उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने PDA के मुद्दे को फिर से सड़क पर उतार दिया है। बस्ती में समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बुधवार को PDA मार्च निकाला। इसके बाद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा।
बस्ती में यह मार्च बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा से महात्मा गांधी की प्रतिमा तक निकाला गया। सपा नेताओं ने इसे लोकतंत्र, संविधान और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराने का माध्यम बताया।
बस्ती के मार्च को अखिलेश ने बताया PDA की ताकत
मार्च का वीडियो साझा करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बस्ती में हुए PDA मार्च को देखकर बीजेपी के होश उड़ गए होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार में PDA समाज के साथ अन्याय और उत्पीड़न बढ़ रहे हैं।
अखिलेश ने अपने बयान में PDA के दायरे में पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, आधी आबादी और आदिवासी वर्गों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह समाज अब जाग चुका है और दबाव में आने वाला नहीं है।
हालांकि, सरकार की नीतियों और PDA समाज के साथ कथित अन्याय को लेकर अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए ये राजनीतिक आरोप हैं। बीजेपी की तरफ से इस विशेष बयान पर प्रतिक्रिया इस रिपोर्टमेंए उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आई है।
वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया भी बना मुद्दा
बस्ती में सपा नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए चुनाव में पारदर्शिता की मांग की।
सपा विधायक महेंद्र यादव ने कहा कि 2027 का चुनाव लोकतंत्र को बचाने और उसे कमजोर करने वाली ताकतों के बीच मुकाबले के तौर पर देखा जाना चाहिए।
यह मुद्दा उस समय और महत्वपूर्ण हो गया है जब विपक्षी दल हाल के दिनों में चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर देशव्यापी अभियान चला रहे हैं। 6 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक के मार्च के दौरान अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
2024 के बाद PDA पर सपा का फोकस
समाजवादी पार्टी की मौजूदा राजनीतिक रणनीति में PDA एक प्रमुख मुद्दा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समीकरण को अपने अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया था।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव इस रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए अलग-अलग इलाकों में PDA से जुड़े कार्यक्रम कर रहे हैं। सितंबर में उन्होंने रायबरेली से PDA रथ यात्रा की शुरुआत भी की थी।
बस्ती का मार्च इसी अभियान की अगली कड़ी के तौर पर सामने आया है। यहां पार्टी ने संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार के मुद्दों को PDA की राजनीतिक गोलबंदी के साथ जोड़ने की कोशिश की।
अखिलेश का दावा- 2027 में BJP को मिलेगा ‘घमंड का दंड’
अखिलेश यादव ने अपने बयान में 2024 के लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह PDA समाज ने उस चुनाव में बीजेपी को चुनौती दी, उसी तरह 2027 में भी ऐसा होगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी को अपने ‘घमंड का दंड’ मिलेगा और उनकी पार्टी सत्ता में आएगी।
यह अखिलेश यादव का राजनीतिक दावा है। 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम अभी सामने नहीं आया है।
बस्ती से सपा का संदेश क्या है?
बस्ती के PDA मार्च को सिर्फ एक स्थानीय प्रदर्शन के तौर पर देखने के बजाय सपा के व्यापक चुनावी अभियान के संदर्भ में देखा जा सकता है। पार्टी एक तरफ मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ PDA के जरिए सामाजिक न्याय और संविधान का मुद्दा लगातार सामने ला रही है।
2027 के चुनाव से पहले सपा के लिए चुनौती इस संदेश को अलग-अलग सामाजिक वर्गों तक पहुंचाने और इसे जमीनी संगठन के साथ जोड़ने की होगी। बस्ती का प्रदर्शन बताता है कि पार्टी ने इस अभियान को जिलों और स्थानीय स्तर तक ले जाने की तैयारी तेज कर दी है।