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<title>News Tv India &#45; Live Updates</title>
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<description>पढ़ें देश और दुनिया की ताजा ख़बरें, खेल सुर्खियां, व्यापार, बॉलीवुड और राजनीति के समाचार. Read Latest Hindi News at News Tv India</description>
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<title>&apos;असम में फिर से एनडीए को मिलेगा बहुमत&apos;, मतदान खत्म होने के बाद बोले सीएम हिमंता बिस्वा सरमा</title>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 23:31:00 +0530</pubDate>
<description><![CDATA[<p><strong>गुवाहाटी :</strong> असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को हुए विधानसभा चुनावों में मतदान प्रतिशत पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि खासकर हिंदू और स्वदेशी समुदायों में दिखा उत्साह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p></p>
<p>मतदान संपन्न होने के बाद सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि स्थानीय और स्वदेशी मतदाताओं में भागीदारी में स्पष्ट बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि ऐसी सक्रिय भागीदारी चुनावी प्रणाली को मजबूत करती है और शासन में जनता के भरोसे को दर्शाती है।</p>
<p></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि बढ़ता हुआ मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत है कि लोग अब अधिक जागरूक हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग करने के लिए उत्सुक हैं।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान और मतदाताओं का उत्साह राज्य में जीवंत लोकतांत्रिक संस्कृति को दर्शाता है।</p>
<p></p>
<p>सरमा ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि 126 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन 90 से अधिक सीटें जीत सकता है।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से मिले जनसमर्थन से साफ संकेत मिलता है कि जनता का जनादेश सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में है।</p>
<p></p>
<p>मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ज्यादा मतदान से लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत होगी और इससे अधिक प्रतिनिधित्व वाली सरकार बनेगी।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि अंतिम नतीजे राज्य की जनता की आकांक्षाओं को दर्शाएंगे, क्योंकि इस बार असम में हाल के वर्षों के सबसे ज्यादा भागीदारी वाले चुनावों में से एक देखा गया।</p>
<p></p>
<p>चुनाव आयोग के अनुसार, असम में इस बार 85.38 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान हुआ, जो 2016 के 84.67 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।</p>
<p></p>
<p>अधिकारियों ने मतदान को कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया, जहां केवल कुछ स्थानों से मामूली घटनाएं सामने आईं।</p>
<p></p>
<p>प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, महिला मतदाताओं (85.96 प्रतिशत) की भागीदारी पुरुषों (84.80 प्रतिशत) से थोड़ी अधिक रही, जबकि थर्ड जेंडर मतदाताओं का प्रतिशत 36.84 रहा।</p>
<p></p>]]></description>
</item>
<item>
<title>लोकतंत्र का महापर्व: PM मोदी और CM सरमा ने की रिकॉर्ड मतदान की अपील, कहा&#45; &quot;हर वोट मायने रखता है&quot;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/assembly-elections-2026-mahaparv-of-democracy-in-kerala-assam-and-puducherry-1899-candidates-to-be-captured-in-evms</link>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 08:02:00 +0530</pubDate>
<description><![CDATA[<p data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">नई दिल्ली:</b> केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए आज सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों राज्यों के मतदाताओं से लोकतंत्र के इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और रिकॉर्ड तोड़ मतदान करने का विशेष आग्रह किया है।</p>
<p data-path-to-node="3">प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) के माध्यम से अलग-अलग संदेशों में युवाओं और महिलाओं से लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आगे आने को कहा।</p>]]></description>
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</item>
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<title>&apos;पावर प्लांट और ब्रिज डे&apos;: राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम, युद्ध की आहट तेज</title>
<link>https://www.newstvindia.in/iran-us-tensions-irgcs-open-threat-to-tech-giants-april-1-8-pm-ultimatum</link>
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<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 22:52:00 +0530</pubDate>
