नई दिल्ली: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो Lula दा सिल्वा ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर चौथे गैर-लगातार कार्यकाल का रास्ता साफ कर लिया है। 25 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव में उन्होंने दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया। इस नतीजे का असर केवल ब्राजील की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के साथ व्यापार, BRICS में सहयोग और ग्लोबल साउथ की भूमिका पर भी पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लूला को जीत की बधाई देते हुए भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा जताई है।
Brazil Election Result: Lula ने कितने वोटों से जीत हासिल की?
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लूला दा सिल्वा को लगभग 51.8 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 48.2 प्रतिशत वोट हासिल हुए। फ्लावियो, ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं।
यह मुकाबला ब्राजील की घरेलू नीतियों के साथ-साथ देश की विदेश नीति को लेकर भी महत्वपूर्ण था। लूला ने अपने राजनीतिक एजेंडे में सामाजिक कल्याण, राष्ट्रीय संप्रभुता और विकासशील देशों के साथ सहयोग पर जोर दिया है।
उनकी जीत से ब्राजील की विदेश नीति में निरंतरता रहने की संभावना है। हालांकि, देश की संसद में रूढ़िवादी दलों की मजबूत मौजूदगी और घरेलू आर्थिक चुनौतियां नई सरकार के लिए अहम रहेंगी।
PM Modi ने लूला को दी बधाई, भारत-ब्राजील संबंधों पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर को लूला दा सिल्वा को उनकी जीत पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए उनके साथ काम करने को उत्सुक हैं।
मोदी ने ग्लोबल साउथ की साझा प्राथमिकताओं और अधिक समावेशी, समानतापूर्ण तथा टिकाऊ दुनिया के निर्माण पर भी जोर दिया।
भारत और ब्राजील के बीच कृषि, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, तकनीक, रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग लंबे समय से जारी है। लूला की वापसी से इन क्षेत्रों में पहले से चल रही पहलों को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
India-Brazil Trade: 30 अरब डॉलर तक व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य
भारत और ब्राजील के संबंधों में व्यापार एक महत्वपूर्ण आधार है। दोनों देशों के बीच 2025 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 15.21 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि 2024 में यह करीब 12.20 अरब डॉलर था।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार के मौजूदा दायरे को बढ़ाना और नए क्षेत्रों में कारोबारी अवसर तलाशना महत्वपूर्ण होगा।
भारत ब्राजील को पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, रसायन, इंजीनियरिंग सामान और अन्य औद्योगिक उत्पाद निर्यात करता है। वहीं, ब्राजील से भारत को कच्चा तेल, चीनी, सोयाबीन तेल, लौह अयस्क, कपास और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति होती है।
लूला की जीत से दोनों देशों के बीच कारोबारी संवाद को गति मिल सकती है। हालांकि, व्यापार लक्ष्य हासिल करने के लिए बाजार तक पहुंच, शुल्क संबंधी बाधाओं और व्यावसायिक समझौतों पर ठोस प्रगति जरूरी होगी।
BRICS में भारत को कैसे मिल सकता है फायदा?
भारत और ब्राजील, दोनों BRICS के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। इस समूह में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग तथा वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
लूला ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने का समर्थन किया है। भारत भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और अपनी स्थायी सदस्यता की मांग उठाता रहा है।
ऐसे में दोनों देशों के बीच समन्वय से BRICS और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर साझा मुद्दों को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताएं हर मुद्दे पर एक जैसी हों, यह जरूरी नहीं है। सहयोग की वास्तविक दिशा भविष्य की वार्ताओं और फैसलों से तय होगी।
Rare Earth Minerals: भारत के लिए क्यों अहम है ब्राजील?
रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत-ब्राजील सहयोग की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक विनिर्माण में किया जाता है।
चीन की वैश्विक खनिज प्रसंस्करण क्षमता को देखते हुए भारत अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है। ब्राजील के पास महत्वपूर्ण खनिज संसाधन हैं, जो इस दिशा में भारत के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
लूला की फरवरी 2026 की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रेयर अर्थ, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल सहयोग, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े समझौते किए थे।
अब इन पहलों को जमीन पर लागू करना अहम होगा। केवल समझौतों से लाभ सुनिश्चित नहीं होता; इसके लिए खनिजों की खोज, प्रसंस्करण, निवेश और नियमित आपूर्ति की व्यवस्था भी जरूरी है।
Global South और अमेरिका के साथ संबंधों पर क्या असर होगा?
लूला की विदेश नीति में विकासशील देशों के साथ सहयोग और स्वतंत्र कूटनीतिक रुख महत्वपूर्ण रहे हैं। उनकी जीत से ब्राजील की BRICS में सक्रिय भूमिका और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर जोर जारी रहने की संभावना है।
चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और ब्राजील के बीच व्यापार शुल्क तथा राजनीतिक मुद्दों को लेकर तनाव रहा है। लूला ने ब्राजील की राष्ट्रीय संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति पर जोर दिया है।
भारत के लिए यह स्थिति नए व्यापारिक अवसरों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का रास्ता खोल सकती है। फिर भी, लूला की जीत का अर्थ यह नहीं है कि ब्राजील अमेरिका से अपने संबंध समाप्त कर देगा या हर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर भारत के साथ एक जैसा रुख अपनाएगा।
यह भी पढ़ें - Anthropic IPO: नवंबर में आ सकती है Claude AI बनाने वाली कंपनी