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<title>News Tv India &#45; : विदेश</title>
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<description>News Tv India &#45; : विदेश</description>
<dc:language>hi</dc:language>
<dc:rights>© 2026 News Tv India . All rights reserved.</dc:rights>

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<title>व्हाइट हाउस का दोटूक जवाब: ईरान पर समुद्री प्रतिबंध अब और सख्त, सीजफायर बढ़ाने का कोई इरादा नहीं</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/white-house-toxic-response-maritime-sanctions-on-iran-tougher-now-no-intent-to-increase-ceasefire</link>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस का ईरान पर कड़ा रुख: समुद्री प्रतिबंध पूरी तरह लागू। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने सीजफायर बढ़ाने की खबरों को किया खारिज, होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी सेना तैनात ]]></description>
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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 06:59:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>White House, Iran Sanctions, Caroline Leavitt, US Navy, USS Abraham Lincoln, Middle East Crisis, US Centcom, Hormuz Strait, International News</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई द‍िल्‍ली : </strong>व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि सुबह मैंने कुछ गलत रिपोर्टिंग देखी, जिसमें कहा गया था कि हमने औपचारिक रूप से सीजफायर बढ़ाने का अनुरोध किया है। यह बात सच नहीं है। ईरान से जुड़े समुद्री प्रतिबंध ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू होगा। खासकर अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी में।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>ईरान की नाकेबंदी पर सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पोस्‍ट में व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा, "इसे पूरी तरह से लागू कर दिया गया है, और इसे ईरान के बंदरगाहों में आने या वहां से जाने वाले सभी देशों के जहाजों पर लागू किया जा रहा है... इसमें अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के सभी ईरानी बंदरगाह शामिल हैं और इस क्षेत्र में हमारी अमेरिकी सेनाएं उन जहाजों के लिए नेविगेशन की स्वतंत्रता का समर्थन कर रही हैं, जो होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरते हुए गैर-ईरानी बंदरगाहों तक आ-जा रहे हैं।"</p>
<p></p>
<p>सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्‍स पोस्‍ट में व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा, ''सुबह मैंने कुछ गलत रिपोर्टिंग देखी, जिसमें कहा गया था कि हमने औपचारिक रूप से सीजफायर (युद्धविराम) को बढ़ाने का अनुरोध किया है। यह बात सच नहीं है।''</p>
<p></p>
<p>उन्‍होंने कहा, "हमें किसी समझौते की संभावनाओं को लेकर अच्छा महसूस हो रहा है... और ज़ाहिर है, राष्‍ट्रपत‍ि ट्रंप की मांगों को पूरा करना ईरान के ही सबसे अच्छे हित में है।"</p>
<p></p>
<p>अमेरिकी नौसेना के जहाज ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे हैं, जबकि सेंटकॉम ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी नाकेबंदी को लागू करना जारी रखे हुए है। अमेरिकी सेनाएं वहां मौजूद हैं, सतर्क हैं और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं।''</p>
<p></p>
<p>यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों पर अमेरिकी नाकेबंदी के पहले 48 घंटों के दौरान, कोई भी जहाज अमेरिकी सेनाओं को पार नहीं कर पाया है। इसके अलावा, 9 जहाजों ने अमेरिकी सेनाओं के निर्देश का पालन करते हुए वापस मुड़कर किसी ईरानी बंदरगाह या तटीय क्षेत्र की ओर लौट गए हैं।</p>
<p></p>
<p>यूएस सेंट्रल कमांड ने अरब सागर में उड़ान संचालन करते हुए यूएसएस अब्राहम लिंकन का एक वीड‍ियो आधिकारिक 'एक्‍स' अकाउंट में जारी करते हुए ल‍िखा, ''हजारों अमेरिकी सैनिक, जिनमें अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के 5,000 नाविक और मरीन शामिल हैं। ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने के मिशन को अंजाम दे रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>वैश्विक तनाव: पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बात, यूक्रेन में युद्धविराम उल्लंघन; हिजबुल्लाह के इजरायल पर हमले</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/global-tension-putin-iran-talks-ukraine-ceasefire-violation-hezbollah-israel-attacks</link>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में शांति प्रयासों की विफलता के बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से बात की। यूक्रेन में युद्धविराम उल्लंघन के आरोप लगे, हिजबुल्लाह ने इजरायली सेना पर हमले का दावा किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 07:48:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Russia, Iran, Ukraine, Middle East, Ceasefire, Putin, Hezbollah, Israel</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<h2>Key Highlights</h2>
<ul>
<li>रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मध्य पूर्व में शांति प्रयासों की विफलता के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बात की।</li>
<li>रूस ने यूक्रेन पर 32 घंटे के ऑर्थोडॉक्स ईस्टर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।</li>
<li>लेबनान स्थित हिजबुल्लाह संगठन ने इजरायली सेना पर दो अलग-अलग ड्रोन हमलों का दावा किया।</li>
</ul>
<h2>मध्य पूर्व में शांति प्रयासों पर पुतिन की बातचीत</h2>
<p>नई दिल्ली से मिल रही जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के इस्लामाबाद में मध्य पूर्व में शांति प्रयासों के विफल होने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने इस्लामाबाद में ईरान-अमेरिका के बीच विफल हुई वार्ता पर विस्तार से चर्चा की।</p>
<p>इंटरफैक्स समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि पुतिन ने इस बातचीत में कहा कि रूस मध्य पूर्व में स्थायी समाधान के लिए अपनी तरफ से सुविधा प्रदान करने के प्रयासों को जारी रखने को तैयार है। यह बातचीत ऐसे नाजुक समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया है।</p>
<p>पुतिन ने क्षेत्रीय तनाव कम करने और सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक व कूटनीतिक तरीकों से संघर्ष को सुलझाने का आह्वान किया है। उन्होंने पहले भी जारी हिंसा और इसके व्यापक क्षेत्रीय प्रभावों पर चिंता जताई थी। इसी कड़ी में उन्होंने स्थिति को शांत करने के व्यापक प्रयासों के तहत खाड़ी देशों समेत कई पक्षों से संपर्क बनाए रखा है।</p>
<h2>यूक्रेन में ईस्टर युद्धविराम का उल्लंघन</h2>
<p>इस बीच, मास्को ने रविवार को यूक्रेन पर क्रेमलिन द्वारा घोषित 32 घंटे के ऑर्थोडॉक्स ईस्टर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। रूसी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यूक्रेन ने रूसी सैनिकों के ठिकानों को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, युद्धविराम के शुरुआती 16 घंटों में यूक्रेनी सेना ने लगभग दो हजार बार युद्धविराम का उल्लंघन किया।</p>
<p>मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'ईस्टर युद्धविराम घोषित होने के बावजूद यूक्रेनी सशस्त्र बलों ने पोक्रोव्स्कोये क्षेत्र से रूसी सैनिकों के ठिकानों पर तीन बार हमला किया।' गाई और डेनेप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र के ओत्रादनोये बस्तियों को भी दो बार निशाना बनाया गया, हालांकि सभी हमलों को नाकाम कर दिया गया।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के रविवार के बयान में यह भी कहा गया, '11 अप्रैल को शाम 4:00 बजे (मास्को समय) से 12 अप्रैल को सुबह 8:00 बजे (मास्को समय) के बीच यूक्रेनी सशस्त्र बलों द्वारा कुल 1,971 बार युद्धविराम का उल्लंघन किया गया।' रूसी सेना ने सुमी क्षेत्र में कोंड्राटोव्का और नोवाया सेच के पास, साथ ही डोनेट्स्क पीपुल्स रिपब्लिक में कालेनिकी के पास स्थित ठिकानों की ओर बढ़ने के यूक्रेन के चार प्रयासों को भी विफल कर दिया। वहीं, यूक्रेन ने रविवार को दावा किया कि रूसी सेना ने शनिवार शाम से अबतक युद्धविराम का 2,299 बार उल्लंघन किया है।</p>
<h2>हिजबुल्लाह ने इजरायली सेना पर हमलों का किया दावा</h2>
<p>लेबनान स्थित हिजबुल्लाह संगठन ने इजरायली सेना पर दो अलग-अलग हमलों का दावा किया है। पहले हमले में हिजबुल्लाह ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के तायबेह शहर में इजरायली सैन्य वाहन को निशाना बनाया। संगठन के बयान के अनुसार, इस वाहन में कमांड टीम सवार थी और ड्रोन हमले में इसे लक्षित किया गया।</p>
<p>दूसरे हमले में हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के किर्यात शमोना बैरक पर कई ड्रोन दागे। संगठन ने दावा किया है कि ये हमले इजरायली उल्लंघनों के जवाब में किए गए हैं।</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>पूर्व अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की चेतावनी, &amp;apos;रणनीतिक विफलता&amp;apos; की ओर बढ़ रहा है अमेरिका</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/former-us-secretary-of-state-warns-us-moving-towards-strategic-failure</link>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन की हालिया सैन्य सफलताओं को लेकर पूर्व अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटनी ब्लिंकन ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। ब्लिंकन के अनुसार, वर्तमान में दिखाई दे रही सैन्य जीत भविष्य में एक बड़ी &#039;रणनीतिक विफलता&#039; का कारण बन सकती है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 07:24:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Antony Blinken, US-Iran tensions, Strategic Failure, Strait of Hormuz, Washington Foreign Policy, Blinken Interview, Nuclear Deal, Donald Trump Iran Policy, Uranium Enrichment, Global Energy Security</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="3"><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0">वाशिंगटन:</b> वाशिंगटन की हालिया सैन्य सफलताओं को लेकर पूर्व अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटनी ब्लिंकन ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। ब्लिंकन के अनुसार, वर्तमान में दिखाई दे रही सैन्य जीत भविष्य में एक बड़ी 'रणनीतिक विफलता' का कारण बन सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि अमेरिका को इस समय अत्यधिक संयम बरतने और बातचीत की मेज पर लौटने की तत्काल आवश्यकता है।</p>
<p data-path-to-node="4">सीएनएन के कार्यक्रम में फरीद जकारिया के साथ बातचीत के दौरान ब्लिंकन ने स्पष्ट किया कि युद्ध के मैदान में मिली तात्कालिक बढ़त को अंतिम परिणाम समझना भूल होगी। उनके मुताबिक, मौजूदा स्थिति “तुरंत की जीत, लेकिन लंबे समय की हार” की ओर इशारा कर रही है। सैन्य दबाव के बावजूद, ईरान की बुनियादी ताकत और उसकी परमाणु क्षमताएं अब भी काफी हद तक सुरक्षित हैं।</p>
<h2 data-path-to-node="5">सैन्य सफलता और दीर्घकालिक जोखिम</h2>
<p data-path-to-node="6">ब्लिंकन ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका मौजूदा सैन्य दबाव को ही अंतिम समाधान मानता है, तो अंत में उसके हाथ क्या लगेगा। उन्होंने आंकड़ों और जमीनी हकीकत का हवाला देते हुए बताया कि ईरान के पास अब भी उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम, उन्नत सेंट्रीफ्यूज और मिसाइलों का बड़ा जखीरा मौजूद है।</p>
<p data-path-to-node="7">इस संकट में एक नया और महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तेहरान का बढ़ता नियंत्रण है। ब्लिंकन ने इसे रणनीतिक मोड़ बताया है, जिससे ईरान की मोलभाव करने की शक्ति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर उसका प्रभाव पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।</p>
<h2 data-path-to-node="8">वार्ता की विफलता और भविष्य की चुनौतियां</h2>
<p data-path-to-node="9">इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे की लंबी मैराथन बातचीत के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। फिलहाल दोनों देश एक नाजुक युद्धविराम पर टिके हुए हैं। ब्लिंकन ने चेतावनी दी है कि यदि कूटनीति विफल होती है, तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेहद कठिन विकल्पों का सामना करना पड़ेगा।</p>
<p data-path-to-node="10">उनके अनुसार, अमेरिका के पास या तो संघर्ष को और अधिक बढ़ाने का रास्ता बचेगा या फिर किसी समझौते पर पहुंचने का। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि दोबारा युद्ध शुरू करना न केवल "बहुत जोखिम भरा" होगा, बल्कि आर्थिक रूप से "बेहद महंगा" भी साबित हो सकता है। प्रशासन को सलाह दी गई है कि वे सैन्य कार्रवाई के बजाय अन्य माध्यमों से दबाव बनाना जारी रखें।</p>
<h2 data-path-to-node="11">ईरानी वार्ताकारों की कुशलता और कूटनीतिक पेच</h2>
<p data-path-to-node="12">ब्लिंकन ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि ईरान के साथ किसी भी समझौते तक पहुंचना एक कठिन प्रक्रिया है। उन्होंने ईरानी वार्ताकारों को बेहद कुशल और अनुभवी करार दिया। उनके अनुसार, तेहरान को एक अखंड विचार वाला देश मानना गलत होगा, क्योंकि वहां की सत्ता संरचना में भी अलग-अलग विचारधाराएं सक्रिय हैं।</p>
<p data-path-to-node="13">समझौते की संभावनाओं पर बात करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) पर कुछ लचीला रुख अपनाया जा सकता है। इसमें ईरान को बहुत कम स्तर पर और सीमित मात्रा में संवर्धन की अनुमति देना शामिल हो सकता है, जिससे उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा भी बनी रहे और अमेरिका के सुरक्षा सरोकार भी पूरे हों।</p>
<h2 data-path-to-node="14">घरेलू राजनीति और अविश्वास का माहौल</h2>
<p data-path-to-node="15">बातचीत के बार-बार अटकने के पीछे ब्लिंकन ने भरोसे की कमी को मुख्य कारण बताया। ईरान चाहता है कि भविष्य की कोई भी अमेरिकी सरकार परमाणु समझौते से पीछे न हटे, लेकिन अमेरिका की वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में ऐसा कानूनी आश्वासन देना लगभग असंभव है। इस घरेलू राजनीतिक जटिलता और ईरान के विकसित होते परमाणु कार्यक्रम ने कूटनीतिक रास्ते को और अधिक संकरा बना दिया है।</p>
<p data-path-to-node="16">अंततः ब्लिंकन ने रणनीतिक धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उनका मानना है कि इतिहास गवाह है कि कठिन से कठिन मुद्दों को भी कूटनीति के जरिए सुलझाया जा सकता है, बशर्ते दोनों पक्ष झुकने और समझौता करने के लिए तैयार हों।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका&#45;ईरान वार्ता बेनतीजा: 20 घंटे से अधिक चर्चा के बाद भी नहीं बनी सहमति, जेडी वेंस ने दी जानकारी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/us-iran-talks-fruitless-no-deal-after-20-hours-jd-vance</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी सीनेटर जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच 20 घंटे से अधिक चली चर्चा बेनतीजा रही और कोई समझौता नहीं हो सका। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 07:55:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US-Iran, Diplomacy, JD Vance, International Relations, Middle East, Negotiations, No Deal</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<h2>Key Highlights</h2>
<ul>
<li>अमेरिका और ईरान के बीच 20 घंटे से अधिक चली मैराथन वार्ता बेनतीजा समाप्त हुई।</li>
<li>अमेरिकी सीनेटर जेडी वेंस ने बिना किसी समझौते के अमेरिका लौटने की पुष्टि की।</li>
<li>यह महत्वपूर्ण चर्चा क्षेत्रीय स्थिरता और अन्य मुद्दों पर केंद्रित थी।</li>
</ul>
<p>अमेरिकी सीनेटर जेडी वेंस ने हाल ही में घोषणा की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच 20 घंटे से अधिक समय तक चली गहन चर्चा किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच सकी। वेंस ने बताया कि लंबी बातचीत के बाद भी कोई डील नहीं हो पाई है, और वह बिना किसी समझौते के अमेरिका लौट रहे हैं। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, जहां दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और सहमति बनाने की उम्मीदें थीं।</p>
