UP Politics :  उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का सियासी असर अब 2027 के विधानसभा चुनाव तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी चुनावी गणित को आधार बनाकर सपा के PDA फॉर्मूले पर निशाना साधा।

लखनऊ में ‘सेवा ज्योति यात्रा-विकसित भारत संकल्प सभा’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा चुनाव ने विधानसभा चुनाव के नतीजे का संकेत दे दिया है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि यूपी में एक बार फिर ‘80-20’ की लड़ाई सामने आ गई है।

योगी ने कहा, “80 फीसदी एनडीए में और 20 फीसदी पीडीए में।” उन्होंने आगे कहा कि पीडीए का क्या हाल होने वाला है, यह भी सामने आएगा।

राज्यसभा के समीकरण को 2027 से जोड़ रहे योगी

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए इस बार बीजेपी ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो उम्मीदवार उतारे हैं। सपा के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के बाद सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ हो गया है।

यही राजनीतिक घटनाक्रम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का आधार बना। उन्होंने राज्यसभा के मौजूदा समीकरण को आगामी विधानसभा चुनाव की तस्वीर से जोड़ते हुए सपा के चुनावी नैरेटिव पर हमला किया।

हालांकि, राज्यसभा में सीटों का मौजूदा गणित अपने आप में विधानसभा चुनाव के वोट शेयर या नतीजे का पूर्वानुमान नहीं है। योगी का इसे 2027 के संभावित परिणाम से जोड़ना उनका राजनीतिक आकलन और चुनावी संदेश है।

अखिलेश के ‘403’ वाले संदेश के जवाब में योगी का PDA पर वार

सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला भी 2027 के संदर्भ में देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि अब पार्टी की नजर तीन सीटों पर नहीं, बल्कि 403 विधानसभा सीटों पर है।

इसके साथ सपा ने राज्यसभा की अतिरिक्त सीट के लिए संभावित मुकाबले से खुद को पीछे कर लिया। ताजा समीकरण में बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाने की स्थिति में हैं।

यानी एक तरफ अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव को अगली बड़ी राजनीतिक लड़ाई बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ योगी आदित्यनाथ राज्यसभा के घटनाक्रम को 2027 के चुनावी मुकाबले से जोड़ रहे हैं।

‘80-20’ की राजनीति फिर चर्चा में क्यों?

योगी आदित्यनाथ का ‘80-20’ वाला बयान यूपी की राजनीति में नया नहीं है। इससे पहले भी वह इस फॉर्मूले का इस्तेमाल कर चुके हैं। इस बार फर्क यह है कि मुख्यमंत्री ने इसे सीधे NDA बनाम PDA के संदर्भ में रखा है।

PDA समाजवादी पार्टी का प्रमुख राजनीतिक सामाजिक समीकरण है, जिसमें पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग शामिल हैं। योगी ने इसी फॉर्मूले के जवाब में 80 फीसदी NDA और 20 फीसदी PDA की बात कही।

इस बयान को लेकर यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 80 और 20 कोई मौजूदा चुनावी सर्वे या आधिकारिक वोट प्रतिशत नहीं है। यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक दावा है।

योगी ने कानून-व्यवस्था और विकास का भी जिक्र किया

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सपा के शासनकाल और मौजूदा सरकार के कामकाज की तुलना भी की। उन्होंने 2017 से पहले की स्थिति पर निशाना साधते हुए ‘एक जिला, एक माफिया’ का जिक्र किया।

इसके मुकाबले उन्होंने ‘एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज’, ‘एक जिला, एक उत्पाद’ और ‘एक जिला, एक कुजीन’ जैसी योजनाओं का उल्लेख किया।

इस तरह मुख्यमंत्री के भाषण में 2027 की राजनीतिक लड़ाई के साथ सरकार के विकास और कानून-व्यवस्था से जुड़े दावे भी शामिल रहे।

2027 से पहले आमने-सामने PDA बनाम NDA का नैरेटिव

राज्यसभा चुनाव का मौजूदा घटनाक्रम भले ही विधानसभा चुनाव का सीधा पैमाना न हो, लेकिन इसने यूपी की राजनीति में 2027 के लिए दोनों प्रमुख खेमों के नैरेटिव को जरूर सामने ला दिया है।

सपा जहां PDA, सामाजिक न्याय, संविधान और प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर अपनी राजनीति को आगे बढ़ा रही है, वहीं बीजेपी की ओर से NDA के व्यापक सामाजिक समर्थन का संदेश दिया जा रहा है।

ऐसे में राज्यसभा चुनाव खत्म होने से पहले ही 2027 की राजनीतिक भाषा साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। आने वाले महीनों में यही सामाजिक समीकरण, गठबंधन और उम्मीदवारों की रणनीति यूपी की चुनावी राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे।