मुख्य बिंदु
- ब्रिटेन ने रूस के वित्तीय तंत्र को लक्षित करते हुए 18 कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं।
- इन प्रतिबंधों में क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और 'ए7 नेटवर्क' शामिल हैं, जिन पर रूस द्वारा प्रतिबंधों से बचने का आरोप है।
- लंदन में रूसी दूतावास ने इन प्रतिबंधों को 'बेकार' बताया है और कहा है कि इसका असर ब्रिटेन पर पड़ेगा।
ब्रिटेन का कड़ा कदम: रूस पर नए प्रतिबंधों का ऐलान
लंदन : ब्रिटेन ने रूस के खिलाफ अपनी आर्थिक घेराबंदी को और कड़ा करते हुए मंगलवार को 18 कंपनियों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। इन प्रतिबंधों का मुख्य निशाना रूस का 'गैर-कानूनी फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर' बताया जा रहा है, जिसका उपयोग वह फंड ट्रांसफर करने, सैन्य सामग्री खरीदने और यूक्रेन में जारी युद्ध को बनाए रखने के लिए कर रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क पर निशाना
ब्रिटिश सरकार की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज के अनुसार, इन नए प्रतिबंधों में प्रमुख रूप से क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज और 'ए7 नेटवर्क' शामिल हैं। इन संस्थाओं पर आरोप है कि रूस इनका इस्तेमाल पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए मौजूदा प्रतिबंधों से बचने और यूक्रेन के खिलाफ अपनी सैन्य गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए कर रहा है। इन प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
रूस की प्रतिक्रिया: 'प्रतिबंध बेकार'
दूसरी ओर, लंदन स्थित रूसी दूतावास ने ब्रिटेन के इस कदम को 'बेकार' करार दिया है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी टास के अनुसार, दूतावास ने कहा है कि ब्रिटिश अधिकारी यह मानने से इनकार कर रहे हैं कि रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध अप्रभावी साबित हो रहे हैं। दूतावास ने यह भी कहा कि रूस बाहरी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और वह अपने रास्ते पर चलता रहेगा।
ब्रिटेन पर ही पड़ेगा असर: मॉस्को का दावा
रूसी दूतावास ने चेतावनी दी है कि इन बढ़ती पाबंदियों का सबसे ज्यादा और सीधा असर ब्रिटेन के अपने नागरिकों, व्यवसायों और वैश्विक प्रतिष्ठा पर पड़ेगा। दूतावास ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग ऐसी कोशिशों का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें शायद इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
विदेश मंत्री का बयान: 'गलती कर रहा है क्रेमलिन'
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इस कार्रवाई को जायज ठहराते हुए कहा कि यदि क्रेमलिन यह सोचता है कि वह क्रिप्टो नेटवर्क और 'शैडो फाइनेंशियल सिस्टम' के पीछे छिपकर ब्रिटिश प्रतिबंधों से बच सकता है, तो वह बहुत बड़ी भूल कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूके रूस द्वारा प्रतिबंधों से बचने के लिए अपनाए जा रहे नए तरीकों को निशाना बनाने के लिए अपनी रणनीति को लगातार बदल रहा है और उसे मजबूत कर रहा है। वह सीधे उस बुनियादी ढांचे पर प्रहार कर रहा है जो रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को समर्थन देता है, ठीक उसी समय जब यूक्रेन युद्ध के मैदान में रूस पर दबाव बढ़ा रहा है।
रूसी दूतावास का पलटवार: 'वेस्टमिंस्टर से शुरू हो लड़ाई'
लंदन में रूसी दूतावास ने ब्रिटेन पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। दूतावास ने कहा कि ब्रिटिश अधिकारी दूसरों पर 'ओपेक फाइनेंशियल मैकेनिज्म' का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हैं, लेकिन स्थानीय राजनीतिक वर्ग को मिलने वाले बड़े क्रिप्टोकरेंसी डोनेशन को नजरअंदाज करते हैं। दूतावास ने तंज कसते हुए कहा कि 'शैडो स्कीम' के खिलाफ लड़ाई शायद वेस्टमिंस्टर (ब्रिटिश संसद) से शुरू होनी चाहिए, न कि बिश्केक या त्बिलिसी से।
ए7 नेटवर्क का महत्व: रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा
ब्रिटेन सरकार की प्रेस रिलीज के अनुसार, 'ए7 नेटवर्क' क्रेमलिन द्वारा समर्थित एक प्रणाली है जिसे पश्चिमी प्रतिबंधों को बायपास करने, सैन्य खरीद को वित्तपोषित करने और तेल की बिक्री से प्राप्त धन को संसाधित करके यूक्रेन के खिलाफ हमलों को फंड करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस नेटवर्क ने पिछले साल 90 बिलियन डॉलर से अधिक के धन हस्तांतरण का दावा किया था, जो रूस के वार्षिक सैन्य खर्च का लगभग आधा है।