<p>यह बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई थी, जहां दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य मतभेदों को सुलझाना और मध्य पूर्व में स्थिरता को बढ़ावा देना था। हालांकि, इतने लंबे विचार-विमर्श के बावजूद, परिणाम वही रहा, जिसकी कई विश्लेषकों को आशंका थी – गतिरोध।</p>
<p>वेंस के बयान से स्पष्ट है कि ईरान और अमेरिका अपने प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनाने में विफल रहे हैं। चर्चा के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों सहित विभिन्न संवेदनशील बिंदुओं पर बात हुई। दोनों देशों के बीच दशकों से चला आ रहा अविश्वास और गहरे मतभेद, इन वार्ताओं में भी एक बड़ी बाधा साबित हुए।</p>
<div style="background: #f8f9fa; padding: 15px; border-left: 4px solid #007bff; margin: 20px 0;"><strong>💡 Did You Know?</strong> होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग लेन में से एक है, जिससे दुनिया के कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों को सीधे प्रभावित करता है।</div>
<p>इस असफलता का मतलब यह है कि अमेरिका और ईरान के संबंध निकट भविष्य में तनावपूर्ण बने रह सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन वार्ताओं पर करीब से नज़र रख रहा था, यह उम्मीद करते हुए कि कोई सफलता मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता का मार्ग प्रशस्त करेगी। लेकिन, जेडी वेंस की घोषणा से यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी लंबा रास्ता तय करना है।</p>
<p>जहां विभिन्न देशों में सरकारें अपने नागरिकों के लिए बड़े फैसले लेती हैं और विकास परियोजनाओं पर काम करती हैं</p>
<p><strong>Also Read : </strong><a href="https://www.newstvindia.in/punjab/90-crore-to-bathinda-cm-bhagwant-mann-inaugurates-multania-rob-new-bridge-to-be-built-in-janata-nagar" target="_blank" rel="noopener">पंजाब में बठिंडा को 90 करोड़ की सौगात मिली</a>,</p>
<p>वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर समाधान खोजना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अमेरिका-ईरान वार्ता का बेनतीजा रहना इस बात का एक और उदाहरण है कि भू-राजनीतिक मुद्दों पर सर्वसम्मति तक पहुंचना कितना कठिन हो सकता है।</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेपाल के पूर्व PM केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक जेल से रिहा: 13 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मिली आजादी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/former-nepal-pm-kp-sharma-oli-and-ramesh-lekhak-released-from-jail-13-days-after-supreme-court-order</link>
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<description><![CDATA[ नेपाल की राजनीति में पिछले दो हफ्तों से चल रही उठापटक के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गुरुवार को न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दोनों नेताओं की 13 दिनों की जेल यात्रा समाप्त हुई है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 07:03:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>BaluSingh Rajpurohit</dc:creator>
<media:keywords>KP Sharma Oli Released, Ramesh Lekhak, Nepal Supreme Court, Kathmandu News, Gen-Z Protests Nepal, Nepal Politics 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काठमांडू : </strong>नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया गया। उन्होंने जेल में 13 दिन बिताए थे।</p>
<p></p>
<p>इन दोनों को 28 मार्च को एक ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया था, जो पिछले साल सितंबर में जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों को दबाने से जुड़ा था। इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों की जान चली गई थी और इसे 'दोषपूर्ण हत्या' का मामला माना गया था।</p>
<p></p>
<p>केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक के परिवारों की ओर से दायर 'बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका' पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि काठमांडू जिला अदालत की ओर से दी गई पांच दिन की अतिरिक्त रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद, गुरुवार तक इन दोनों को रिहा कर दिया जाए।</p>
<p></p>
<p>सोमवार को जारी अदालत के आदेश में कहा गया था कि जांच पूरी करें और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें, या 'राष्ट्रीय आपराधिक प्रक्रिया संहिता' के अनुसार केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक को हिरासत से रिहा करें।</p>
<p></p>
<p>पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद, पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था।</p>
<p></p>
<p>ओली ने फेसबुक पर लिखा कि हालाँकि सरकार ने मेरे खिलाफ पक्षपातपूर्ण और बदले की भावना से आपराधिक आरोप लगाए और मुझे 13 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा, लेकिन आखिरकार मुझे रिहा कर दिया गया, क्योंकि सरकार इस मामले में मुझ पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत पेश करने में विफल रही।</p>
<p></p>
<p>हालाँकि, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि अपनी खराब सेहत के कारण वे इलाज के लिए कुछ और दिनों तक अस्पताल में ही रहेंगे।</p>
<p></p>
<p>बता दें कि ओली और लेखक की गिरफ़्तारी, 'विशेष अदालत' के पूर्व अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता वाले एक आयोग की सिफारिश के बाद हुई। इस आयोग का गठन पिछले साल 8 और 9 सितंबर को नेपाल में जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं की जांच के लिए किया गया था।</p>
<p></p>
<p>आयोग ने सिफ़ारिश की थी कि केपी शर्मा ओली और रमेश लेखक और पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग पर 'राष्ट्रीय दंड संहिता' की धारा 181 और 182 के तहत 'आपराधिक लापरवाही' का आरोप लगाया जाए। अगर वे दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 10 साल तक की कैद की सजा हो सकती है।</p>
<p></p>
<p>सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, जेन-जी आंदोलन के दौरान 77 लोगों की जान चली गई थी, और 84 अरब नेपाली रुपये से अधिक की सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;अमेरिका और ईरान साथ मिलकर करेंगे काम&amp;apos;: सीजफायर के बाद ट्रंप ने दिए सहयोग के संकेत</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पिछले 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद अब शांति की उम्मीद जगी है। दो हफ्ते के अस्थायी सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐतिहासिक यू-टर्न लेते हुए ईरान के साथ मिलकर काम करने के संकेत दिए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 07:58:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Iran US Ceasefire, Nuclear Deal, Sanctions Relief, Truth Social, Global Diplomacy 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई द‍िल्‍ली : </strong>अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के 40 द‍िन बाद हालात अब एक नए मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं। दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ म‍िलकर काम करने की बात कही है।</p>
<p></p>
<p>दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण, सख्त निगरानी और प्रतिबंधों में संभावित राहत जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनने की बात सामने आई है, जो वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।</p>
<p></p>
<p>दो हफ्तों के सीजफायर के ऐलान के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति और सहयोग की दिशा में बड़ा संकेत दिया है। ट्रंप ने इसे दुनिया के लिए 'बड़ा दिन' बताते हुए कहा कि ईरान अब संघर्ष से थक चुका है और पुनर्निर्माण की राह पर आगे बढ़ना चाहता है।</p>
<p></p>
<p>ट्रंप ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर कहा, ''संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के साथ मिलकर काम करेगा, जिसके बारे में हमने यह तय किया है कि वह एक बहुत ही सफल 'सत्ता परिवर्तन' के दौर से गुजरा है। अब यूरेनियम का संवर्धन नहीं किया जाएगा, और संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरान के साथ मिलकर, जमीन में बहुत गहराई में दबी हुई (बी-2 बॉम्बर्स) सारी परमाणु 'डस्ट' को खोदकर बाहर निकालेगा। यह अभी भी और पहले से ही बहुत ही कड़ी सैटेलाइट निगरानी के तहत है।</p>
<p></p>
<p>ट्रंप ने कहा, ''हम ईरान के साथ टैरिफ और प्रतिबंधों में राहत देने के मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। 15 में से कई बिंदुओं पर पहले ही सहमति बन चुकी है। इस मामले पर ध्यान देने के लिए आपका धन्यवाद।''</p>
<p></p>
<p>बता दें कि ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमले से पीछे हटते हुए दो हफ्ते का अस्थायी युद्धविराम घोषित किया। यह फैसला उस शर्त पर लिया गया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह सुरक्षित और तुरंत खोलेगा। इस घोषणा से पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिली है।</p>
<p></p>
<p>बताया जा रहा है कि यह निर्णय ट्रंप द्वारा तय किए गए रात 8 बजे (ईएसटी) के डेडलाइन से महज 90 मिनट पहले लिया गया। इसके पीछे पर्दे के पीछे की कूटनीति की अहम भूमिका रही। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के बाद दोनों तरफ से सीजफायर की स्थिति बनी है।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और अब ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जो बातचीत के लिए एक मजबूत आधार है।</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;विनाशकारी होगा अंजाम&amp;apos;: ट्रंप के &amp;apos;मंगलवार अल्टीमेटम&amp;apos; पर ईरान का पलटवार, बाब&#45;अल&#45;मंडेब बंद करने की धमकी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/disastrous-result-iran-responds-to-trumps-tuesday-ultimatum-threatens-to-shut-down-babal-mandeb</link>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व में युद्ध के बादल अब और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के पावर प्लांट और पुलों को उड़ाने की दी गई &#039;मंगलवार शाम&#039; की समय सीमा पर तेहरान ने बेहद सख्त लहजे में जवाबी चेतावनी जारी की है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 19:18:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Iran vs USA 2026, Donald Trump, Strait of Hormuz, Bab al-Mandab, Global Energy Crisis, Middle East War News</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान : </strong>ईरान ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर उसके नागरिक ठिकानों पर और हमला हुआ तो उसकी प्रतिक्रिया 'कहीं अधिक विनाशकारी' और व्यापक होगी।</p>
<p>खतम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के एक प्रवक्ता ने कहा, ''अगर नागरिक ठिकानों पर हमले दोहराए जाते हैं, तो हमारे आक्रामक और जवाबी अभियानों के अगले चरण कहीं अधिक विनाशकारी और व्यापक होंगे।''</p>
<p>इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहा तो वह ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देंगे।</p>
<p>स‍िन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, एक अन्य घटनाक्रम में ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलयाती ने रविवार को चेतावनी दी कि रेजिस्टेंस फ्रंट बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट को निशाना बना सकता है।</p>
<p>वेलयाती ने सोशल मीडिया पर कहा, "अगर व्हाइट हाउस अपनी मूर्खतापूर्ण गलतियों को दोहराने के बारे में सोचता है, तो वह जल्द ही समझ जाएगा कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का प्रवाह एक संकेत भर से बाधित किया जा सकता है।"</p>
<p>उन्होंने पानी के रास्ते के संभावित बंद होने का इशारा किया। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला बाब अल-मंडेब स्ट्रेट, अटलांटिक, हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच शिपिंग के लिए एक अहम पॉइंट है।</p>
<p>द वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर तेहरान अमेर‍िका की मांगें नहीं मानता है, तो ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर हमले हो सकते हैं।</p>
<p>ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान तय समय में कार्रवाई करने में नाकाम रहता है, तो उसके पावर प्लांट और पुलों सहित जरूरी एसेट्स को बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।</p>
<p>ट्रंप ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल को बताया, "अगर वे मंगलवार शाम तक कुछ नहीं करते हैं, तो उनके पास कोई पावर प्लांट नहीं होगा, और उनके पास कोई पुल भी नहीं होगा।"</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरान पूरे देश में मौजूद हर पावर प्लांट और हर दूसरे प्लांट को खो सकता है, जो संभावित हमलों के पैमाने को दिखाता है।</p>
<p>यह टिप्पणी होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के बीच आई है, जो एक जरूरी ग्लोबल ऑयल रूट है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;मुश्किल वक्त के साथी&amp;apos;: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अजरबैजान को बताया भाईचारे वाला राष्ट्र</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/companions-of-difficult-times-iranian-president-masoud-pejeshkian-calls-azerbaijan-a-brotherly-nation</link>
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<description><![CDATA[ मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अजरबैजान के साथ अपने रिश्तों को &#039;सभ्यतागत जड़ों&#039; से जुड़ा बताया है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ हुई हालिया बातचीत में अजरबैजान की सरकार और वहां की जनता द्वारा दिखाए गए समर्थन की जमकर सराहना की। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 07:13:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Masoud Pezeshkian, Iran-Azerbaijan Relations, Ilham Aliyev, Foreign Policy, Middle East News, Iran US Relations</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">नई दिल्ली:</b> मध्य पूर्व और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अजरबैजान के साथ अपने रिश्तों को 'सभ्यतागत जड़ों' से जुड़ा बताया है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ हुई हालिया बातचीत में अजरबैजान की सरकार और वहां की जनता द्वारा दिखाए गए समर्थन की जमकर सराहना की।</p>
<p data-path-to-node="3">पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किए गए अपने संदेश में स्पष्ट किया कि मित्र और भाईचारे वाले राष्ट्र कठिन समय में ही एक-दूसरे की असली पहचान करते हैं। उन्होंने अजरबैजान को एक ऐसा पड़ोसी बताया जिसके साथ ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक हैं।</p>
<h2 data-path-to-node="4">अजरबैजान के नेतृत्व के प्रति व्यक्त किया आभार</h2>
<p data-path-to-node="5">ईरानी राष्ट्रपति ने न केवल वर्तमान राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव बल्कि पूर्व नेतृत्व के साथ हुए संवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संबंधों की जड़ें जितनी गहरी होती हैं, भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए यह बंधन उतना ही मजबूत होता जाता है। अजरबैजान की ओर से संकट के समय दिखाई गई सहानुभूति को ईरान ने एक बड़े सकारात्मक संकेत के रूप में स्वीकार किया है।</p>
<p data-path-to-node="6">विशेषज्ञों का मानना है कि पेजेशकियन का यह बयान क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ विवादों को कम करने की उनकी विदेश नीति का हिस्सा है। ईरान अब अपने निकटतम पड़ोसियों के साथ आर्थिक और रणनीतिक तालमेल बिठाने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है।</p>
<h2 data-path-to-node="7">"ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के दुश्मन नहीं"</h2>
<p data-path-to-node="8">अजरबैजान के साथ रिश्तों पर चर्चा करने के साथ-साथ राष्ट्रपति पेजेशकियन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की छवि को लेकर भी एक बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि ईरानी जनता अमेरिकी या यूरोपीय लोगों के प्रति कोई मनमुटाव या दुश्मनी नहीं रखती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने हमेशा विदेशी सरकारों की नीतियों और वहां की आम जनता के बीच एक स्पष्ट अंतर रखा है।</p>
