NEET Controversy In Parliament : संसद के मानसून सत्र में NEET परीक्षा विवाद को लेकर जारी राजनीतिक टकराव गुरुवार को भी थमता नहीं दिखा। राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह NEET और पेपर लीक से जुड़े सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अडिग रहा।
इसी मुद्दे पर सदन में लगातार हंगामे की स्थिति बनी रही और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गतिरोध के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।
NEET Controversy In Parliament पर सरकार ने दोहराया अपना रुख
राज्यसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सभी सहयोगी दल NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर चर्चा चाहते हैं। उनके मुताबिक सरकार ने पहले दिन से ही स्पष्ट किया है कि वह किसी भी विषय पर सदन में खुली बहस के पक्ष में है।
रिजिजू ने कहा कि चर्चा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके लिए पहले से शर्तें रखना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चर्चा की मांग तो कर रहा है, लेकिन ऐसी शर्तें भी जोड़ रहा है जिनकी वजह से सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पा रही है।
'बिना शर्त चर्चा हो', रिजिजू की विपक्ष से अपील
संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि गतिरोध समाप्त करने के लिए सरकार की ओर से विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं, खासकर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, से संपर्क किया गया था। सरकार ने सुझाव दिया था कि चर्चा का समय और स्वरूप आपसी सहमति से तय किया जा सकता है, लेकिन बहस शुरू करने के लिए किसी तरह की पूर्व शर्त नहीं होनी चाहिए।
रिजिजू ने यह भी कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे बिना किसी शर्त के सदन में चर्चा में भाग लेना चाहिए।
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प्रधानमंत्री मोदी के बयान का किया जिक्र
सदन में बोलते हुए किरेन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
रिजिजू के अनुसार, प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने की बात कही है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
विपक्ष बोला- पहले इस्तीफा, फिर चर्चा
सरकार की अपील के बावजूद विपक्ष अपने रुख से पीछे हटता नजर नहीं आया। विपक्षी दलों का कहना है कि NEET परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेनी चाहिए।
विपक्षी सांसदों ने मांग दोहराई कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक इस मुद्दे पर चर्चा का कोई औचित्य नहीं है। इसी मांग को लेकर सदन में नारेबाजी और विरोध जारी रहा।
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गतिरोध से प्रभावित हो रही कार्यवाही
मानसून सत्र के दौरान NEET और पेपर लीक का मुद्दा सरकार और विपक्ष के बीच सबसे बड़े राजनीतिक विवादों में शामिल हो गया है। एक ओर सरकार बिना शर्त चर्चा की बात कर रही है, वहीं विपक्ष पहले जवाबदेही तय करने की मांग पर जोर दे रहा है।
ऐसे में सदन के भीतर सहमति बनने तक इस मुद्दे पर टकराव जारी रहने के संकेत हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों पक्ष किसी साझा रास्ते पर पहुंचते हैं या मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी कार्यवाही इसी तरह हंगामे की भेंट चढ़ती रहती है।