Jamia Protest: छात्र संघ चुनाव की तारीख पर अड़े छात्र, पूर्व छात्रों का समर्थन

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव कराने को लेकर आदेश जारी किए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्र आंदोलन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। छात्रों की प्रमुख मांग है कि प्रशासन चुनाव की स्पष्ट तारीख और पूरी प्रक्रिया के लिए निश्चित समयसीमा घोषित करे। इस बीच, पूर्व छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है।

Jamia Student Union Election: क्या है छात्रों की मुख्य मांग?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वर्ष 2006 से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को चुनाव बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

छात्रों के अनुसार, केवल चुनाव कराने का आदेश देना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि छात्र संघ के संविधान को कब मंजूरी मिलेगी और चुनाव किस तारीख को आयोजित किए जाएंगे। इसी मांग को लेकर छात्र अपना विरोध जारी रखे हुए हैं।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्र संघ के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं उठाने और विश्वविद्यालय से जुड़े फैसलों में प्रतिनिधित्व प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

Jamia Protest News: पूर्व छात्रों ने भी उठाई आवाज

जामिया नगर स्थित स्येदा मंजिल में जामिया कलेक्टिव की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली का समर्थन किया। इस दौरान आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों और प्रशासन के फैसलों पर चर्चा हुई।

पूर्व छात्रों और वक्ताओं ने छात्र प्रतिनिधित्व को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रशासन से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्र संघ चुनाव के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार होना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिल सके।

विश्वविद्यालय ने चुनाव को लेकर क्या आदेश दिया?

जामिया प्रशासन ने 26 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासन ने विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन और कारण बताओ नोटिस भी रद्द करने की घोषणा की।

हालांकि, छात्रों की आपत्ति इस बात पर है कि संविधान को मंजूरी देने की तारीख स्पष्ट नहीं की गई है। उनका कहना है कि जब तक संविधान की मंजूरी और चुनाव कराने की प्रक्रिया के लिए निश्चित समयसीमा तय नहीं होती, तब तक चुनाव की वास्तविक तारीख को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।

यही वजह है कि विश्वविद्यालय के आदेश के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं।

Jamia News: छात्रों ने प्रशासन के सामने रखीं अन्य मांगें

छात्र संघ चुनाव की बहाली के अलावा प्रदर्शनकारियों ने कई अन्य मांगें भी उठाई हैं। इनमें संविधान का मसौदा तैयार करने वाली समिति में छात्र प्रतिनिधियों को शामिल करना और प्रदर्शन के दौरान की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेना शामिल है।

छात्रों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनकी मांगों में मुख्य प्रॉक्टर के इस्तीफे और सुरक्षा सलाहकार के पद को समाप्त करने की मांग भी शामिल है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और छात्रों पर निगरानी को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

इसके अतिरिक्त, छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की है। ये मांगें आंदोलन को केवल चुनाव की तारीख तक सीमित नहीं रहने देतीं, बल्कि परिसर में छात्र अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े व्यापक मुद्दों को भी सामने लाती हैं।

परिसर में तनाव, ऑनलाइन कक्षाएं जारी

विरोध प्रदर्शन के बीच विश्वविद्यालय परिसर की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रशासन ने 24 अक्टूबर से सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन मोड में संचालित करने का फैसला किया था। परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के साथ कैंटीन और लाइब्रेरी बंद होने को लेकर भी छात्रों ने आपत्ति जताई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों और परिसर में आवाजाही पर प्रतिबंध से विद्यार्थियों को परेशानी हो रही है। दूसरी ओर, प्रशासन ने मौजूदा परिस्थितियों के बीच ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था लागू की है।

आंदोलन के दौरान कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। इस वजह से छात्र संघ की बहाली का मुद्दा लगातार गंभीर बना हुआ है।

Jamia Student Protest: आगे क्या होगा?

फिलहाल, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर गतिरोध बना हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने संविधान की मंजूरी के बाद 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का आदेश दिया है, जबकि छात्र संविधान को मंजूरी देने और चुनाव कराने की पूरी समयसीमा स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन का अगला चरण प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच होने वाली बातचीत तथा मांगों पर लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा। जब तक चुनाव की निश्चित तारीख और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं आती, तब तक इस मुद्दे पर असहमति बने रहने की संभावना है।

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