<p data-path-to-node="9">हालांकि, उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ इजरायल के एक 'प्रॉक्सी' (प्रतिनिधि) के रूप में काम कर रहा है। पेजेशकियन के अनुसार, ईरान ने अपने आधुनिक इतिहास में कभी भी विस्तारवाद या उपनिवेशवाद का रास्ता नहीं चुना, बल्कि वह खुद वैश्विक शक्तियों के दबाव और आक्रमण का शिकार रहा है।</p>
<h2 data-path-to-node="10">शांति और संप्रभुता पर केंद्रित नीति</h2>
<p data-path-to-node="11">राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि ईरान की प्राथमिकता अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है, न कि किसी पर प्रभुत्व जमाना। उन्होंने पड़ोसी देशों, अमेरिका और यूरोप के संदर्भ में कहा कि ईरान सभी के साथ गरिमापूर्ण संबंधों का इच्छुक है, बशर्ते विदेशी हस्तक्षेप बंद हो।</p>
<p data-path-to-node="12">क्षेत्रीय कूटनीति में आ रहे इन बदलावों को वैश्विक राजनीति के जानकार काफी अहम मान रहे हैं। अजरबैजान के साथ प्रगाढ़ होते रिश्ते और पश्चिमी देशों की जनता के प्रति नरम रुख, पेजेशकियन सरकार की एक नई और संतुलित कूटनीतिक पहुंच की ओर इशारा करते हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>होर्मुज स्ट्रेट खोलकर तेल से बड़ा मुनाफा कमाने का मौका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/opportunity-to-make-big-profits-from-oil-by-opening-hormuz-strait-president-donald-trump</link>
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<description><![CDATA[ खाड़ी क्षेत्र में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि तेल व्यापार से बड़ा लाभ कमाने के लिए होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह सक्रिय किया जा सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 07:11:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Strait of Hormuz, Oil Prices, Global Energy Supply, Maritime Intelligence, Gulf Tension</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">वॉशिंगटन:</b> खाड़ी क्षेत्र में जारी भारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान देकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि तेल व्यापार से बड़ा लाभ कमाने के लिए होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) को फिर से पूरी तरह सक्रिय किया जा सकता है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि समुद्री यातायात में सुधार के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं।</p>
<p data-path-to-node="3">ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "थोड़ा और समय मिलने पर हम आसानी से होर्मुज जलसंधि खोल सकते हैं, तेल निकाल सकते हैं और बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। यह दुनिया के लिए एक 'गशर' (बड़ा स्रोत) साबित होगा।" उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही में बेहद धीमी लेकिन सतर्क वापसी देखी जा रही है।</p>
<h2 data-path-to-node="4">जहाजों की आवाजाही में सुधार के संकेत</h2>
<p data-path-to-node="5">मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म 'विंडवर्ड' के आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल को इस जलसंधि से 16 जहाज गुजरे। यह लगातार तीसरा दिन था जब आवाजाही दर्ज की गई, जो पिछले दिनों हुए गंभीर व्यवधान के बाद एक सकारात्मक बदलाव है। बुधवार को भी 16 मालवाहक जहाज यहां से निकले थे, जबकि इससे एक दिन पहले यह संख्या मात्र 11 थी।</p>
<p data-path-to-node="6">हालांकि, यह सुधार अभी भी संघर्ष पूर्व के स्तर से काफी नीचे है। यह संकट मार्च के मध्य में तब गहराया था जब ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की निगरानी में एक अनिवार्य नेविगेशन कॉरिडोर लागू कर दिया था। इसके कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े थे और ईरानी निगरानी में संचालन करने की मजबूरी पैदा हो गई थी।</p>
<h2 data-path-to-node="7">पश्चिमी देशों के जहाजों की 'टेस्टिंग'</h2>
<p data-path-to-node="8">हालिया गतिविधियों से पता चलता है कि कुछ शिपिंग ऑपरेटर्स अब इन प्रतिबंधों को परखने लगे हैं। दो अप्रैल तक अरब की खाड़ी में लगभग 656 जहाज मौजूद थे, जिनमें से 55 प्रतिशत मालवाहक और 45 प्रतिशत तेल टैंकर थे। दिलचस्प बात यह है कि ओमान के नियंत्रण वाले तीन जहाज ईरानी कॉरिडोर को दरकिनार कर अंतरराष्ट्रीय मार्गों से बाहर निकले।</p>
<p data-path-to-node="9">इनमें से एक एलएनजी (LNG) टैंकर सोहार मस्कट के पास पहुंचा, जो तनाव बढ़ने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाला पहला एलएनजी जहाज बना है। इसके साथ ही फ्रांसीसी लॉजिस्टिक्स कंपनी 'सीएमए सीजीएम' से जुड़ा एक कंटेनर जहाज भी इस जलसंधि को पार करने में सफल रहा, जो पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों के लिए एक शुरुआती उदाहरण पेश करता है।</p>
<h2 data-path-to-node="10">स्वामित्व का उलझा हुआ जाल और सुरक्षा चिंताएं</h2>
<p data-path-to-node="11">होर्मुज जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी और नियंत्रण अब भी एक जटिल चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पनामा के झंडे वाले 142 जहाज इस क्षेत्र में सबसे अधिक सक्रिय हैं, जिसके बाद लाइबेरिया और मार्शल आइलैंड्स का नंबर आता है। जहाजों के वास्तविक मालिकों का संबंध मुख्य रूप से चीन, भारत, तुर्की और ईरान से है।</p>
<p data-path-to-node="12">सबसे बड़ी चिंता यह है कि लगभग 25 प्रतिशत जहाजों का स्वामित्व अभी भी अज्ञात है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान के बाद अब वैश्विक बाजार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस रणनीतिक मार्ग को सुरक्षित और लाभदायक बनाने के लिए आने वाले दिनों में क्या ठोस कदम उठाता है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;अमेरिका तनाव: IRGC की &amp;apos;टेक दिग्गजों&amp;apos; को खुली धमकी; 1 अप्रैल की रात 8 बजे का अल्टीमेटम</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/iran-us-tensions-irgcs-open-threat-to-tech-giants-april-1-8-pm-ultimatum</link>
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<description><![CDATA[ ईरान के IRGC ने 18 अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि ईरान को समझौता करना होगा। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 07:01:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>IRGC Threat US Companies, Pete Hegseth Iran War, Apple Google Tesla Iran Target, Middle East Conflict, Global Tech Market</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">तेहरान/वॉशिंगटन :</b> खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने वैश्विक कॉर्पोरेट जगत को हिला देने वाली चेतावनी जारी की है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी धरती पर होने वाले किसी भी हमले या हत्या का बदला सीधे अमेरिकी कंपनियों के प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर लेगा।</p>
<h3 data-path-to-node="3"><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0">IRGC का संदेश: 18 कंपनियों को 'वैध लक्ष्य' घोषित किया</b></h3>
<p data-path-to-node="4">IRGC ने पहली बार नागरिक तकनीक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को सीधे तौर पर युद्ध में घसीटा है। संगठन का आरोप है कि ये कंपनियां खुफिया जानकारी और AI के जरिए ईरान के खिलाफ अभियानों में मदद कर रही हैं। ऐप्पल, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, टेस्ला, इंटेल, आईबीएम और बोइंग समेत कुल 18 कंपनियां इस सूची में शामिल हैं। IRGC ने इन कंपनियों के कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे अपनी जान बचाने के लिए तुरंत कार्यस्थलों को छोड़ दें। संगठन ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि वे इन कंपनियों के दफ्तरों या प्रतिष्ठानों से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी बना लें। यह चेतावनी तेहरान के समयानुसार आज, 1 अप्रैल की रात 8 बजे से प्रभावी होगी।</p>
<h3 data-path-to-node="5"><b data-path-to-node="5" data-index-in-node="0">अमेरिका का जवाब: "अगले कुछ दिन निर्णायक"</b></h3>
<p data-path-to-node="6">ईरान की इस धमकी के बीच वॉशिंगटन ने अपना रुख और कड़ा कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि अमेरिका पीछे हटने वाला नहीं है। हेगसेथ ने कहा कि युद्ध अब अपने पांचवें हफ्ते में है और आने वाले कुछ दिन निर्णायक साबित होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौता नहीं करता, तो सैन्य कार्रवाई और तेज की जाएगी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहयोगियों पर भी दबाव बनाया है कि वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए अधिक साहस दिखाएं और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग करें। हेगसेथ के अनुसार, अमेरिका के पास विकल्पों की कमी नहीं है, जबकि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगातार कमजोर हो रही हैं।</p>
<h3 data-path-to-node="7"><b data-path-to-node="7" data-index-in-node="0">बाजार और वैश्विक सुरक्षा पर असर</b></h3>
<p data-path-to-node="8">IRGC की इस धमकी का असर तुरंत वैश्विक बाजारों पर देखने को मिला है। नैस्डैक में सूचीबद्ध बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में अस्थिरता देखी गई। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 116 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप की नई &amp;apos;वॉर इकोनॉमी&amp;apos;: क्या अरब देश भरेंगे ईरान जंग का बिल? व्हाइट हाउस ने दिए बड़े संकेत</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/trumps-new-war-economy-will-arab-countries-pay-the-iran-war-bill-big-hints-from-the-white-house</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/international/trumps-new-war-economy-will-arab-countries-pay-the-iran-war-bill-big-hints-from-the-white-house</guid>
<description><![CDATA[ डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध का बिल अरब देशों को भेजने की तैयारी में हैं। पेंटागन ने 6 दिनों में 11.3 बिलियन डॉलर खर्च किए। जानें व्हाइट हाउस की नई रणनीति। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 31 Mar 2026 07:33:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Trump Iran War Cost Arab Countries, Karoline Leavitt White House Briefing, US Military Budget Iran 2026, Pentagon Iran War Spending, Gulf War 1990 Comparison</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन : </strong>व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अरब देशों से ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिका-इजरायल युद्ध से जुड़े खर्चों को उठाने में मदद मांगने में "काफी दिलचस्पी" रखेंगे।</p>
<p></p>
<p>व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान लेविट ने कहा कि वह इस मुद्दे पर आगे बढ़कर कुछ नहीं कहेंगी, लेकिन यह एक ऐसा विचार है जिस पर ट्रंप सोच रहे हैं और आने वाले समय में वे इस पर और बात कर सकते हैं।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>इस महीने की शुरुआत में पेंटागन के अधिकारियों ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि ईरान के खिलाफ युद्ध के पहले छह दिनों में ट्रंप प्रशासन ने 11.3 बिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए। यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने दी।</p>
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<p></p>
<p>हालांकि, इस रकम में युद्ध के नुकसान और उसकी भरपाई का खर्च शामिल नहीं है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनुमान है कि युद्ध के पहले तीन हफ्तों में पेंटागन को इसकी लागत लगभग 1.4 बिलियन से 2.9 बिलियन डॉलर के बीच पड़ी होगी। यह अनुमान पेंटागन की पूर्व बजट अधिकारी एलेन मैककस्कर ने लगाया है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>व्हाइट हाउस ने कांग्रेस से कम से कम 200 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त सैन्य बजट की मांग की है। इस पैसे का इस्तेमाल ईरान में चल रहे सैन्य अभियान और पेंटागन के हथियारों के भंडार को फिर से भरने के लिए किया जाएगा।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>लेविट ने यह भी कहा कि अभी ऊर्जा की कीमतों में जो बढ़ोतरी हो रही है, वह अस्थायी है और ईरान को कमजोर करने से लंबे समय में फायदा होगा।</p>
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<p></p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि यह छोटे समय के कदम और कीमतों में थोड़े समय का उतार-चढ़ाव है, लेकिन इसका उद्देश्य अमेरिका, उसके सैनिकों और उसके सहयोगियों के लिए खतरा बने ईरान को खत्म करना है।</p>
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<p>लेविट ने खाड़ी युद्ध का भी जिक्र किया। उस समय अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से कई देशों के साथ मिलकर इराक के खिलाफ कार्रवाई की थी। इराक के आक्रमण के बाद, इस गठबंधन ने संयुक्त राष्ट्र के समर्थन से और कुवैत तथा कई अरब देशों के अनुरोध पर कार्रवाई की थी। ईरान के खिलाफ इस समय अमेरिका और इजरायल ज्यादातर अकेले ही कार्रवाई कर रहे हैं। उन्हें पहले जैसी अंतरराष्ट्रीय समर्थन या क्षेत्रीय सहयोग नहीं मिल रहा है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बदल रहा है नेपाल: भ्रष्टाचार के खिलाफ जान देने वाले 27 छात्रों के घर पहुंचेगा नियुक्ति पत्र; पीएम का बड़ा कदम</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/changing-nepal-appointment-letter-to-reach-home-of-27-students-who-died-against-corruption-pms-big-step</link>
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<description><![CDATA[ नेपाल की राजनीति में युवाओं की आवाज बनकर उभरे प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता संभालते ही एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय पर मुहर लगा दी है। सितंबर 2025 के भ्रष्टाचार विरोधी &#039;Gen-Z आंदोलन&#039; के दौरान पुलिस कार्रवाई में जान गंवाने वाले 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का वादा अब हकीकत में बदल रहा है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 07:40:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Balen Shah Prime Minister Nepal, Gen-Z Protest Nepal, Corruption Protest Nepal Student Deaths, Nepal Government New Decisions</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="1"><b data-path-to-node="1" data-index-in-node="0">काठमांडू/नई दिल्ली :</b> नेपाल की राजनीति में युवाओं की आवाज बनकर उभरे प्रधानमंत्री <b data-path-to-node="1" data-index-in-node="94">बालेन शाह</b> ने सत्ता संभालते ही एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय पर मुहर लगा दी है। सितंबर 2025 के भ्रष्टाचार विरोधी <b data-path-to-node="1" data-index-in-node="208">'Gen-Z आंदोलन'</b> के दौरान पुलिस कार्रवाई में जान गंवाने वाले 27 छात्रों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने का वादा अब हकीकत में बदल रहा है।</p>
<h3 data-path-to-node="3"><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0">कैबिनेट का पहला बड़ा फैसला: युवाओं को सम्मान</b></h3>
<p data-path-to-node="4">प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में बालेन शाह ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी थी। नेपाल सरकार का यह कदम न केवल पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करेगा, बल्कि देश के युवाओं के बीच सरकार की विश्वसनीयता को भी मजबूत करेगा।</p>
<h3 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) ने जारी किया नोटिस</b></h3>
<p data-path-to-node="7">इस सरकारी आदेश को अमली जामा पहनाने की शुरुआत <b data-path-to-node="7" data-index-in-node="45">नेपाल विद्युत प्राधिकरण</b> ने कर दी है:</p>
<ul data-path-to-node="8">
<li>
