Parliament Monsoon Session : संसद के मानसून सत्र का चौथा दिन भी राजनीतिक तल्खी के नाम रहा। सदन के भीतर चर्चा शुरू कराने पर सहमति नहीं बन सकी, जबकि बाहर संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। एक तरफ एनडीए सांसद राहुल गांधी के हालिया विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाते दिखे, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। दिनभर संसद परिसर में पोस्टर और तख्तियों के साथ विरोध-प्रदर्शन का माहौल बना रहा।
चर्चा कराने पर दोनों सहमत, लेकिन नियम को लेकर फंसा मामला
सरकार और विपक्ष दोनों का कहना है कि वे अहम मुद्दों पर चर्चा चाहते हैं। हालांकि, विवाद इस बात पर है कि बहस किस संसदीय नियम के तहत कराई जाए और इसके लिए कितना समय तय हो। इसी असहमति की वजह से मानसून सत्र की कार्यवाही लगातार प्रभावित हो रही है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा से पीछे नहीं हट रही है। उनके अनुसार, चर्चा का प्रारूप और समय बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में तय किया जाएगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
राहुल गांधी के प्रदर्शन को लेकर NDA का विरोध
संसद परिसर के मकर द्वार पर एनडीए सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। सत्ता पक्ष के नेताओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से गंभीर विषय था। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधा और विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने छात्रों और पेपर लीक का मुद्दा उठाया
दूसरी ओर कांग्रेस सांसदों ने छात्रों के आंदोलन और पेपर लीक के मामलों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि लगातार सामने आ रही घटनाओं से छात्रों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हुआ है। उनके मुताबिक सरकार को सबसे पहले छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए और उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक छात्रों का भरोसा बहाल नहीं होगा, तब तक केवल जांच की घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा।
पेपर लीक पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के मामलों पर कड़ा रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं।
सदन के भीतर बहस, बाहर सियासी संदेश
मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही संसद के भीतर कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है। ऐसे में सरकार और विपक्ष दोनों संसद परिसर को भी अपने-अपने राजनीतिक संदेश देने के मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। एक ओर सत्ता पक्ष सुरक्षा और संसदीय मर्यादा का मुद्दा उठा रहा है, जबकि विपक्ष छात्रों, शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे विषयों को प्रमुखता से सामने ला रहा है।
अब नजर इस बात पर है कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की अगली बैठक में चर्चा के नियम और समय को लेकर सहमति बनती है या नहीं। यदि गतिरोध जारी रहा तो मानसून सत्र के आने वाले दिनों में भी संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव तेज रहने की संभावना है।