगों के नाम और अन्य विवरण गलत दर्ज किए गए हैं। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले की जांच कराने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आई है। पार्टी नेताओं ने समान EPIC नंबर के साथ मतदाता का नाम और पिता का नाम बदले जाने के आरोप भी लगाए। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप कांग्रेस की ओर से सामने रखे गए हैं। इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना अभी जरूरी है।

SIR Voter List: पीलीभीत में 13,150 मतदाताओं के रिकॉर्ड पर सवाल -  UP Congress

कांग्रेस ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के अंतिम ड्राफ्ट में भी कई मतदाताओं के नाम और व्यक्तिगत विवरण गलत दर्ज किए गए हैं।

सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि समान EPIC नंबर के बावजूद कुछ रिकॉर्ड में मतदाता का नाम और पिता का नाम अलग-अलग दर्ज है। EPIC नंबर मतदाता पहचान पत्र से जुड़ी विशिष्ट पहचान संख्या होती है।

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि एक ही पहचान संख्या पर अलग-अलग नाम दर्ज किए गए हैं, तो इसके पीछे क्या कारण हैं और ऐसे बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए। पार्टी ने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

804 नाम गायब और 2,600 अतिरिक्त नाम होने का दावा

कांग्रेस नेताओं ने पीलीभीत सदर की मतदाता सूची को लेकर कुछ अन्य आंकड़े भी सामने रखे। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि 804 मतदाताओं के नाम गायब मिले हैं, जबकि लगभग 2,600 अतिरिक्त नाम दर्ज किए गए हैं।

कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में इस तरह की कथित विसंगतियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मतदाता पहचान संख्या सही है, लेकिन नाम या अन्य विवरण बदल गए हैं, तो इन बदलावों का आधार क्या है।

हालांकि, इन आंकड़ों को निर्वाचन आयोग की ओर से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित रिकॉर्ड की आधिकारिक जांच और आयोग की प्रतिक्रिया से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

समाजवादी पार्टी के बाद कांग्रेस ने भी उठाया मुद्दा

पीलीभीत की मतदाता सूची का मामला इससे पहले समाजवादी पार्टी भी उठा चुकी है। सपा ने 19 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग को ज्ञापन देकर कथित गड़बड़ियों की जांच कराने की मांग की थी।

अब कांग्रेस ने भी इसी मुद्दे को उठाते हुए मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटना या उसके रिकॉर्ड में त्रुटि होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर विषय है।

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर कानूनी विकल्प भी अपनाएगी।

आराधना मिश्रा और इमरान मसूद ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों पर चिंता जताई। पार्टी नेताओं ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ मामलों में मतदाता के नाम में बड़े बदलाव दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति के पास वैध मतदाता पहचान पत्र है, लेकिन मतदान के दिन मतदाता सूची में उसका नाम नहीं मिलता, तो उसके मताधिकार की रक्षा कैसे होगी।

पार्टी ने कहा कि मामले में कानूनी राय ली जाएगी और SIR प्रक्रिया से संबंधित आपत्तियों को लेकर संगठन के स्तर पर कार्रवाई जारी रहेगी। कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग भी की है।

निर्वाचन आयोग से पारदर्शिता की मांग

कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधित करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। पार्टी चाहती है कि मतदाताओं के रिकॉर्ड में बदलाव का आधार स्पष्ट हो और किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का पुनरीक्षण करना और उसमें सही जानकारी सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया के दौरान नाम, पता और अन्य विवरणों की जांच की जाती है। ऐसे में मतदाता सूची में किसी भी संभावित गलती की समय रहते पहचान करना जरूरी है।

हालांकि, मतदाता सूची में दिखाई देने वाली हर विसंगति अपने आप में जानबूझकर की गई गड़बड़ी का प्रमाण नहीं होती। इसलिए आरोपों की निष्पक्ष जांच, रिकॉर्ड का सत्यापन और निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।

मतदाता अपना नाम और EPIC विवरण कैसे जांचें?

कांग्रेस ने मतदाताओं से अपील की है कि वे निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना EPIC नंबर डालकर मतदाता सूची में नाम और अन्य विवरणों की जांच करें।

मतदाताओं को विशेष रूप से इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • मतदाता सूची में अपना नाम सही दर्ज है या नहीं।
  • EPIC नंबर और व्यक्तिगत विवरण मेल खाते हैं या नहीं।
  • पिता या परिवार के अन्य विवरणों में कोई त्रुटि तो नहीं है।
  • नाम गायब होने या गलत जानकारी मिलने पर संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क करें।

यदि किसी मतदाता को अपने रिकॉर्ड में गलती दिखाई देती है, तो उसे निर्धारित आधिकारिक प्रक्रिया के तहत सुधार या शिकायत के लिए आवेदन करना चाहिए।

 SIR को लेकर आगे क्या होगा?

पीलीभीत में कथित मतदाता सूची गड़बड़ी का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों ने इस मुद्दे पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है।

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठनात्मक और कानूनी स्तर पर अपनी लड़ाई जारी रखेगी। अब इस मामले में निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया और संबंधित रिकॉर्ड की जांच पर नजर रहेगी।

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