Chhattisgarh में धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित रूप से विकसित करने के लिए सरकार ने ‘शक्तिपीठ परियोजना’ के तहत छत्तीसगढ़ आस्था पथ योजना की शुरुआत की है। इस योजना में राज्य के पांच प्रमुख देवी मंदिरों को एक धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की परिकल्पना की गई है।

करीब 1,000 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित कॉरिडोर का उद्देश्य श्रद्धालुओं को अलग-अलग धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में सुविधा देना है। इसके साथ ही मंदिर परिसरों का सौंदर्यीकरण, सड़क संपर्क, पेयजल, रोशनी, साफ-सफाई, विश्राम स्थल और सुरक्षा जैसी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि बेहतर सुविधाओं से छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं। 

इन 5 शक्तिपीठों को कॉरिडोर से जोड़ने की योजना

छत्तीसगढ़ आस्था पथ परियोजना में पांच प्रमुख धार्मिक स्थलों को शामिल किया गया है।

  • मां महामाया मंदिर, रतनपुर

बिलासपुर जिले के रतनपुर में स्थित मां महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। योजना के तहत मंदिर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और श्रद्धालुओं की आवाजाही को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।

  • मां चंद्रहासिनी मंदिर, चंद्रपुर

जांजगीर-चांपा क्षेत्र के चंद्रपुर में स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर महानदी के तट के निकट स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है। नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां भक्तों की भीड़ रहती है। बेहतर सड़क संपर्क और सुविधाएं श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को आसान बना सकती हैं।

  •  मां बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर प्रदेश के प्रसिद्ध देवी मंदिरों में शामिल है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु सीढ़ियों और अन्य उपलब्ध साधनों का उपयोग करते हैं। यहां भी पर्यटन सुविधाओं और व्यवस्थाओं के विकास पर जोर दिया जाएगा।

  • मां दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा में स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। बस्तर की परंपराओं और प्रसिद्ध दशहरा उत्सव से भी इस मंदिर का गहरा संबंध है। इस क्षेत्र में बेहतर सुविधाओं का विकास धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

  •  मां बागेश्वरी मंदिर, कुदरगढ़

सूरजपुर जिले के कुदरगढ़ धाम में स्थित मां बागेश्वरी का मंदिर भी इस प्रस्तावित धार्मिक पर्यटन सर्किट का हिस्सा है। पहाड़ी क्षेत्र में स्थित इस धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा, पहुंच मार्ग और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।

इन पांचों मंदिरों को एक सर्किट में विकसित करने की योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थलों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं से जोड़ना है। 

श्रद्धालुओं को मिलेंगी कौन-कौन सी सुविधाएं?

छत्तीसगढ़ आस्था पथ परियोजना के तहत मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में कई बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  1. मंदिरों तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क संपर्क।
  2. स्वच्छ पेयजल और आधुनिक शौचालय।
  3.  पर्याप्त रोशनी और साफ-सफाई की व्यवस्था।
  4. श्रद्धालुओं के बैठने और आराम करने के लिए स्थान।
  5. पार्किंग और यातायात प्रबंधन।
  6. सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटक सहायता केंद्र।
  7.  प्राथमिक चिकित्सा तथा सूचना संबंधी सुविधाएं।

इन सुविधाओं का उद्देश्य विशेष रूप से नवरात्रि, त्योहारों और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है। हालांकि, अलग-अलग मंदिरों में कौन-सा काम कब पूरा होगा, इसकी विस्तृत समयसीमा आधिकारिक परियोजना अपडेट के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

Chhattisgarh  में परियोजना के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान

छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में आस्था पथ परियोजना के लिए शुरुआती तौर पर 5 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। इस राशि के जरिए योजना से जुड़े शुरुआती कार्यों को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार की PRASHAD योजना के तहत रतनपुर के मां महामाया मंदिर और दंतेवाड़ा के मां दंतेश्वरी मंदिर के विकास के लिए भी प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। संबंधित कार्ययोजनाएं केंद्र सरकार को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

राज्य और केंद्र की योजनाओं के माध्यम से धार्मिक स्थलों का विकास होने पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। हालांकि, प्रत्येक परियोजना के लिए स्वीकृत राशि, निर्माण कार्यों की शुरुआत और पूरा होने की तारीख अलग-अलग आधिकारिक घोषणाओं पर निर्भर करेगी। 

धार्मिक पर्यटन से बढ़ सकते हैं रोजगार के अवसर

छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन की संभावनाएं केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय भोजनालय, प्रसाद, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलने की संभावना रहती है।

यदि कॉरिडोर के तहत सड़क, पार्किंग और अन्य सुविधाओं का विकास योजनाबद्ध तरीके से होता है, तो स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बन सकते हैं। इससे राज्य के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी पहचान मिल सकती है।

हालांकि, रोजगार पर वास्तविक प्रभाव पर्यटकों की संख्या, परियोजना के क्रियान्वयन और स्थानीय कारोबारों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।

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