<p data-path-to-node="8,0,0"><b data-path-to-node="8,0,0" data-index-in-node="0">सूची का प्रकाशन:</b> प्राधिकरण ने उन 27 छात्रों के परिजनों की आधिकारिक सूची जारी की है जिन्हें नियुक्त किया जाना है।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="8,1,0"><b data-path-to-node="8,1,0" data-index-in-node="0">योग्यता आधारित नियुक्ति:</b> परिजनों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार उनके <b data-path-to-node="8,1,0" data-index-in-node="73">गृह जिले</b> के निकटतम कार्यालयों में पदस्थापित किया जाएगा।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="8,2,0"><b data-path-to-node="8,2,0" data-index-in-node="0">समय सीमा:</b> नोटिस के अनुसार, संबंधित परिवारों को <b data-path-to-node="8,2,0" data-index-in-node="47">35 दिनों के भीतर</b> अपने रिश्ते का प्रमाण पत्र और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे, जिसके तुरंत बाद नियुक्ति पत्र सौंप दिए जाएंगे।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="10"><b data-path-to-node="10" data-index-in-node="0">फ्लैशबैक: क्या था सितंबर 2025 का Gen-Z आंदोलन?</b></h3>
<p data-path-to-node="11">नेपाल के इतिहास में 8 सितंबर 2025 की तारीख काले अक्षरों में दर्ज है:</p>
<ol start="1" data-path-to-node="12">
<li>
<p data-path-to-node="12,0,0"><b data-path-to-node="12,0,0" data-index-in-node="0">भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग:</b> युवाओं (Generation Z) ने तत्कालीन सरकार के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू किया था।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="12,1,0"><b data-path-to-node="12,1,0" data-index-in-node="0">पुलिस फायरिंग:</b> आंदोलन के पहले दिन पुलिस की गोलीबारी में <b data-path-to-node="12,1,0" data-index-in-node="56">19 छात्रों</b> की मौत हो गई थी।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="12,2,0"><b data-path-to-node="12,2,0" data-index-in-node="0">त्रासदी:</b> अगले दिन अस्पताल में दम तोड़ने वाले 8 अन्य छात्रों के साथ यह संख्या <b data-path-to-node="12,2,0" data-index-in-node="77">27</b> पहुँच गई।</p>
<p data-path-to-node="12,2,0">इस सामूहिक शहादत ने पूरे नेपाल को झकझोर दिया और अंततः सत्ता परिवर्तन की नींव रखी।</p>
</li>
</ol>
<h3 data-path-to-node="14"><b data-path-to-node="14" data-index-in-node="0">विपक्ष की प्रतिक्रिया और जवाबदेही की मांग</b></h3>
<p data-path-to-node="15">जहाँ एक ओर सरकार के इस त्वरित कदम की सराहना हो रही है, वहीं विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने कुछ और मांगें भी रखी हैं:</p>
<ul data-path-to-node="16">
<li>
<p data-path-to-node="16,0,0"><b data-path-to-node="16,0,0" data-index-in-node="0">दोषियों पर कार्रवाई:</b> विपक्षी दलों का कहना है कि सिर्फ नौकरी देना काफी नहीं है; उन पुलिस अधिकारियों और राजनेताओं की पहचान कर सजा दी जानी चाहिए जो इस नरसंहार के लिए जिम्मेदार थे।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="16,1,0"><b data-path-to-node="16,1,0" data-index-in-node="0">आर्थिक सहायता:</b> कुछ संगठनों ने नौकरी के साथ-साथ एकमुश्त विशेष मुआवजा राशि देने की भी मांग की है।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="18"></h3>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;अमेरिका तनाव: ट्रंप के &amp;apos;समझौते&amp;apos; के संकेत; सैन्य दबाव और कूटनीति के बीच एक नई राह की उम्मीद?</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/iran-us-tensions-trump-signs-deal-hopes-for-a-new-path-between-military-pressure-and-diplomacy</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ एक संभावित समझौते की तरफ इशारा किया है. उनका दावा है कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हुई है, जिससे बातचीत की रफ्तार तेज हुई है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 07:26:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump, Iran, US-Iran Deal, Nuclear Weapons, Middle East, Diplomacy</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन : </strong>अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौता जल्द हो सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका के हालिया हमलों से ईरान की सेना और नेतृत्व कमजोर हुआ है, जिससे बातचीत तेज हुई है. ट्रंप ने फ्लोरिडा के मार-ए-लागो से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “मुझे लगता है कि ईरान के साथ समझौता हो सकता है और यह जल्द ही हो सकता है.”</p>
<h3>बातचीत का दौर: सीधा और परोक्ष</h3>
<p>ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ईरान के साथ सीधे और परोक्ष दोनों तरह से बातचीत कर रहा है. उन्होंने कहा, “हम उनके साथ सीधे भी बात कर रहे हैं और माध्यमों के जरिए भी.” कई रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप प्रशासन के करीबी सलाहकार बातचीत शुरू करने की कोशिशों में जुटे हैं.</p>
<h3>ईरान की सैन्य ताकत को नुकसान</h3>
<p>ट्रंप ने इन बातचीतों को हाल के सैन्य हमलों से जोड़ा और दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. उनके अनुसार, “हमने उनके 158 जहाज, पूरी नौसेना, वायुसेना और ज्यादातर मिसाइलों को नष्ट कर दिया.” फरवरी 2026 में हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में ईरान के परमाणु स्थलों और सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुँचाने की खबरें भी सामने आई थीं.</p>
<h3>नेतृत्व में बदलाव और शर्तें</h3>
<p>ट्रंप ने यह भी कहा कि इन हमलों के बाद ईरान के नेतृत्व में बदलाव आया है. उनके अनुसार, “अब वहां नया नेतृत्व है, जो पहले से ज्यादा समझदारी से व्यवहार कर रहा है.” ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका की कई शर्तों को मान लिया है. उन्होंने कहा, “हमने उनसे 15 मांगें रखी थीं और ज्यादातर बातों पर वे सहमत हैं.” हालांकि, ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी शांति प्रस्ताव को 'हकीकत से दूर' बताते हुए खारिज कर दिया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम छोड़ने और बैलिस्टिक मिसाइलों को सीमित करने की मांगें शामिल थीं.</p>
<h3>तेल की पेशकश: सद्भाव का संकेत?</h3>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने अमेरिका को तेल देकर सद्भाव दिखाया है. “उन्होंने हमें तेल से भरे कई बड़े जहाज दिए हैं और आज भी 20 और जहाज देने की बात कही है, जिनकी आपूर्ति कल से शुरू होगी.” कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने वैश्विक बाजारों को स्थिर करने के लिए समुद्री ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी थी.</p>
<h3>परमाणु हथियार पर सख्त रुख</h3>
<p>हालांकि, ट्रंप ने माना कि अभी अंतिम समझौते को लेकर पूरी तरह निश्चितता नहीं है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि समझौता हो जाएगा, लेकिन यह भी संभव है कि न हो.” अमेरिकी सैनिक भेजने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प हैं. “हमारे पास वहां काफी सैन्य ताकत मौजूद है और हमारे पास कई विकल्प हैं.” ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उन्होंने सख्त रुख दोहराया. उन्होंने कहा, “मैं नहीं चाहता कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो, क्योंकि अगर उनके पास यह होगा तो वे इसका तुरंत इस्तेमाल कर सकते हैं.”</p>
<h3>क्षेत्रीय सहयोगी साथ</h3>
<p>ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने शर्तें नहीं मानीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने कहा, “उन्हें परमाणु हथियार छोड़ने होंगे, तभी वे फिर से एक मजबूत देश बन सकते हैं. अगर ऐसा नहीं हुआ तो उनका देश भी खतरे में पड़ सकता है.” उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के कई देश अब अमेरिका के साथ खड़े हैं. सऊदी अरब, कतर और यूएई सभी जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं और वे पूरी तरह हमारे साथ हैं.</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान संकट: अमेरिका ने मध्य पूर्व में तैनात किए 3,500 अतिरिक्त मरीन; युद्धपोत &amp;apos;यूएसएस ट्रिपोली&amp;apos; पहुँचा खाड़ी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/international/iran-crisis-us-deploys-3500-additional-marines-to-middle-east-warship-uss-tripoli-reaches-gulf</link>
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<description><![CDATA[ पश्चिम एशिया में युद्ध की आहट के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने USS Tripoli के साथ 3,500 सैनिकों की तैनाती की है। ट्रंप सरकार 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर कर रही विचार। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 29 Mar 2026 10:38:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US Marines Deployment Middle East 2026, USS Tripoli Iran Conflict, CENTCOM Twitter Update Iran, Kharg Island Iran Oil Export, Donald Trump Military Options Iran</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>न्यूयॉर्क : </strong>ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, करीब 3,500 मरीन और नाविकों का एक दल मध्य पूर्व पहुंच चुका है।</p>
<p>सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संक्षिप्त पोस्ट में कहा, यूएसएस ट्रिपोली पर सवार नाविक और मरीन 27 मार्च को यूएस सेंट्रल कमांड के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में पहुंच गए।</p>
<p></p>
<p>सेंटकॉम ने बताया कि यह जहाज अमेरिका की ‘अमेरिका-क्लास’ का एक बड़ा हमला करने वाला युद्धपोत है, जो ट्रिपोली एम्फीबियस रेडी ग्रुप और 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट का मुख्य जहाज है। इस पूरे दल में करीब 3,500 सैनिक शामिल हैं। इनके पास लड़ाकू विमान, हमले करने वाले हेलीकॉप्टर और समुद्र व जमीन दोनों जगह ऑपरेशन करने की क्षमता है।</p>
<p></p>
<p>यह तैनाती अमेरिका की उस बड़ी सैन्य तैयारी का हिस्सा है, जो ईरान के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए की जा रही है। इस तरह की फोर्स को जल्दी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जैसे अहम जगहों पर कब्जा करना, लोगों को सुरक्षित निकालना या समुद्र किनारे हमले करना।</p>
<p></p>
<p>वॉल स्ट्रीट जर्नल ने गुरुवार को पहले रिपोर्ट दी थी कि पेंटागन मध्य पूर्व में 10,000 तक अतिरिक्त जमीन सैनिकों को तैनात करने पर विचार कर रहा है, ताकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास कूटनीति के अलावा सैन्य विकल्प भी रहें।</p>
<p></p>
<p>इन नए सैनिकों में पैदल सेना और बख्तरबंद गाड़ियां शामिल हो सकती हैं। इन्हें उन करीब 5,000 मरीन और हजारों पैराट्रूपर्स के साथ शामिल किया जाएगा, जिन्हें पहले ही इस इलाके में भेजने का आदेश दिया जा चुका है।</p>
<p></p>
<p>हालांकि यह साफ नहीं है कि इन सैनिकों को मध्य पूर्व में ठीक किस जगह तैनात किया जाएगा, लेकिन माना जा रहा है कि इन्हें ईरान और उसके खार्ग द्वीप के पास रखा जा सकता है। खार्ग द्वीप ईरान के लिए बहुत अहम है, क्योंकि यहां से बड़े पैमाने पर तेल का निर्यात होता है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Nepal : शपथ के कुछ घंटों बाद PM बालेन शाह का बड़ा एक्शन; पूर्व पीएम केपी ओली और पूर्व गृह मंत्री गिरफ्तार</title>
<link>https://www.newstvindia.in/nepal-big-action-by-pm-balen-shah-a-few-hours-after-swearing-in-former-pm-kp-oli-and-former-home-minister-arrested</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/nepal-big-action-by-pm-balen-shah-a-few-hours-after-swearing-in-former-pm-kp-oli-and-former-home-minister-arrested</guid>
<description><![CDATA[ नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कार्यभार संभालते ही 2025 के &#039;जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन&#039; के दौरान हुई हिंसा की जांच रिपोर्ट लागू कर दी है। इसके तहत पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को शनिवार सुबह उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 28 Mar 2026 10:21:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Balen Shah Nepal PM, KP Sharma Oli Arrested, Gen-Z Movement Nepal 2025, Sudan Gurung Home Minister</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काठमांडू : </strong>बालेंद्र शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के कुछ घंटे बाद ही बड़ी कार्रवाई की है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल के चेयरमैन केपी शर्मा ओली को पिछले साल हुए जेन-जी आंदोलन के खिलाफ कार्रवाई के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है। नेपाल पुलिस ने ओली के साथ-साथ पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी गिरफ्तार किया है।</p>
<p>गिरफ्तारी के बाद वर्तमान गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी और लिखा कि 'वादा तो वादा है।'</p>
<p>बता दें, नेपाल में 8 और 9 सितंबर 2025 को तत्कालीन सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को लेकर जेन-जी ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। यह प्रदर्शन देखते ही देखते हिंसक हो गया और इसमें कई लोगों की जान गई। वहीं, दोनों पूर्व मंत्रियों की गिरफ्तारी के बाद गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट में लिखा, "वादा तो वादा है: कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। हमने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और जाने वाले गृह मंत्री रमेश लेखक को हिरासत में लिया है। यह किसी के खिलाफ बदला नहीं है; यह बस न्याय की शुरुआत है। मेरा मानना ​​है कि देश अब एक नई दिशा में जा रहा है।"</p>
<p>नेपाली मीडिया द हिमालयन टाइम्स के अनुसार, ओली को शनिवार की सुबह उनके गुंडू स्थित घर से गिरफ्तार किया गया। कल रात से ही पुलिस की एक टीम गुंडू में उनके घर से ओली को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। पुलिस ने आज सुबह ओली की सरकार के तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक को भक्तपुर के कुटुंजे में उनके घर से गिरफ्तार किया।</p>
<p>द हिमालयन टाइम्स ने बताया कि पुलिस ने ओली और लेखक को जेन-जी आंदोलन में शामिल होने के आरोपों के सिलसिले में गिरफ्तार किया है, जिसमें 8 सितंबर को 19 लोग मारे गए थे। नेपाल के इतिहास में पहली बार चीफ एग्जीक्यूटिव को हत्या के शक में हिरासत में लिया गया है। पहले, पूर्व प्रधानमंत्रियों को आपराधिक शिकायतों की जांच के सिलसिले में हिरासत में नहीं लिया गया था, लेकिन राजनीतिक घटनाओं और विरोध प्रदर्शनों के कुछ मामलों में वे पुलिस की निगरानी में थे।</p>
<p>तीन दिन पहले मीडिया में सार्वजनिक हुई जांच आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री ओली, तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चंद्रकुबेर खापुंग और अन्य को क्रिमिनल कोड 2017 की धारा 182 का उल्लंघन करने के शक में हिरासत में लिया गया था।</p>
<p>नए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के शपथ लेने के कुछ ही घंटों के अंदर, एक कैबिनेट मीटिंग में गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले जांच कमीशन की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला किया गया, जिसमें सुरक्षाकर्मियों को छोड़ दिया गया।</p>
<p>गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने कैबिनेट के फैसले की पुष्टि से पहले पुलिस को 8 सितंबर की घटना की जांच करने का निर्देश दिया था। इसके बाद लॉ सेक्रेटरी परश्वोर धुंगाना ने पूरी रात कमीशन की रिपोर्ट को अमल में लाने और जरूरी बातचीत का ड्राफ्ट तैयार करने में बिताई।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Fact Check: रूस की तेल रिफाइनरी पर हमले का वायरल सीसीटीवी वीडियो निकला फेक; AI टूल्स की मदद से बनाया गया भ्रम</title>
<link>https://www.newstvindia.in/fact-check-viral-cctv-video-of-the-attack-on-russias-oil-refinery-is-fake-confusion-created-with-the-help-of-ai-tools</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/fact-check-viral-cctv-video-of-the-attack-on-russias-oil-refinery-is-fake-confusion-created-with-the-help-of-ai-tools</guid>
<description><![CDATA[ यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के दावे के साथ वायरल हो रहा वीडियो असली नहीं है। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक एनालिसिस में पुष्टि हुई है कि यह वीडियो एआई (Artificial Intelligence) की मदद से तैयार किया गया है। ]]></description>