<description><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:<span> </span></strong>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद कड़ी भाषा में धमकी दी है. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि मंगलवार को ईरान में “पावर प्लांट डे” और “ब्रिज डे” एक साथ हो सकता है. उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने ईरान में जो कुछ बचा है, उसे नष्ट करना अभी शुरू भी नहीं किया है. अब ब्रिज के बाद पावर प्लांट पर हमला होगा.</p>
<p>ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह खोलना होगा, वरना परिणाम बहुत भयानक होंगे. उन्होंने कहा कि अगर होर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान को “जहन्नुम” भेज दिया जाएगा.</p>
<h3><strong>ट्यूसडे पावर प्लांट और ब्रिज डे</strong></h3>
<p>ट्रंप के पोस्ट में लिखा, “मंगलवार ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ होगा. जैसा पहले कभी नहीं देखा गया, वैसा कुछ होने वाला है.” उन्होंने ईरान की नई व्यवस्था को भी चेतावनी दी कि जो करना है, वह तेजी से करना होगा. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है. </p>
<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का महत्वपूर्ण रास्ता है. यहां से बहुत बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. ईरान के इस रास्ते को बंद रखने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है.</p>
<div id="JBM_ARTICLE_inline-p2"></div>
<h3><strong>ईरान पर लगातार दबाव</strong></h3>
<p>ट्रंप ने पहले भी 48 घंटे की समय सीमा दी थी. उन्होंने कहा था कि अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो अमेरिका कहर बरपाएगा. अब उन्होंने समय खत्म होने की बात कही है. ट्रंप ने एक दुर्लभ बचाव अभियान का भी जिक्र किया, जिसमें अमेरिकी बलों ने ईरान के अंदर जाकर घायल एफ-15 पायलट को बचाया. ट्रंप का कहना है कि यह मिशन बहुत खतरनाक था. अमेरिकी सैनिक घंटों तक ईरानी क्षेत्र में रहे और दुश्मन की नजर से बचते रहे.</p>
<h3><strong>ईरान का सख्त रुख</strong></h3>
<p>ईरान ने ट्रंप की इन धमकियों को पूरी तरह ठुकरा दिया है. ईरानी कमांडरों ने अमेरिका की चेतावनी को “घबराया हुआ और मूर्खतापूर्ण” बताया है. ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका या इजरायल उसके बुनियादी ढांचे पर हमला करता है तो जवाब में पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर भारी हमले होंगे.</p>
<p>ईरान ने हाल ही में खाड़ी देशों में ऊर्जा सुविधाओं पर हमले भी किए है. दोनों तरफ से बढ़ती धमकियों से युद्ध की आशंका और मजबूत हो गई है.दुनिया पर असरस्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने या बंद रहने से पूरी दुनिया के तेल बाजार पर असर पड़ रहा है. ट्रंप का अल्टीमेटम न सिर्फ ईरान को, बल्कि पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है. </p>]]></description>
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<title>डिजिटल युद्ध की आहट: ईरान की रडार पर 18 अमेरिकी टेक कंपनियां, बहरीन में अमेजन डेटा सेंटर के पास हमला</title>
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 07:22:00 +0530</pubDate>
<description><![CDATA[<p data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">दुबई/वॉशिंगटन:</b> मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ ले चुका है, जहां युद्ध का दायरा पारंपरिक मोर्चों से निकलकर ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेक्टर तक फैल गया है। ईरान द्वारा अमेरिकी टेक दिग्गजों को निशाना बनाने की सीधी चेतावनी के बाद अब जमीन पर इसके असर दिखने शुरू हो गए हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, बहरीन स्थित अमेजन (Amazon) के डेटा सेंटर के बेहद करीब ड्रोन हमले किए गए हैं, जिससे वहां के तकनीकी परिचालन पर गंभीर असर पड़ा है।</p>
<p data-path-to-node="3">हालांकि, प्रारंभिक सूचना के अनुसार डेटा सेंटर की मुख्य इमारत को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन आसपास हुए शक्तिशाली धमाकों की वजह से इसकी कार्यप्रणाली बाधित हुई है। यह घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब जंग सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस युद्ध की आग की चपेट में आ रहा है।</p>
<h2 data-path-to-node="4">निशाने पर मेटा, गूगल और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियां</h2>
<p data-path-to-node="5">1 अप्रैल 2026 को सामने आई आधिकारिक जानकारियों के मुताबिक, ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए खुलकर घोषणा की है कि वह अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर सकता है। खुफिया रिपोर्ट्स का दावा है कि ईरान ने कुल 18 अमेरिकी टेक कंपनियों को संभावित लक्ष्यों (Potential Targets) के रूप में चिन्हित किया है।</p>
