मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन लगातार दूसरे दिन भी जारी है। Special Intensive Revision (SIR) के जरिए मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया पर रोक की मांग की है।

दिल्ली में जंतर-मंतर को बुधवार के प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र बनाया गया है। इससे पहले मंगलवार और बुधवार को विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग और आकाशवाणी भवन के आसपास प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था।

कांग्रेस ने इस विरोध को देशभर में ले जाने का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए हैं और इसे वह 'वोट चोरी' का मामला बता रही है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी, सुरक्षा बढ़ी

दिल्ली में जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पिछले दो दिनों के घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग और सुरक्षा इंतजाम किए हैं।

बुधवार को भी विपक्षी सांसदों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोककर हिरासत में लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 260 लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिनमें 10 सांसद भी शामिल थे। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य लोगों के खिलाफ आकाशवाणी भवन परिसर में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में FIR भी दर्ज की है।

राहुल गांधी ने फिर मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विपक्षी सांसदों की बैठक के बाद कहा कि विपक्ष जंतर-मंतर पर बैठकर SIR और चुनाव आयोग से जुड़े अपने सवाल देश के सामने रखेगा।

राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि उनके लिए ज्ञानेश कुमार देश के वैध मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं हैं।

राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने का मौका नहीं दिया गया। उनके मुताबिक, इसी वजह से विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना।

राहुल गांधी के इन आरोपों पर चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ बीजेपी का रुख अलग है। चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े आंकड़ों और प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया है।

13.39 करोड़ नामों पर क्या विवाद है?

SIR को लेकर सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची में शामिल नामों को लेकर है। विपक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे बड़ी संख्या में लोगों का मतदान अधिकार प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, चुनाव आयोग के मुताबिक SIR के दौरान 95.40 करोड़ मतदाताओं के डेटा की समीक्षा की गई और 13.39 करोड़ मतदाताओं को ASDD यानी Absent, Shifted Permanently, Dead और Duplicate श्रेणियों में रखा गया।

EC के आंकड़ों के अनुसार इनमें 3.01 करोड़ मतदाता अनुपस्थित या ट्रेस नहीं किए जा सके, 6.30 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए, 2.80 करोड़ मृत और 1.02 करोड़ डुप्लीकेट पाए गए। बाकी मतदाता अन्य श्रेणियों में रखे गए। आयोग ने कहा है कि पात्र मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसलिए 13.39 करोड़ का आंकड़ा विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद का केंद्र जरूर है, लेकिन इसे सीधे तौर पर “13.39 करोड़ पात्र मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटा दिया गया” कहना आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण से मेल नहीं खाता।

दो दिन से जारी है विरोध

विपक्ष का यह विरोध मंगलवार से तेज हुआ। INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च किया था। इसके बाद आकाशवाणी भवन के पास भी धरना दिया गया।

प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की बात कही है।

बुधवार को विपक्षी नेताओं ने दोबारा जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की। इस दौरान भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।

10 अक्टूबर को CJP का भी प्रदर्शन

SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध में 'Cockroach Janta Party' (CJP) ने भी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। संगठन की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर कई मांगें की गई हैं।

इससे पहले CJP से जुड़े प्रदर्शन देश के दूसरे हिस्सों में भी हुए हैं। 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में संगठन की ओर से प्रदर्शन का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है।

आगे क्या होगा?

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और SIR को लेकर विपक्ष का विरोध फिलहाल जारी है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपने स्तर पर SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों का बचाव कर रहा है।

ऐसे में आने वाले दिनों में विवाद का केंद्र दो मुद्दे रहेंगे—SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलाव और चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के सवाल। जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में होने वाले प्रदर्शन इस राजनीतिक टकराव को आर  भीबढ़ा सकते हैं।