<enclosure url="https://www.newstvindia.in/uploads/images/202603/image_870x580_69c69b8e2aa91.webp" length="37242" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 20:42:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Russia Ukraine War Fact Check, AI Generated Video, Oil Refinery Attack Fake News, Deepfake Analysis 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="4">यूक्रेन द्वारा रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने के दावे के साथ वायरल हो रहा वीडियो असली नहीं है। तकनीकी जांच और फॉरेंसिक एनालिसिस में पुष्टि हुई है कि यह वीडियो एआई (Artificial Intelligence) की मदद से तैयार किया गया है।</p>
<h2 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">वायरल दावा और कूटनीतिक संदर्भ</b></h2>
<p data-path-to-node="7">24 मार्च 2026 को इंस्टाग्राम पर 'poltical_apocalypse' नामक यूजर ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें चार अलग-अलग सीसीटीवी क्लिप्स का कोलाज है। इसमें रिफाइनरियों में भीषण आग और धमाके दिखाई दे रहे हैं। दावा किया गया कि यह यूक्रेन द्वारा रूसी सीमा के काफी अंदर किए गए रणनीतिक हमलों के वास्तविक फुटेज हैं, जिनका मकसद रूस की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना है। हालांकि, यूक्रेन ने वास्तव में 22 मार्च 2026 को फिनलैंड की सीमा के पास स्थित रूस के प्रिमोर्स्क तेल टर्मिनल और ऊफा शहर की रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए हैं, लेकिन वायरल हो रहा यह विशिष्ट वीडियो उन घटनाओं का नहीं है।</p>
<p><img src="https://newstvindia.in/uploads/images/202603/image_870x_69c69d3b393fb.webp" alt="" width="780" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;"></p>
<h2 data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">पड़ताल में सामने आई तकनीकी कमियां</b></h2>
<p data-path-to-node="9">वीडियो की सूक्ष्म जांच करने पर इसमें कई ऐसी विसंगतियां पाई गईं जो केवल एआई-जनित सामग्री में ही संभव हैं। वीडियो की टाइमस्टैम्प्स पूरी तरह से अतार्किक हैं, जहाँ समय आगे बढ़ने के बजाय अचानक पीछे चला जाता है। इसके अलावा, धमाके के समय भागते हुए कर्मचारियों के शरीर की बनावट और उनकी हरकतें अवास्तविक नजर आ रही हैं। 'डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट' (DAU) के अनुसार, 0:06 से 0:08 सेकंड के बीच रिफाइनरी के पाइपों का आकार रहस्यमयी तरीके से बदल रहा है और वे धुंधले या बिगड़े हुए दिख रहे हैं।</p>
<p><img src="https://newstvindia.in/uploads/images/202603/image_870x_69c69da201ab2.webp" alt="" width="780" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;"></p>
<h2 data-path-to-node="10"><b data-path-to-node="10" data-index-in-node="0">तकनीकी जांच और एआई डिटेक्शन के नतीजे</b></h2>
<p data-path-to-node="11">वीडियो की सत्यता जांचने के लिए 'हाइव मॉडरेशन' (Hive Moderation) जैसे अत्याधुनिक एआई डिटेक्शन टूल का सहारा लिया गया, जिसने इस वीडियो को <b data-path-to-node="11" data-index-in-node="135">95% एआई संभावित</b> बताया।</p>
<p><img src="https://newstvindia.in/uploads/images/202603/image_870x_69c69d4191eab.webp" alt="" width="780"></p>
<p data-path-to-node="11">अधिक पुष्टि के लिए 'एआईऑरनॉट' और 'साइट इंजन' जैसे फॉरेंसिक टूल्स का भी उपयोग किया गया। इन सभी तकनीकी जांचों ने स्पष्ट किया कि वीडियो के कीफ्रेम्स किसी वास्तविक कैमरे द्वारा रिकॉर्ड नहीं किए गए हैं, बल्कि एक एल्गोरिदम द्वारा तैयार किए गए हैं।</p>
<p><img src="https://newstvindia.in/uploads/images/202603/image_870x_69c69d3e7e219.webp" alt="" width="780" style="display: block; margin-left: auto; margin-right: auto;"></p>
<p data-path-to-node="11"></p>
<h2 data-path-to-node="12"><b data-path-to-node="12" data-index-in-node="0">वास्तविक हमले बनाम फर्जी वीडियो</b></h2>
<p data-path-to-node="13">रॉयटर्स और एएफपी की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सच है कि यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमलों के बाद रूस के बाल्टिक बंदरगाहों (प्रिमोर्स्क और उस्त-लुगा) ने कच्चे तेल की लोडिंग रोक दी है। इन वास्तविक हमलों के वीडियो अलजजीरा और अन्य प्रमुख मीडिया हाउस द्वारा साझा किए गए हैं, जो वायरल हो रहे सीसीटीवी फुटेज से बिल्कुल अलग हैं।</p>
<p data-path-to-node="13"><strong>निष्कर्ष:</strong> वास्तविक युद्ध की घटनाओं का सहारा लेकर एआई के जरिए डिजिटल भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है और यह वायरल फुटेज पूरी तरह से <b data-path-to-node="13" data-index-in-node="446">फर्जी</b> है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>US&#45;Iran War Update: ट्रंप ने 6 अप्रैल तक रोके हमले; क्या कूटनीति से थमेगा खाड़ी का महायुद्ध?</title>
<link>https://www.newstvindia.in/us-iranwar-update-trump-halts-attacks-until-april-6-will-diplomacy-end-the-gulf-war</link>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर होने वाली सैन्य कार्रवाई को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में है ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 11:16:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Trump Iran War Halt, Strait of Hormuz Crisis, US Iran Diplomacy 2026, Middle East Peace Hopes</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><span>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर होने वाली सैन्य कार्रवाई को 10 दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में है, जिससे क्षेत्र में पूर्ण युद्ध के बीच शांति की एक धुंधली उम्मीद जागी है।</span></p>
<h4><span>हमलों पर रोक और अल्टीमेटम का बैकग्राउंड</span></h4>
<p><span>पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर था, लेकिन अब ट्रंप के रुख में बदलाव आया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के औपचारिक अनुरोध के बाद वे उसकी ऊर्जा इकाइयों (Energy Units) को निशाना बनाने वाले हमलों को </span><span>6 अप्रैल 2026</span><span> तक रोक रहे हैं। इससे पहले 22 मार्च को ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य न खोलने पर ईरान की पावर सप्लाई तबाह करने की धमकी दी थी। हालांकि, बातचीत में प्रगति देखते हुए इस समय सीमा को पहले 5 दिन और अब 10 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। ट्रंप का कहना है कि जमीनी हकीकत मीडिया रिपोर्ट्स से काफी अलग है और दोनों पक्ष एक रचनात्मक समाधान की ओर बढ़ रहे हैं।</span></p>
<h4><span>बैकडोर कूटनीति और रणनीतिक महत्व</span></h4>
<p><span>विशेषज्ञों का मानना है कि हमलों में यह ठहराव केवल सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि एक गहरी कूटनीतिक चाल हो सकती है। लगातार हो रहे हमलों ने ईरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता को काफी नुकसान पहुँचाया है, जिसके चलते उसने इस 'शांति विराम' (Ceasefire) का अनुरोध किया है। यह पूरा विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण और ऊर्जा सप्लाई को लेकर है। अगर 10 दिनों के भीतर इस जलमार्ग को खोलने पर सहमति बन जाती है, तो वैश्विक तेल बाजार में आई अस्थिरता थम सकती है। अमेरिका की इस नरमी के बीच इजरायल के रुख पर भी सबकी नजर है, क्योंकि पिछले हफ्तों में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों को ध्वस्त किया है।</span></p>
<h4><span>शांति या केवल अस्थायी विराम?</span></h4>
<p><span>फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह युद्ध का अंत है। ट्रंप ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि इस 10 दिन की मोहलत के बदले ईरान को कौन सी कड़ी शर्तें पूरी करनी होंगी। यदि 6 अप्रैल तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो क्षेत्र में फिर से बड़े पैमाने पर हमले शुरू होने का खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि 10 दिन का यह ठहराव या तो बड़ा समझौता ला सकता है या सिर्फ एक अस्थायी सांस लेने जैसा हो सकता है। फिर भी, ईरान के अनुरोध को स्वीकार करना दोनों पक्षों के बीच किसी स्तर पर सार्थक बातचीत होने का मजबूत संकेत देता है।</span></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>US&#45;Iran War LIVE Updates: शांति प्रस्तावों पर रार; ईरान ने ठुकराई अमेरिकी शर्तें, मुआवजे और होर्मुज पर नियंत्रण की रखी मांग</title>
<link>https://www.newstvindia.in/us-iran-war-live-updates-peace-resolutions-rattled-iran-rejects-us-requirements-compensation-and-control-of-hormuz</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्लान को ईरान ने खारिज कर दिया है। अमेरिका ने प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम सीमित करने का प्रस्ताव दिया था, जिसके जवाब में ईरान ने युद्ध के हर्जाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण की मांग रखी है। इस बीच, युद्ध के मैदान में इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर बना हुआ है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Mar 2026 02:59:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US Iran War Live, Strait of Hormuz Crisis, Israel Lebanon Conflict 2026, Trump Iran Peace Plan</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>US-Israel-Iran War LIVE Updates:<span> </span></strong><span>बुधवार को, ईरान ने मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध को रोकने के अमेरिकी प्रस्ताव को ठुकरा दिया. इसके बजाय, ईरान ने अपनी तरफ से एक जवाबी प्रपोजल पेश किया. बता दें कि अमेरिका के 15 सूत्रीय प्लान में कई मुख्य बातें शामिल थीं. ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वापस लेना, उसके मिसाइल विकास पर सीमाएं लगाना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है. वहीं, ईरान ने अपना प्रस्ताव शेयर किया. उसकी मांगों में उसके टॉप अधिकारियों की हत्याएं रोकना, इस बात की गारंटी कि भविष्य में उसके खिलाफ कोई युद्ध शुरू नहीं किया जाएगा, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा (हर्जाना) देना, सभी लड़ाइयों को तुरंत खत्म करना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूर्ण कंट्रोल होना शामिल है. आज इस युद्ध में क्या-क्या अपडेट है, यहां जानें</span></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Bangladesh Election 2026: जमात&#45;ए&#45;इस्लामी ने चुनाव परिणामों को दी कानूनी चुनौती; 32 सीटों पर पुनर्मतगणना की मांग</title>
<link>https://www.newstvindia.in/bangladesh-election-2026-jamaat-e-islami-gives-legal-challenge-to-election-results-demands-recount-of-32-seats</link>
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<description><![CDATA[ 12 फरवरी 2026 को हुए बांग्लादेश के 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जमात-ए-इस्लामी ने कानूनी रास्ता अपनाया है। पार्टी ने 32 सीटों पर पुनर्मतगणना के लिए चुनाव आयोग में याचिका दायर की है और 13 सीटों पर परिणामों को अदालत में चुनौती दी है। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 23:41:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Bangladesh Election 2026 Results, Jamaat-e-Islami Legal Action, BNP Victory Dhaka</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="5"><b data-path-to-node="5" data-index-in-node="0">ढाका:</b> बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद हुए पहले बड़े चुनावों के नतीजे अब विवादों के घेरे में हैं। बुधवार, 25 मार्च 2026 को आई रिपोर्ट्स के अनुसार जमात-ए-इस्लामी ने चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का दावा किया है। पार्टी का कहना है कि उसके गठबंधन के कई उम्मीदवार मामूली अंतर से हारे जिसकी मुख्य वजह चुनाव प्रक्रिया में की गई गड़बड़ियां हैं। जमात ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर मतगणना में जानबूझकर देरी की गई, पोलिंग एजेंट्स के हस्ताक्षर गायब थे और कुछ मामलों में पेंसिल से अंकित परिणाम पाए गए जो 'इलेक्शन इंजीनियरिंग' की ओर इशारा करते हैं।</p>
<h2 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">पुनर्मतगणना की मांग और अदालती कार्यवाही</b></h2>
<p data-path-to-node="7">11 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही जमात ने उन 32 निर्वाचन क्षेत्रों में पुनर्मतगणना (Recounting) की मांग की है जहाँ जीत-हार का अंतर मात्र 1,026 से 13,632 वोटों के बीच था। इनमें से 25 सीटों पर जमात के उम्मीदवार, तीन नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी), दो खेलाफत मजलिस और अन्य सहयोगी दलों के प्रत्याशी शामिल थे। चुनाव आयोग में शिकायत के बाद अब तक 12 उम्मीदवार अदालत का रुख कर चुके हैं जिनमें जमात के महासचिव मिया गुलाम परवर भी शामिल हैं जिन्होंने खुलना-5 सीट से याचिका दायर की है।</p>
<h2 data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">पूर्व सलाहकारों की भूमिका पर उठाए सवाल</b></h2>
<p data-path-to-node="9">जमात-ए-इस्लामी ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के दो पूर्व सलाहकारों, सैयदा रिज़वाना हसन और खलीलुर रहमान की भूमिका पर कड़े सवाल उठाए हैं। पार्टी ने इन दोनों से पूछताछ और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। मिया गुलाम परवर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता इन दोनों पूर्व सलाहकारों की भूमिका की न्यायिक जांच कराना है जबकि अन्य मुद्दों को बाद में उठाया जाएगा। जमात का कहना है कि वे फिलहाल बड़े स्तर पर जन आंदोलन से बच रहे हैं और कानूनी प्रक्रिया के जरिए न्याय चाहते हैं।</p>
<h2 data-path-to-node="10"><b data-path-to-node="10" data-index-in-node="0">चुनावी आंकड़े: बीएनपी का बहुमत और जमात की स्थिति</b></h2>
<p data-path-to-node="11">13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को स्पष्ट बहुमत मिला है जिसने अपने दम पर 209 सीटें जीतीं और गठबंधन के साथ यह आंकड़ा 212 तक पहुँचा। वहीं जमात ने अकेले 68 सीटें और गठबंधन के साथ कुल 77 सीटें हासिल की हैं। जमात का तर्क है कि यदि निष्पक्ष जांच और पुनर्मतगणना होती है तो नतीजों की तस्वीर बदल सकती है। फिलहाल पार्टी "इलेक्शन इंजीनियरिंग" के आरोपों की न्यायिक जांच की मांग पर कायम है और सरकार से निष्पक्षता की उम्मीद कर रही है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>US&#45;Iran War Update: बैक&#45;चैनल कूटनीति में भारत की बड़ी भूमिका, ओमान और तुर्की के साथ मिलकर ट्रंप के &amp;apos;5&#45;दिवसीय संघर्ष विराम&amp;apos; की बनाई राह</title>
<link>https://www.newstvindia.in/us-iran-war-update-india-s-major-role-in-back-channel-diplomacy-along-with-oman-and-turkey-paves-way-for-trump-s-5-day-ceasefire</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/us-iran-war-update-india-s-major-role-in-back-channel-diplomacy-along-with-oman-and-turkey-paves-way-for-trump-s-5-day-ceasefire</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ओमान, तुर्की और भारत जैसे देशों की मध्यस्थता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले को 5 दिनों के लिए टालने का ऐलान किया है। भारत ने अपने संतुलित संबंधों का इस्तेमाल कर क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए पर्दे के पीछे अहम संदेश साझा किए हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:55:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US Iran Backchannel Diplomacy 2026, India Role in Iran Conflict, Trump 5 Day Ceasefire, Strait of Hormuz Crisis</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="5"><b data-path-to-node="5" data-index-in-node="0">नई दिल्ली:</b> मध्य-पूर्व में जारी महायुद्ध के बीच शांति की एक धुंधली उम्मीद जागी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 5 दिनों के लिए हमलों को स्थगित करने की घोषणा के पीछे एक बड़ा कूटनीतिक नेटवर्क काम कर रहा है। सूत्रों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस 'सिक्योरिटी वाल्व' कूटनीति में भारत, ओमान और तुर्की जैसे देशों ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद की कड़ियाँ जोड़ने में सफलता पाई है।</p>
<h2 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">ओमान और तुर्की के जरिए कूटनीति के मुख्य केंद्र</b></h2>
