सहरसा: बिहार के सहरसा जिले से मेहनत, संघर्ष और सफलता की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गौरवान्वित कर दिया है। बिहरा थाना क्षेत्र के तुलसियाही गांव के एक साधारण किराना दुकानदार के तीनों बच्चों ने NEET-UG परीक्षा पास कर एक अनोखी मिसाल पेश की है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद दो बेटे और एक बेटी ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के सामने परिस्थितियां कभी बड़ी नहीं होतीं।

इस उपलब्धि के बाद पूरे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और शिक्षाविद परिवार को बधाई देने उनके घर पहुंच रहे हैं। तीनों भाई-बहनों की सफलता अब सहरसा ही नहीं, पूरे बिहार के छात्रों के लिए प्रेरणा बन गई है।

सहरसा में रहकर की तैयारी, नहीं जाना पड़ा कोटा या दिल्ली

आज जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र कोटा, दिल्ली, हैदराबाद या चेन्नई जैसे बड़े शहरों का रुख करते हैं, वहीं तुलसियाही गांव के रजनीश कुमार, साक्षी कुमारी और प्रहलाद कुमार ने सहरसा में रहकर ही अपनी तैयारी पूरी की।

तीनों ने स्थानीय प्रगति क्लासेज से मार्गदर्शन लिया और नियमित सेल्फ स्टडी के दम पर NEET परीक्षा में सफलता हासिल की। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि छोटे शहर में रहकर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करना आसान नहीं होता।

तीनों भाई-बहनों ने हासिल की शानदार रैंक

परिवार के सबसे बड़े बेटे रजनीश कुमार ने 720 में से 633 अंक प्राप्त कर ऑल इंडिया रैंक (AIR) 3122 और ओबीसी रैंक 1173 हासिल की।

उनकी बहन साक्षी कुमारी ने 601 अंक के साथ AIR 9762 और ओबीसी रैंक 4340 प्राप्त की।

सबसे छोटे भाई प्रहलाद कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में 565 अंक हासिल करते हुए AIR 26751 और ओबीसी रैंक 12878 हासिल की।

किराना दुकान चलाकर पिता ने पूरा किया बच्चों का सपना

तीनों बच्चों के पिता रोहित कुमार गांव में एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कभी समझौता नहीं किया। परिवार ने आर्थिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी।

मां पूनम देवी ने बच्चों की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि मेहनत एक दिन जरूर रंग लाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों ने पूरे परिवार का सपना पूरा कर दिया।

प्रगति क्लासेज बना कोशी क्षेत्र की नई पहचान

तीनों भाई-बहनों ने सहरसा के प्रगति क्लासेज से NEET की तैयारी की। संस्थान की शुरुआत दो युवाओं नंदन और चंदन ने की थी। दोनों ने अपनी अच्छी नौकरी छोड़कर और अपनी जमीन बेचकर इस कोचिंग संस्थान की नींव रखी थी।

पिछले एक दशक में इस संस्थान से सैकड़ों छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो चुके हैं। इस वर्ष अकेले NEET परीक्षा में दो दर्जन से अधिक छात्रों ने यहां से तैयारी कर सफलता हासिल की है। स्थानीय स्तर पर यह संस्थान अब कोशी क्षेत्र के छात्रों के लिए उम्मीद का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।

प्रहलाद बनना चाहते हैं ऑर्थोपेडिक सर्जन

पहले ही प्रयास में सफलता पाने वाले प्रहलाद कुमार ने परीक्षा परिणाम समय पर जारी करने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सराहना की। उन्होंने कहा कि समय पर परिणाम आने से छात्रों का भरोसा और मजबूत होता है। उनका सपना भविष्य में एक कुशल ऑर्थोपेडिक सर्जन बनकर समाज की सेवा करना है।

साक्षी का सपना, बच्चों का इलाज करना

साक्षी कुमारी ने बताया कि उन्होंने सहरसा में रहकर ही नियमित पढ़ाई और स्थानीय मार्गदर्शन के सहारे यह सफलता हासिल की। उनका लक्ष्य बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) बनना है ताकि गरीब और जरूरतमंद बच्चों का बेहतर इलाज कर सकें।

रजनीश ने युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

सबसे बड़े भाई रजनीश कुमार ने कहा कि आर्थिक कठिनाइयां कभी भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार जारी रहे और आत्मविश्वास बना रहे तो किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। उन्होंने छात्रों से बड़े शहरों के बजाय अपनी मेहनत पर भरोसा रखने की अपील की।

गांव में जश्न, लोगों ने किया सम्मानित

तीनों भाई-बहनों की सफलता के बाद तुलसियाही गांव में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने उनके घर पहुंचकर परिवार को बधाई दी और तीनों छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सहरसा के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि एक ही परिवार के तीन बच्चों का एक साथ NEET परीक्षा में सफल होना बेहद दुर्लभ उदाहरण है।