नाहन : मानसून की दस्तक के साथ सिरमौर जिले में स्वास्थ्य विभाग स्क्रब टाइफस को लेकर अलर्ट मोड पर आ गया है। बरसात के मौसम में इस संक्रमण के मरीज सामने आने की आशंका बढ़ जाती है। इसे देखते हुए अस्पतालों में जांच किट से लेकर जरूरी दवाइयों तक की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्क्रब टाइफस के लक्षण दिखाई देने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। समय रहते जांच और उपचार मिलने से मरीज को गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
Sirmaur Scrub Typhus Alert: अस्पतालों में जांच और इलाज के इंतजाम
सिरमौर जिले के अस्पतालों में स्क्रब टाइफस की जांच के लिए किट और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बरसात शुरू होने के साथ ही जरूरी तैयारियां पूरी करने का दावा किया है।
अस्पतालों में मरीजों के लिए जांच किट और आवश्यक दवाइयां मुफ्त उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। विभाग का फोकस संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान और उपचार पर है।
स्क्रब टाइफस कैसे फैलता है? विशेषज्ञ ने बताया खतरा
सिविल अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. कमाल पाशा ने बताया कि स्क्रब टाइफस एक जीवाणु जनित संक्रमण है। यह खेतों, घास और झाड़ियों वाले क्षेत्रों में पाए जाने वाले संक्रमित छोटे कीट के काटने से फैल सकता है।
बरसात में खेतों और झाड़ियों के आसपास काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। जंगल या घास वाले क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को भी बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
Sirmaur Scrub Typhus Alert: खेत और जंगल जाते समय पहनें पूरी बाजू के कपड़े
डॉ. कमाल पाशा ने लोगों को खेतों, घास के मैदानों और जंगलों में जाते समय पूरी बाजू के कपड़े पहनने की सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि खेत या झाड़ियों वाले क्षेत्रों में काम करने के बाद घर लौटते ही स्नान करना चाहिए। पहने हुए कपड़ों को भी अच्छी तरह धोना जरूरी है।
ये सावधानियां कीटों के संपर्क के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती हैं।
Scrub Typhus Symptoms: 10 दिनों के भीतर दिख सकते हैं ये लक्षण
विशेषज्ञ चिकित्सक के मुताबिक, संक्रमित कीट के काटने के बाद करीब 10 दिनों के भीतर स्क्रब टाइफस के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
कंपकंपी और ठंड के साथ तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में गंभीर जकड़न और त्वचा पर लाल रंग के दाने इसके संभावित लक्षणों में शामिल हैं।
कुछ मरीजों में कीट के काटने वाले स्थान पर काले रंग का पपड़ीदार घाव भी बन सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।
बुखार में खुद से दवा लेने से बचें, डॉक्टर की सलाह जरूरी
डॉ. कमाल पाशा ने कहा कि बुखार होने पर मरीजों को खुद से दवाइयां लेने से बचना चाहिए। लगातार बुखार या स्क्रब टाइफस जैसे लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञ के अनुसार, इलाज में देरी होने पर संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इससे फेफड़े, लिवर और किडनी प्रभावित होने का जोखिम हो सकता है।
समय पर जांच और इलाज पर स्वास्थ्य विभाग का जोर
मानसून के दौरान स्क्रब टाइफस के संभावित मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
खासकर किसानों, जंगलों में जाने वाले लोगों और घास-झाड़ियों वाले क्षेत्रों में काम करने वालों को बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।
फिलहाल सिरमौर के अस्पतालों में स्क्रब टाइफस की जांच और उपचार के लिए जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी है।