<p data-path-to-node="7">मध्यस्थता के इस दौर में ओमान एक बार फिर सबसे विश्वसनीय कड़ी साबित हुआ है क्योंकि मस्कट में हुई गुप्त वार्ताओं ने दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वियों को बातचीत की मेज पर लाने का आधार तैयार किया है। ऐतिहासिक रूप से भी ओमान अमेरिका और ईरान के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता रहा है। इसके साथ ही तुर्की के जरिए भी लगातार संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है और तुर्की के विदेश मंत्री की सक्रियता ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने में मदद की है।</p>
<h2 data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">भारत की संतुलित और प्रभावी भूमिका</b></h2>
<p data-path-to-node="9">इस संकट में भारत की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है क्योंकि नई दिल्ली के संबंध वाशिंगटन और तेहरान, दोनों के साथ काफी मजबूत हैं। भारत ने न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य को बचाने के लिए बल्कि क्षेत्रीय शांति के लिए सऊदी अरब और मिस्र जैसे देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक दबाव बनाया है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के ईरानी नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क ने शुरुआती कूटनीतिक जड़ता को तोड़ने में मदद की जिससे भारतीय हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सकी।</p>
<h2 data-path-to-node="10"><b data-path-to-node="10" data-index-in-node="0">ट्रंप का 5-दिवसीय अल्टीमेटम और शांति की उम्मीद</b></h2>
<p data-path-to-node="11">राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया है कि पिछले दो दिनों में बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है। ट्रंप ने 5 दिनों के लिए ऊर्जा ढांचे पर हमलों को टाल दिया है लेकिन यह पूरी तरह से चल रही वार्ताओं की सफलता पर निर्भर है। ट्रंप का दावा है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो सकता है, हालांकि ईरान के भीतर से अभी इन दावों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। फिर भी इस पहल ने युद्ध को और अधिक फैलने से रोकने में मदद की है।</p>
<h2 data-path-to-node="12"><b data-path-to-node="12" data-index-in-node="0">भविष्य की रणनीति और शांति शिखर सम्मेलन</b></h2>
<p data-path-to-node="13">रिपोर्ट्स के अनुसार कूटनीति का अगला चरण पाकिस्तान के इस्लामाबाद में देखने को मिल सकता है जहाँ संभावित शांति सम्मेलन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी नेतृत्व शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत, ओमान और तुर्की जैसे देशों की यह सक्रियता एक ब्रेक की तरह काम कर रही है जिसने इस संघर्ष को बड़े युद्ध में बदलने से रोक रखा है। आने वाले 5 दिन वैश्विक बाजार और विश्व शांति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>कोलंबिया में सेना का हर्क्यूलीस C&#45;130 विमान क्रैश: 66 सैनिकों की मौत, अमेजन के घने जंगलों में मची चीख&#45;पुकार</title>
<link>https://www.newstvindia.in/army-hercules-c-130-plane-crashes-in-colombia-66-soldiers-killed-screams-in-the-amazon-rainforest</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/army-hercules-c-130-plane-crashes-in-colombia-66-soldiers-killed-screams-in-the-amazon-rainforest</guid>
<description><![CDATA[ कोलंबिया के दक्षिणी अमेजन इलाके में सेना का एक मालवाहक विमान उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार 125 लोगों में से अब तक 66 मौतों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बचाव दल दुर्गम इलाके में राहत कार्य में जुटे हैं। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 09:47:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Colombia Plane Crash 2026, Hercules C-130 Accident, Amazon Jungle Aviation Disaster</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली:</strong><span> कोलंबिया के दक्षिणी अमेजन क्षेत्र से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। सोमवार को कोलंबियाई सेना का एक </span><span>लॉकहीड मार्टिन हर्क्यूलीस C-130</span><span> विमान टेकऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गया। रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे राष्ट्र के लिए एक बड़ी क्षति बताया है। विमान में कुल 125 लोग सवार थे, जिनमें 114 यात्री (ज्यादातर सैनिक) और 11 क्रू सदस्य शामिल थे।</span></p>
<h4><span>टेकऑफ के तुरंत बाद हुआ हादसा और बचाव में चुनौतियां</span></h4>
<p><span>विमान ने पेरू की सीमा के पास स्थित </span><span>पुर्तो लेगुइजामो</span><span> से अपनी उड़ान भरी थी। चश्मदीदों और स्थानीय मीडिया द्वारा जारी वीडियो के अनुसार, टेकऑफ के कुछ ही मिनटों बाद विमान अनियंत्रित होकर घने जंगलों में गिर गया। दुर्घटना स्थल से काला और घना धुआं उठता देखा गया है।</span></p>
<p><span>अमेजन का यह इलाका बेहद दूरदराज और दुर्गम है, जिससे बचाव टीमों को वहां पहुंचने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। घने पेड़ों और दलदली जमीन के कारण एम्बुलेंस और भारी मशीनरी का पहुंचना लगभग असंभव है, जिसके चलते हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है।</span></p>
<h4><span>हताहतों की संख्या और राहत कार्य</span></h4>
<p><span>रक्षा सूत्रों ने अब तक </span><span>66 लोगों की मौत</span><span> की आधिकारिक पुष्टि की है। विमान में सवार अन्य लोगों की तलाश जारी है और घायलों को नजदीकी सैन्य अस्पतालों में एयरलिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी प्राथमिकता जीवित बचे लोगों को बचाने और मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने की है।</span></p>
<h4><span>पुराने पड़ते विमानों पर उठे सवाल</span></h4>
<p><span>इस हादसे ने कोलंबियाई वायुसेना के बेड़े में शामिल पुराने विमानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</span></p>
<p><span>• </span><strong>विमान का इतिहास:</strong><span> हर्क्यूलीस C-130 मॉडल 1950 के दशक से वैश्विक स्तर पर उपयोग हो रहा है। कोलंबिया इसे 1960 के दशक के अंत से उड़ा रहा है।</span></p>
<p><span>• </span><strong>रखरखाव की चुनौतियां:</strong><span> हालांकि कई विमानों को आधुनिक (Modernize) बनाया गया है, लेकिन अमेजन जैसे कठिन मौसम वाले इलाकों में इनकी उम्र और मेंटेनेंस अब चिंता का विषय बन गई है।</span></p>
<p><span>• </span><strong>पड़ोसी देशों में हादसे:</strong><span> गौर करने वाली बात यह है कि हाल ही में पड़ोसी देश बोलीविया में भी इसी मॉडल का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें 20 से अधिक लोगों की जान गई थी।</span></p>
<h4><span>जांच के आदेश और राष्ट्रीय शोक</span></h4>
<p><span>कोलंबियाई सरकार ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। शुरुआती तौर पर तकनीकी खराबी या इंजन फेल होने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन ब्लैक बॉक्स मिलने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी। रक्षा मंत्रालय ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और पूरे देश में सैन्य उड्डयन सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की बात कही है।</span></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;अमेरिका संकट: ट्रंप का दावा&#45; &amp;apos;ईरान ने खुद किया समझौता के लिए संपर्क&amp;apos;, तेहरान का बातचीत से साफ इनकार</title>
<link>https://www.newstvindia.in/iran-us-crisis-trump-claims-iran-contacted-themselves-for-compromise-tehran-explicitly-refuses-to-negotiate</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने युद्धविराम और एक बड़े समझौते के लिए उनसे संपर्क किया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान परमाणु हथियार न बनाने और अपना संवर्धित यूरेनियम सौंपने को तैयार है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे &#039;मनोवैज्ञानिक युद्ध&#039; करार दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 07:49:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Trump Iran Ceasefire Claims 2026, Strait of Hormuz Crisis, Iran Nuclear Deal Update</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="5"><b data-path-to-node="5" data-index-in-node="0">वॉशिंगटन/तेहरान:</b> मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि तेहरान अब टकराव खत्म कर समझौते की राह पर चलना चाहता है। उन्होंने खुलासा किया कि पिछले दो दिनों में दोनों पक्षों के बीच बेहद सकारात्मक और उत्पादक बातचीत हुई है, जिसके बाद उन्होंने ईरान के ऊर्जा ढांचे पर होने वाले संभावित हमलों को <b data-path-to-node="5" data-index-in-node="399">5 दिनों के लिए टालने</b> का आदेश दिया है।</p>
<h2 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">ट्रंप के बड़े दावे और परमाणु कार्यक्रम पर रोक</b></h2>
<p data-path-to-node="7">संसद और मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए ट्रंप ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत की पहल अमेरिका ने नहीं, बल्कि ईरान की ओर से की गई थी। ट्रंप के अनुसार, ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि समझौते के तहत अमेरिका ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम, जिसे उन्होंने 'न्यूक्लियर डस्ट' कहा, उसे अपने कब्जे में ले लेगा।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-media-max-width="560">
<p lang="en" dir="ltr">VIDEO | Florida, USA: President Donald Trump says, "... I am not a fan of what Russia is doing either, but its a lot different. You are talking about a country that has been evil for 47 years... Look at how they attacked all those countries unexpectedly. No one was thinking about… <a href="https://t.co/vJepdJCkJr">pic.twitter.com/vJepdJCkJr</a></p>
— Press Trust of India (@PTI_News) <a href="https://twitter.com/PTI_News/status/2036082738005242165?ref_src=twsrc%5Etfw">March 23, 2026</a></blockquote>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
<h2 data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">ईरान का पलटवार और प्रोपेगेंडा का आरोप</b></h2>
<p data-path-to-node="9">ट्रंप के इन दावों के कुछ ही घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्रालय और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने आधिकारिक बयान जारी कर इन्हें पूरी तरह खारिज कर दिया। ईरान ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ न तो कोई सीधी बातचीत हुई है और न ही कोई समझौता। ईरानी मीडिया ने इसे ट्रंप की एक रणनीतिक चाल बताया है, जिसका उद्देश्य तेल की कीमतों को कम करना और अपनी सैन्य योजनाओं के लिए समय खरीदना है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके पावर प्लांट्स पर हमला हुआ, तो वह पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को स्थायी रूप से नष्ट कर देगा।</p>
<h2 data-path-to-node="10"><b data-path-to-node="10" data-index-in-node="0">ऊर्जा ढांचे पर हमले का डर और कूटनीति</b></h2>
<p data-path-to-node="11">ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपने बिजली संयंत्रों को बचाने के लिए बातचीत की मेज पर आया है क्योंकि अमेरिका के पास ऐसी सैन्य क्षमता है जिससे ईरान के सबसे बड़े बिजली घरों को एक झटके में तबाह किया जा सकता है। इसी डर के कारण ईरान ने अपने रुख में नरमी दिखाई है। ट्रंप ने इस बातचीत में अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जारेड कुशनर की भूमिका का भी जिक्र किया है और इसे क्षेत्र में शांति स्थापित करने का एक बड़ा मौका बताया है।</p>
<h2 data-path-to-node="12"><b data-path-to-node="12" data-index-in-node="0">ईरान में सत्ता परिवर्तन के संकेत और भविष्य की राह</b></h2>
<p data-path-to-node="13">राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में ईरान के भीतर नेतृत्व संकट की ओर भी इशारा किया है। उनका कहना है कि युद्ध के कारण ईरान के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं और वहां का नेतृत्व फिलहाल बिखरा हुआ है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका एक ऐसे नए नेतृत्व के साथ काम करने को तैयार है जो शांति और विशेष रूप से तेल व्यापार के हितों को प्राथमिकता दे। फिलहाल ट्रंप ने 5 दिनों का समय दिया है जिसे वे अंतिम अवसर बता रहे हैं, और पूरी दुनिया की नजरें अब इस समय सीमा पर टिकी हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>चीन की ओर बढ़ा रूसी तेल का टैंकर मुड़ा भारत की तरफ: &amp;apos;एक्वा टाइटन&amp;apos; की न्यू मंगलौर पोर्ट पर एंट्री, ऊर्जा संकट में बड़ी राहत</title>
<link>https://www.newstvindia.in/russian-oil-tanker-heading-towards-china-turns-towards-india-aqua-titan-enters-new-mangalore-port-big-relief-in-energy-crisis</link>
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<description><![CDATA[ वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। रूस से चीन जा रहा तेल टैंकर &#039;एक्वा टाइटन&#039; अपना रास्ता बदलकर कर्नाटक के न्यू मंगलौर पोर्ट पहुंच गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच रूसी तेल की यह खेप भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए &#039;गेमचेंजर&#039; साबित हो रही है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 00:26:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Russian Oil Imports India, Aqua Titan Tanker, Global Energy Crisis 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="5"><b data-path-to-node="5" data-index-in-node="0">नई दिल्ली/मंगलौर:</b> दुनिया भर में जारी ऊर्जा संकट और लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक फैले तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक और व्यापारिक सूझबूझ का परिचय दिया है। रूसी कच्चे तेल से लदा एक विशाल टैंकर <b data-path-to-node="5" data-index-in-node="204">'एक्वा टाइटन' (Aqua Titan)</b>, जिसे मूल रूप से चीन के रिजाओ पोर्ट पहुंचना था, अब भारत के <b data-path-to-node="5" data-index-in-node="290">न्यू मंगलौर पोर्ट</b> पर लंगर डाल चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की ऊर्जा नीति की एक बड़ी सफलता है।</p>
<h3 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">यू-टर्न की कहानी: चीन के बजाय भारत को प्राथमिकता</b></h3>
<p data-path-to-node="7">शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, 'एक्वा टाइटन' जनवरी के अंत में रूस के बाल्टिक सागर स्थित <b data-path-to-node="7" data-index-in-node="86">प्रिमोर्स्क पोर्ट</b> से रवाना हुआ था। मार्च के मध्य तक यह जहाज दक्षिण चीन सागर में था, लेकिन अचानक इसने यू-टर्न लिया और भारत की ओर रुख कर लिया।</p>
<p data-path-to-node="8">इस बड़े बदलाव के पीछे मुख्य कारण <b data-path-to-node="8" data-index-in-node="33">6 मार्च को अमेरिका द्वारा दिया गया 30 दिनों का अस्थायी वेवर (Waiver)</b> बताया जा रहा है। इस छूट ने भारतीय रिफाइनरियों को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने का कानूनी रास्ता साफ कर दिया। परिणाम स्वरूप, भारतीय कंपनियों ने फुर्ती दिखाते हुए एक ही हफ्ते में करीब <b data-path-to-node="8" data-index-in-node="289">3 करोड़ बैरल</b> रूसी क्रूड की बुकिंग कर ली।</p>
<p data-path-to-node="8"><strong>Also Read : </strong><a href="https://www.newstvindia.in/hormuz-open-to-all-except-enemies-iran-hits-back-at-trump-s-48-hour-ultimatum"><span style="color: #ba372a;">दुश्मनों को छोड़ सबके लिए खुला है होर्मुज': ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम पर ईरान का पलटवार</span></a></p>
<h3 data-path-to-node="9"><b data-path-to-node="9" data-index-in-node="0">होर्मुज संकट और भारत की मजबूरी</b></h3>
<p data-path-to-node="10">पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने <b data-path-to-node="10" data-index-in-node="68">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</b> को असुरक्षित बना दिया है। भारत के लिए यह मार्ग जीवन रेखा के समान है क्योंकि:</p>
<ul data-path-to-node="11">
<li>