<p data-path-to-node="6">इस सूची में मेटा (Meta), गूगल (Google), एप्पल (Apple) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) जैसी दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियां शामिल हैं। ईरान का तर्क है कि ये कंपनियां मध्य पूर्व में डेटा, क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से प्रतिकूल गतिविधियों में सहायक हो रही हैं। इस घोषणा के बाद से पूरे क्षेत्र में काम कर रही अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं चरम पर हैं।</p>
<h2 data-path-to-node="7">साइबर और फिजिकल हमलों का दोहरा खतरा</h2>
<p data-path-to-node="8">विशेषज्ञों का मानना है कि अब टेक कंपनियों को केवल साइबर हमलों का ही नहीं, बल्कि बहरीन जैसी घटनाओं के बाद फिजिकल हमलों का भी सामना करना पड़ सकता है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जो कंपनियां मध्य पूर्व के डिजिटल स्पेस को नियंत्रित कर रही हैं, वे उसके रडार पर रहेंगी। इससे न केवल सूचनाओं के प्रवाह पर असर पड़ सकता है, बल्कि वैश्विक क्लाउड स्टोरेज और इंटरनेट सेवाओं में भी बड़े व्यवधान आने की आशंका है।</p>
<p data-path-to-node="9">तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इन कंपनियों के डेटा सेंटर्स या केबल नेटवर्क को निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर केवल युद्धरत देशों पर ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और संचार व्यवस्था पर पड़ेगा।</p>
<h2 data-path-to-node="10">ट्रंप की सख्त चेतावनी: 'सैन्य और आर्थिक स्तर पर देंगे जवाब'</h2>
<p data-path-to-node="11">अमेरिकी टेक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाए जाने की खबरों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अमेरिकी कंपनी या उसके डिजिटल ढांचे पर आंच आती है, तो अमेरिका इसका जवाब 'पूरी ताकत' से देगा। उन्होंने इसे सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता पर हमला करार दिया है।</p>
<p data-path-to-node="12">व्हाइट हाउस से जारी संदेश में कहा गया है कि अमेरिका ऐसी किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई के खिलाफ सैन्य और आर्थिक, दोनों मोर्चों पर जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है। ट्रंप के इस कड़े रुख से साफ हो गया है कि यदि टेक कंपनियों पर हमले जारी रहे, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष एक विनाशकारी और व्यापक वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है।</p>]]></description>
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<title>Hormuz Crisis 2026: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में रोके तीन जहाज; अमेरिका और इजरायल के सहयोगियों के लिए रास्ता बंद</title>
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<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 18:54:00 +0530</pubDate>
<description><![CDATA[<p><span>ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कड़ा करते हुए तीन विदेशी जहाजों को वापस लौटा दिया है। IRGC ने स्पष्ट किया है कि यह रणनीतिक मार्ग अब उन देशों के लिए प्रतिबंधित रहेगा जो अमेरिका और इजरायल का समर्थन कर रहे हैं। इस कदम ने राष्ट्रपति ट्रंप के उन दावों को भी चुनौती दी है जिसमें उन्होंने ईरान द्वारा टैंकरों को रास्ता देने की बात कही थी।</span></p>
<h4><span>IRGC की कार्रवाई और सख्त संदेश</span></h4>
<p><span>ईरानी गार्ड्स ने इस सैन्य कार्रवाई को अपनी संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने का हिस्सा बताया है। रोके गए तीनों जहाज अलग-अलग देशों के कंटेनर पोत थे जिन्हें चेतावनी देने के बाद आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। ईरान ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपने विरोधियों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल, से जुड़े किसी भी समुद्री आवागमन को अब बर्दाश्त नहीं करेगा। यह कदम उस समय उठाया गया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है।</span></p>
<h4><span>ट्रंप के दावे और जमीनी हकीकत में विरोधाभास</span></h4>
<p><span>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर संकेत दिया था कि ईरान बातचीत के लिए नरम पड़ रहा है और उसने कुछ तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है। हालांकि, ईरान के ताजा बयान और जहाजों को रोकने की कार्रवाई ट्रंप के दावों के ठीक उलट है। दोनों देशों के बीच सूचनाओं के इस विरोधाभास से किसी भी संभावित शांति समझौते की राह और अधिक कठिन हो गई है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति अभी भी काफी अस्थिर है।</span></p>
<h4><span>वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर गहराता संकट</span></h4>