<p data-path-to-node="11,0,0">भारत की <b data-path-to-node="11,0,0" data-index-in-node="8">40-50% कच्चा तेल</b> आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="11,1,0">एलएनजी (LNG) और एलपीजी (LPG) का बड़ा हिस्सा भी यहीं से गुजरता है। जहाजों की आवाजाही में देरी और बढ़ते 'फ्रेट चार्ज' के कारण भारत पर ऊर्जा संकट मंडरा रहा था। ऐसे में रूसी <b data-path-to-node="11,1,0" data-index-in-node="170">'उराल्स क्रूड'</b> न केवल एक सुरक्षित विकल्प बनकर उभरा है, बल्कि यह भारतीय रिफाइनरियों के लिए रियायती (Discounted) दरों पर भी उपलब्ध है।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="12"><b data-path-to-node="12" data-index-in-node="0">7 टैंकरों ने मोड़ा रुख: भारत की ओर बढ़ रहा तेल का कारवां</b></h3>
<p data-path-to-node="13">'एक्वा टाइटन' अकेला ऐसा जहाज नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम <b data-path-to-node="13" data-index-in-node="69">सात बड़े टैंकरों</b> ने चीन का रास्ता छोड़कर भारत की ओर रुख किया है।</p>
<ul data-path-to-node="14">
<li>
<p data-path-to-node="14,0,0"><b data-path-to-node="14,0,0" data-index-in-node="0">एक्वा टाइटन:</b> इसमें लगभग 7.7 लाख बैरल (1.1 लाख टन) उराल्स क्रूड है, जिसे मंगलौर रिफाइनरी (MRPL) के लिए चार्टर किया गया है।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="14,1,0"><b data-path-to-node="14,1,0" data-index-in-node="0">जुजु एन (Zouzou N):</b> यह सूजमैक्स टैंकर भी मार्च के अंत तक गुजरात के सिक्का पोर्ट पहुंचने की उम्मीद है।</p>
</li>
</ul>
<p data-path-to-node="15">अनुमान है कि मार्च के अंत तक भारत का रूसी तेल आयात <b data-path-to-node="15" data-index-in-node="51">1.5 से 2.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन</b> के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।</p>
<p data-path-to-node="17">जब पारंपरिक तेल मार्ग युद्ध और तनाव की भेंट चढ़ रहे हैं, तब रूस से सस्ता और प्रचुर मात्रा में तेल प्राप्त करना भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर डोज की तरह है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के हिस्से का तेल भारत की ओर मुड़ना यह दर्शाता है कि वैश्विक बाजार में भारत की क्रय शक्ति और कूटनीतिक स्थिति कितनी मजबूत हो चुकी है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;apos;दुश्मनों को छोड़ सबके लिए खुला है होर्मुज&amp;apos;: ट्रंप के 48 घंटे के अल्टीमेटम पर ईरान का पलटवार</title>
<link>https://www.newstvindia.in/hormuz-open-to-all-except-enemies-iran-hits-back-at-trump-s-48-hour-ultimatum</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/hormuz-open-to-all-except-enemies-iran-hits-back-at-trump-s-48-hour-ultimatum</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के चौथे सप्ताह में तनाव अपने चरम पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जिसके जवाब में ईरान ने &#039;शर्तों के साथ&#039; मार्ग खुला रखने की घोषणा की है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 22:53:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Strait of Hormuz Crisis, Trump Iran Ultimatum, Global Oil Supply Impact</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="5"><strong>नई दिल्ली: </strong>मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहाँ दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा दांव पर लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दिए गए <b data-path-to-node="5" data-index-in-node="164">48 घंटे के अल्टीमेटम</b> के बाद वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया है। ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि यह रणनीतिक जलमार्ग पूरी तरह और बिना किसी खतरे के नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के सबसे बड़े बिजली घरों (Power Plants) को 'मिटा' देगा। इस गंभीर धमकी के जवाब में ईरान ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए एक कूटनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया जारी की है।</p>
<h3 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">ईरान का नया रुख: दुश्मनों को छोड़कर सबके लिए खुला</b></h3>
<p data-path-to-node="7">इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि <b data-path-to-node="7" data-index-in-node="66">अली मौसावी</b> ने रविवार को स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तकनीकी रूप से बंद नहीं है, लेकिन यह केवल ईरान के 'मित्र देशों' और तटस्थ जहाजों के लिए खुला है। मौसावी ने कहा, "यह जलमार्ग सभी के लिए खुला है, सिवाय हमारे दुश्मन देशों (अमेरिका और इजराइल) के।"</p>
<p data-path-to-node="8">उन्होंने आगे कहा कि जो भी जहाज ईरान के सुरक्षा नियमों का पालन करेगा और जिसका संबंध दुश्मन देशों से नहीं होगा, उसे गुजरने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी शर्त रखी कि जहाजों को गुजरने से पहले ईरानी अधिकारियों के साथ सुरक्षा समन्वय करना अनिवार्य होगा। यह बयान ट्रंप की उस मांग के जवाब में देखा जा रहा है जिसमें उन्होंने 'बिना किसी शर्त' के मार्ग खोलने को कहा था।</p>
<h3 data-path-to-node="9"><b data-path-to-node="9" data-index-in-node="0">ट्रंप की 'पावर प्लांट' धमकी और ईरान की जवाबी चेतावनी</b></h3>
<p data-path-to-node="10">राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक कड़ा पोस्ट साझा करते हुए लिखा था:</p>
<blockquote data-path-to-node="11">
<p data-path-to-node="11,0">"अगर ईरान 48 घंटों के भीतर होर्मुज को पूरी तरह नहीं खोलता, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनके बिजली घरों को निशाना बनाना शुरू कर देगा, जिसकी शुरुआत सबसे बड़े पावर प्लांट से होगी।"</p>
</blockquote>
<p data-path-to-node="12">ईरान के सैन्य कमांड 'खातम अल-अंबिया' ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर ईरान के ऊर्जा ढांचे या बिजली घरों पर हमला हुआ, तो वे क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इजराइल के सूचना प्रौद्योगिकी (ICT) व अलवणीकरण (Desalination) संयंत्रों को निशाना बनाएंगे। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी 'जीरो रिस्ट्रेंट' की नीति अब लागू हो चुकी है।</p>
<h3 data-path-to-node="13"><b data-path-to-node="13" data-index-in-node="0">होर्मुज का महत्व और वैश्विक आर्थिक संकट</b></h3>
<p data-path-to-node="14">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग <b data-path-to-node="14" data-index-in-node="105">20% हिस्सा</b> गुजरता है। 28 फरवरी 2026 को युद्ध शुरू होने के बाद से इस मार्ग पर यातायात <b data-path-to-node="14" data-index-in-node="190">95% तक गिर गया है</b>।</p>
<p data-path-to-node="15">वर्तमान में स्थिति यह है कि:</p>
<ul data-path-to-node="16">
<li>
<p data-path-to-node="16,0,0">कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें <b data-path-to-node="16,0,0" data-index-in-node="34">$105 प्रति बैरल</b> के पार निकल चुकी हैं।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="16,1,0">लगभग 3,200 व्यावसायिक जहाज और 20,000 नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="16,2,0">ईरान ने अपने स्वयं के 'शिपिंग कॉरिडोर' के माध्यम से चुनिंदा जहाजों को निकलने की अनुमति दी है, लेकिन इसके लिए भारी सुरक्षा समन्वय की मांग की जा रही है।</p>
</li>
</ul>
<p data-path-to-node="17">अब पूरी दुनिया की नजरें सोमवार रात (डेडलाइन खत्म होने तक) पर टिकी हैं। क्या ट्रंप अपनी सैन्य धमकी को अंजाम देंगे, या कूटनीति के जरिए इस 'इकोनॉमिक टाइम बम' को डिफ्यूज किया जा सकेगा?</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा से लेकर न्यूक्लियर प्रोग्राम तक... G7 ने ईरान के खिलाफ जारी किया कड़ा संयुक्त बयान</title>
<link>https://www.newstvindia.in/from-the-security-of-the-hormuz-strait-to-the-nuclear-program-g7-issued-a-strong-joint-statement-against-iran</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/from-the-security-of-the-hormuz-strait-to-the-nuclear-program-g7-issued-a-strong-joint-statement-against-iran</guid>
<description><![CDATA[ G7 देशों और यूरोपीय यूनियन ने मिडिल ईस्ट (सऊदी अरब, UAE, इराक) में ईरान और उसके प्रॉक्सी द्वारा आम नागरिकों और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए जा रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 22 Mar 2026 10:54:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>G7 Condemns Iran Attacks, Middle East Tensions 2026, Strait of Hormuz Security, Iran Proxy War Iraq UAE, UNSC Resolution 2817, Global Energy Market Stability G7</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन :</strong> जी7 देशों ने रविवार को मिडिल ईस्ट के कई देशों में आम लोगों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की। साथ ही, जी7 देशों ने पश्चिम एशिया के उन सभी देशों के लिए अपना समर्थन जताया है जो ईरान की ओर से किए जा रहे हमलों का शिकार हो रहे हैं। पश्चिम एशिया के देशों में ईरानी हमले को जी7 समूह ने गलत बताया।</p>
<p>एक संयुक्त बयान में, जी7 के विदेश मंत्रियों ने यूरोपीय यूनियन के हाई रिप्रेजेंटेटिव के साथ मिलकर, इस बढ़ते तनाव से प्रभावित देशों के साथ एकजुटता दिखाई। ईरानी हमले की आलोचना करने वाले देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं।</p>
<p>बयान में कहा गया है कि जी7 समूह ईरान और उसके प्रॉक्सी के गलत हमलों के सामने इस इलाके में अपने साझेदारों का समर्थन करता है।</p>
<p>बयान में कहा गया, “हम यूएनएससी प्रस्ताव 2817 के मुताबिक, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन और इराक में आम लोगों और आम इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है, पर सरकार के बिना सोचे-समझे किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं।”</p>
<p>जी7 देशों ने चेतावनी दी कि ईरान की हरकतें न सिर्फ टारगेट किए गए देशों को खतरे में डालती हैं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करती हैं। उन्होंने तेहरान से अपनी सैन्य गतिविधि तुरंत रोकने को कहा।</p>
<p>बयान में कहा गया, "ये क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा हैं," और ऐसे सभी हमलों को "तुरंत और बिना किसी शर्त के रोकने" की अपील की गई।</p>
<p>इस समूह ने खास समुद्री रास्तों और वैश्विक सप्लाई चेन, खासकर रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अहमियत पर भी जोर दिया।</p>
<p>बयान में कहा गया, "हम समुद्री रास्तों और नेविगेशन की सुरक्षा, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट और उससे जुड़े सभी अहम पानी के रास्ते शामिल हैं, के साथ-साथ सप्लाई चेन की सुरक्षा और एनर्जी मार्केट की स्थिरता की अहमियत को फिर से सुनिश्चित करते हैं। हम एनर्जी की ग्लोबल सप्लाई का समर्थन करने के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं, जैसे 11 मार्च को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों द्वारा तय किया गया स्टॉक जारी करने का निर्णय।"</p>
<p>पुरानी चिंताओं को दोहराते हुए, जी7 ने कहा कि ईरान को कभी भी न्यूक्लियर हथियार हासिल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने ईरान से अपना बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकने, इलाके और उससे आगे अपनी अस्थिर करने वाली गतिविधियों को खत्म करने और अपने ही लोगों के खिलाफ भयानक हिंसा और दमन बंद करने की अपील की।</p>
<p>साथ ही, जी7 ने प्रभावित देशों के ऐसे हमलों से खुद को बचाने के अधिकार पर जोर दिया। बयान में आगे कहा गया, “हम उन देशों के अधिकार का समर्थन करते हैं जिन पर ईरान या ईरानी प्रॉक्सी ने गलत तरीके से हमला किया है कि वे अपने इलाकों की रक्षा करें और अपने नागरिकों की रक्षा करें। हम उनकी सुरक्षा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए अपने पक्के समर्थन की पुष्टि करते हैं।”</p>
<p>समूह ने इराक में हाल के हमलों की भी निंदा की, खासकर डिप्लोमैटिक सुविधाओं और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने वाले हमलों की।</p>
<p>बयान में कहा गया, “हम इराक में ईरान और उसके मिलिशिया द्वारा डिप्लोमैटिक सुविधाओं और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र में और अमेरिका और काउंटर आईएसआईएस कोएलिशन फोर्स और इराकी लोगों के खिलाफ किए गए खुलेआम हमलों की निंदा करते हैं।”</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>यूएई में ऑस्ट्रेलियाई सैन्य ठिकाने के पास ईरानी मिसाइल का प्रहार; पीएम एंथनी अल्बनीज़ ने की सुरक्षा की पुष्टि</title>
<link>https://www.newstvindia.in/iranian-missile-strikes-near-australian-military-base-in-uae-pm-anthony-albanese-confirms-security</link>
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<description><![CDATA[ दुबई के अल मिनहाद एयरबेस के पास ईरानी मिसाइल गिरने से हड़कंप। ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज़ ने पुष्टि की कि सभी सैनिक सुरक्षित हैं। नागरिकों की वापसी के लिए सैन्य विमान तैनात। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 09:15:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Al Minhad Airbase Missile Attack 2026, Anthony Albanese UAE Attack Update, Iranian Missile UAE Australia Base, Australian Citizens Evacuation Middle East, UAE Security Crisis 18 March</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कैनबरा : </strong>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने पुष्टि की कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों की तैनाती वाले एयरबेस के पास ईरानी मिसाइल ने हमला किया लेकिन किसी भी जवान को चोट नहीं आई।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने पत्रकारों से कहा कि ईरानी मिसाइल ने दुबई के दक्षिण में स्थित अल मिनहाद एयरबेस की ओर जाने वाले एक रास्ते को प्रभावित किया।</p>
<p>उन्होंने कहा, “मैं पुष्टि कर सकता हूं कि किसी ऑस्ट्रेलियाई कर्मी को चोट नहीं आई है और इस समय सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं।”</p>
<p>उन्होंने बताया कि मिसाइल के हमले के चलते लगी आग के कारण एक आवास ब्लॉक और एक चिकित्सा सुविधा को मामूली नुकसान हुआ।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल 2003 से अल मिनहाद एयरबेस का संचालनात्मक मुख्यालय के रूप में उपयोग कर रहा है लेकिन 2021 में अफगानिस्तान से वापसी के बाद यहां छोटी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरानी शासन खाड़ी क्षेत्र में “लगातार हमलों” में शामिल है। इससे पहले 5 मार्च को, एंथनी अल्बनीज़ ने पुष्टि की थी कि ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों की वापसी में मदद के लिए मध्य पूर्व में सैन्य साधन तैनात किए हैं।</p>
<p>संसद में बोलते हुए अल्बनीज़ ने कहा कि सरकार ने सैन्य साधन मध्य पूर्व में तैनात किए ताकि जारी संघर्ष के कारण क्षेत्र में फंसे ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की मदद की जा सके।</p>
<p>स्थानीय मीडिया के अनुसार, मध्य पूर्व में तैनात किए गए सैन्य साधनों में एक परिवहन विमान और एक ईंधन भरे विमान शामिल थे।</p>
<p>आस्ट्रेलियाई सरकार ने घोषणा की थी कि विदेश मामलों और व्यापार विभाग की छह संकट प्रतिक्रिया टीमों को मध्य पूर्व में तैनात किया जाएगा ताकि नागरिकों को अतिरिक्त वाणिज्य दूतावास सहायता प्रदान की जा सके।</p>
<p>11 मार्च तक 3,200 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को 23 व्यावसायिक उड़ानों के माध्यम से देश लौटाया गया।</p>
<p>ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने पहले बताया था कि मध्य पूर्व में लगभग 1,15,000 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक हैं, जिनमें से लगभग 24,000 संयुक्त अरब अमीरात में हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

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<title>ईरान में शोक: अली लारीजानी और बसीज प्रमुख की हमले में मौत; तेहरान ने दागी &amp;apos;हाज कासिम&amp;apos; मिसाइल</title>
<link>https://www.newstvindia.in/iran-mourns-ali-larijani-and-bashiz-chief-killed-in-attack-tehran-fires-haj-qasim-missile</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/iran-mourns-ali-larijani-and-bashiz-chief-killed-in-attack-tehran-fires-haj-qasim-missile</guid>