<p><span>होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने या वहां तनाव बढ़ने का सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। फरवरी के अंत से शुरू हुए संघर्ष के बाद से कई बड़े शिपिंग ऑपरेटरों ने पहले ही इस रास्ते से दूरी बनाना शुरू कर दिया है, जिससे माल ढुलाई का समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह नाकाबंदी जारी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के स्तर को छू सकती हैं, जो वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक मंदी का कारण बन सकता है।</span></p>
<h4><span>नागरिकों और सैन्य ठिकानों के लिए चेतावनी</span></h4>
<p><span>ईरान ने इस संघर्ष को केवल समुद्र तक सीमित नहीं रखा है और क्षेत्र में मौजूद आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। खासकर उन इलाकों से दूर रहने को कहा गया है जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में हमलों की आशंका को लेकर चिंता जताई है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। यह चेतावनी संकेत देती है कि ईरान आने वाले दिनों में जमीन पर मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर और अधिक आक्रामक ड्रोन या मिसाइल हमले कर सकता है।</span></p>]]></description>
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<title>US&#45;Iran Crisis: ट्रंप के प्रस्तावित चीन दौरे से पहले बीजिंग के सुर बदले; ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की तैयारी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/us-iran-war-live-updates-peace-resolutions-rattled-iran-rejects-us-requirements-compensation-and-control-of-hormuz</link>
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<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 09:50:00 +0530</pubDate>
<description><![CDATA[<p><span>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगामी चीन दौरे से पहले चीन ने ईरान विवाद पर अपने कूटनीतिक रुख में बदलाव के संकेत दिए हैं। बीजिंग अब तनाव कम करने और ईरान को बातचीत के लिए राजी करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि उच्च-स्तरीय अमेरिकी-चीन शिखर सम्मेलन के लिए स्थिर वातावरण तैयार किया जा सके।</span></p>
<p><span>अमेरिकी सरकार के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, चीन अब केवल ईरान का मूक समर्थक नहीं रह गया है बल्कि वह शांतिदूत की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। बीजिंग ने संकेत दिया है कि वह ईरानियों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए सक्रिय है और इस बदलाव को छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन चाहता है कि राष्ट्रपति ट्रंप की मेजबानी करने से पहले खाड़ी की स्थिति स्थिर हो जाए जिससे द्विपक्षीय आर्थिक और सुरक्षा वार्ताओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सके। खाड़ी में जारी युद्ध और हालिया हमलों के कारण राष्ट्रपति ट्रंप के दौरे की तारीखों में बदलाव हो सकता है और अब इसके मई 2026 में होने की चर्चा है।</span></p>
<h3><span>होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक आर्थिक चिंताएं</span></h3>
<p><span>होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी कॉरिडोर है जो दुनिया भर में तेल और गैस शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। यहाँ किसी भी तरह की रुकावट का मतलब वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल है। एक बड़ी ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्था होने के नाते चीन के लिए भी यह जरूरी है कि खाड़ी में पूर्ण रूप से शांति बहाल हो। एशिया का हर देश इस प्रस्तावित समिट पर करीब से नजर रख रहा है क्योंकि इससे इलाके की स्थिरता और आर्थिक हालात पर गहरा असर पड़ सकता है।</span></p>
<h3><span>चुनौतियां और रणनीतिक मुद्दे</span></h3>
<p><span>कूटनीतिक बातचीत के बीच कुछ गंभीर मुद्दे अब भी बने हुए हैं जिन पर अमेरिकी वार्ताकार कड़ी नजर रख रहे हैं। इसमें चीन द्वारा ईरानी तेल की खरीद और ईरान को संभावित सैन्य समर्थन जैसे विषय शामिल हैं। युद्ध से पहले चीन द्वारा ईरान को एंटी-शिप मिसाइल बेचने की चर्चाओं ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी थी। इन मुश्किलों के बावजूद दोनों पक्ष बातचीत बनाए हुए दिख रहे हैं क्योंकि यह दोनों के ही हित में है। यदि चीन ईरान को बातचीत के लिए राजी कर लेता है, तो यह मौजूदा वैश्विक संकट के बीच एक बड़ी कूटनीतिक जीत साबित हो सकती है।</span></p>]]></description>
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<title>ईरान ने अमेरिका को दी होर्मुज से 10 तेल टैंकर गुजरने की अनुमति</title>
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<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 03:01:00 +0530</pubDate>
<description><![CDATA[<p><span>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि युद्धविराम पर चल रही बातचीत के बीच ईरान ने अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 10 तेल टैंकर गुजरने की अनुमति दी है.</span></p>]]></description>
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