<description><![CDATA[ ईरान की सुप्रीम सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी हमले में मारे गए। इजरायल ने ली जिम्मेदारी। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में नई बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की और बातचीत से इनकार किया। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 09:12:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Ali Larijani Assassination 2026, Iran Israel War Update, Haj Qasem Ballistic Missile Launch, Gholamreza Soleimani Death Basij, Mojtaba Khamenei Ceasefire Refusal</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान :</strong> ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की है कि उसके सचिव अली लारीजानी एक हमले में मारे गए हैं। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बुधवार सुबह इस रिपोर्ट की जानकारी दी।</p>
<p>तस्नीम की रिपोर्ट के अनुसार, एक बयान में काउंसिल ने कहा कि लारीजानी की मौत मंगलवार सुबह हुई। उनके साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी, काउंसिल के सचिवालय में सुरक्षा मामलों के उप-प्रमुख अलीरेजा बायात और कई अन्य लोग भी मारे गए।</p>
<p>सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने ईरान के विकास में लारीजानी की लंबी सेवा की सराहना की और बाहरी खतरों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय एकता की अपील की।</p>
<p>मंगलवार को, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने ईरान पर चल रहे हमलों में लारीजानी को मार गिराया है।</p>
<p>इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को पुष्टि की कि बसीज स्वयंसेवक बल के प्रमुख घोलमरेज़ा सोलेमानी की मौत अमेरिका-इजरायल के एक हमले में हुई है।</p>
<p>ये मौतें 28 फरवरी से ईरान पर शुरू हुए अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच हुई हैं। इन हमलों के जवाब में, ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों ने पूरे मध्य पूर्व में इजरायली और अमेरिकी हितों पर हमले किए।</p>
<p>विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ किसी भी नए संपर्क की बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।</p>
<p>पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ तनाव कम करने या संघर्ष विराम पर बातचीत करने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया।</p>
<p>तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, आईआरजीसी ने पहली बार इजरायल के खिलाफ एक नई 'हाज कासिम' बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की। इसे एक सटीक-निर्देशित हथियार बताया गया है, जिसका नाम मारे गए कमांडर कासिम सोलेमानी के नाम पर रखा गया है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: अमेरिका ने ईरान के मिसाइल ठिकानों पर किया भीषण प्रहार; होर्मुज स्ट्रेट बना मुख्य रणक्षेत्र</title>
<link>https://www.newstvindia.in/operation-epic-fury-us-strikes-iranian-missile-sites-hormuz-strait-becomes-main-battlefield</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/operation-epic-fury-us-strikes-iranian-missile-sites-hormuz-strait-becomes-main-battlefield</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी सेंटकॉम ने ईरान के एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। बी-52 और एफ-35 विमानों ने होर्मुज स्ट्रेट के पास तबाही मचाई। जानें ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की पूरी जानकारी। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 18 Mar 2026 09:10:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Operation Epic Fury US Iran 2026, Strait of Hormuz Missile Strikes, CENTCOM Iran Attacks Update, US Navy Aircraft Carrier Iran Conflict, B-52 Bomber Iran Mission</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन :</strong> अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये ठिकाने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। यह कार्रवाई “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत की जा रही है, जो अब और तेज हो गया है।</p>
<p>अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, इन हमलों में भारी वजन वाले बमों का इस्तेमाल किया गया, जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी नष्ट कर सकते हैं। ये मिसाइल ठिकाने ईरान के तटीय इलाके में, होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित थे। यहां तैनात एंटी-शिप मिसाइलें गुजरने वाले जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रही थीं।</p>
<p></p>
<p>यह कार्रवाई इस पूरे अभियान में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, क्योंकि अब समुद्री क्षेत्र भी इसका अहम हिस्सा बन गया है। होर्मुज स्ट्रेट इस समय अमेरिकी सैन्य गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन गया है।</p>
<p></p>
<p>सेंटकॉम ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी नौसेना के विमानों ने सैकड़ों लड़ाकू उड़ानें भरी हैं। इससे यह दिखता है कि अमेरिका समुद्र से भी हवाई ताकत बनाए रखने में सक्षम है।</p>
<p></p>
<p>एक दिन पहले जारी जानकारी के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान में अब तक 7,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमला किया जा चुका है। यह अभियान राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य ईरान की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करना और उन ठिकानों को निशाना बनाना है जो तुरंत खतरा पैदा कर सकते हैं।</p>
<p></p>
<p>अब तक 100 से ज्यादा ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या उन्हें नष्ट कर दिया गया है। साथ ही अमेरिकी सेना 6,500 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भर चुकी है।</p>
<p></p>
<p>हमलों के निशाने पर कई तरह के सैन्य ठिकाने हैं। इनमें बैलिस्टिक मिसाइल साइट, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने, आईआरजीसी (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) के मुख्यालय, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार से जुड़े सिस्टम शामिल हैं।</p>
<p></p>
<p>इस पूरे ऑपरेशन में अमेरिका ने हवा, जमीन और समुद्र तीनों मोर्चों पर अपनी ताकत का इस्तेमाल किया है। इसमें बी-1, बी-2 और बी-52 जैसे बमवर्षक विमान, एफ-22 और एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट, निगरानी विमान और ड्रोन शामिल हैं। समुद्र में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत, पनडुब्बियां और मिसाइल से लैस युद्धपोत तैनात किए गए हैं।</p>
<p></p>
<p>जमीन पर पैट्रियट और थाड जैसे मिसाइल रक्षा सिस्टम, रॉकेट आर्टिलरी और ड्रोन से निपटने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे साफ है कि यह अभियान कई स्तरों पर एक साथ चलाया जा रहा है।</p>
<p></p>
<p>एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों पर खास ध्यान इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया में तेल आपूर्ति का एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। अगर यहां कोई बाधा आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया के व्यापार और तेल बाजार पर पड़ सकता है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नाटो सहयोगियों पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप: ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में &amp;apos;अकेले&amp;apos; पड़ने पर जताई नाराजगी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/donald-trump-lashes-out-at-nato-allies-resentment-over-lonely-military-action-against-iran</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/donald-trump-lashes-out-at-nato-allies-resentment-over-lonely-military-action-against-iran</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो सहयोगियों की आलोचना की। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में समर्थन न मिलने पर नाराजगी जताई। जानें ईरान की सैन्य क्षमता और परमाणु खतरे पर ट्रंप का दावा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 23:44:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump NATO Criticism 2026, US Iran Military Action Update, Trump Michael Martin Meeting Oval Office</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन :</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में यूरोपीय सहयोगियों के समर्थन नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने नाटो की आलोचना करते हुए कहा कि सहयोगी देश कार्रवाई का समर्थन तो करते हैं, लेकिन योगदान देने से पीछे हट जाते हैं।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>ओवल ऑफिस में आयरलैंड के प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक कदम उठाया और उसे किसी बाहरी मदद की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा, “हमें ज्यादा मदद की जरूरत नहीं है, बल्कि किसी मदद की जरूरत ही नहीं है, लेकिन उन्हें हमारे साथ होना चाहिए था।”</p>
<p></p>
<p>ट्रंप ने कहा कि नाटो देशों ने सिद्धांत रूप में इस कार्रवाई का समर्थन किया, लेकिन व्यावहारिक रूप से कोई सहयोग नहीं दिया। उन्होंने इसे “मूर्खतापूर्ण” बताया।</p>
<p></p>
<p>ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसका रडार सिस्टम भी नष्ट हो गया है।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने यह भी दोहराया कि इस अभियान का मकसद ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। ट्रंप के मुताबिक, “ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बना सकता था और वह एक बड़ा खतरा था।”</p>
<p></p>
<p>इस बीच, रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा कि ट्रंप यूरोपीय देशों के रवैये से बेहद नाराज़ हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें कभी इतना गुस्से में नहीं देखा।” ग्राहम ने यूरोपीय सहयोगियों पर होरमुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में योगदान न देने का आरोप लगाया।</p>
<p></p>
<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी क्षेत्र में खतरे को रेखांकित करते हुए कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर मिलिशिया हमले हो रहे हैं और ऐसे समूहों को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है।</p>
<p></p>
<p>वहीं, आयरलैंड के प्रधानमंत्री मिशेल मार्टिन ने तनाव कम करने की कोशिश करते हुए अमेरिका और यूरोप के रिश्तों को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि “दोनों पक्षों के बीच संबंध बेहद अहम हैं और हमें फिर से संतुलन बनाना होगा।” मार्टिन ने ईरान को खतरा बताते हुए भी कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ओमिद नशा मुक्ति केंद्र पर हवाई हमला: मलबे में तब्दील हुआ 2000 बेड का अस्पताल, चश्मदीदों ने बताया मंजर</title>
<link>https://www.newstvindia.in/air-raid-on-omid-de-addiction-centre-2000-bed-hospital-transformed-into-rubble-eyewitnesses-say</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/air-raid-on-omid-de-addiction-centre-2000-bed-hospital-transformed-into-rubble-eyewitnesses-say</guid>
<description><![CDATA[ काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर हुए हमले में 400 लोगों की मौत। यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा देने की मांग की है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 23:42:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Kabul Hospital Attack 2026, UN Human Rights Volker Turk Kabul, Omid Addiction Treatment Hospital Attack, Afghanistan Pakistan Conflict Update, Pul-e-Charkhi Kabul Blast News</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जिनेवा : </strong>अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने मंगलवार को फिर से हिंसा समाप्त करने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की।</p>
<p></p>
<p>काबुल के एक नशा मुक्ति केंद्र में हुए हमले की जांच की, जिसमें कथित तौर पर सैकड़ों मरीजों की मौत हो गई, संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त ने जरूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने मंगलवार को कहा, “सोमवार की रात को काबुल के एक नशा मुक्ति केंद्र में दुखद विस्फोट हुआ, जिसमें कथित तौर पर कई मरीजों की मौत हुई। उसकी तुरंत, स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। जांच के परिणाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। पीड़ितों और उनके परिवारों को मुआवजा मिलने का अधिकार है।”</p>
<p></p>
<p>यह बयान उस समय आया है जब अफगान अधिकारियों ने दावा किया कि काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित दो हजार बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर पाकिस्तान के हवाई हमले में 400 से अधिक लोग मारे गए और 250 अन्य घायल हो गए।</p>
<p></p>
<p>कई प्रत्यक्षदर्शियों ने अस्पताल स्थल पर भारी तबाही का मंजर बताया, जहां सैकड़ों लोग अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे थे।</p>
<p></p>
<p>संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक संपत्तियों की सख्त सुरक्षा की जाती है। युद्ध के कानून स्पष्ट रूप से बताते हैं कि किसी भी हमले में भेदभाव, अनुपातिकता और सावधानियों के मूल सिद्धांतों का पालन होना चाहिए। चिकित्सा संस्थानों को विशेष और अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की जाती है।”</p>
<p></p>
<p>ताजा हमले से पहले भी, दोनों देशों के बीच पिछले महीने से बढ़े तनाव के दौरान सैकड़ों अफगान नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, मारे गए या घायल हुए हैं। लगातार हो रही लड़ाई के कारण हजारों लोग विस्थापित भी हुए हैं।</p>
<p></p>
<p>अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन काने ने मंगलवार को चेतावनी दी कि देश काबुल में पाकिस्तान की ओर से किए गए घातक हवाई हमलों का मुंहतोड़ जवाब देगा।</p>
<p></p>
<p>काने ने कहा कि बचाव कार्य जारी हैं और आपातकालीन टीमें मलबे के नीचे शवों की तलाश कर रही हैं, जैसा कि अफगानिस्तान स्थित एरियाना न्यूज ने रिपोर्ट किया।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान पाकिस्तान के इस ताजा हमले को एक बड़ी उकसावे वाली कार्रवाई मानता है और इसके उचित जवाब की चेतावनी दी।</p>
<p></p>
<p>काने ने कहा कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जा सकते और दोहराया कि काबुल की सरकार इस घटना को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानती है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>वैश्विक ऊर्जा संकट: पीएम स्टार्मर और डोनाल्ड ट्रंप की फोन पर बातचीत; होर्मुज स्ट्रेट खुलवाने के लिए बढ़ी हलचल</title>
<link>https://www.newstvindia.in/global-energy-crisis-pm-starmer-and-donald-trump-phone-conversations-movement-to-open-hormuz-strait</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/global-energy-crisis-pm-starmer-and-donald-trump-phone-conversations-movement-to-open-hormuz-strait</guid>
<description><![CDATA[ होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल। ब्रिटिश पीएम स्टार्मर और डोनाल्ड ट्रंप ने समुद्री मार्ग बहाल करने पर की चर्चा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 08:00:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Keir Starmer Donald Trump Hormuz Strait Call 2026, Global Energy Crisis Hormuz Blockade, Mojtaba Khamenei Iran Statements, Oil Gas Prices Spike Middle East War, UN Israel Attacks Iran Feb 28</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लंदन :</strong> ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात कर मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ रहे असर पर चर्चा की।</p>
<p>समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार रविवार शाम हुई इस बातचीत में स्टार्मर ने कहा कि इस अहम समुद्री मार्ग को जल्द से जल्द खोला जाना बहुत जरूरी है, ताकि जहाजों की आवाजाही सामान्य हो सके और दुनिया भर में बढ़ती लागत को कम किया जा सके। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के एक बयान में यह जानकारी दी गई।</p>
<p></p>
<p>दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि वे मध्य पूर्व में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार संपर्क में रहेंगे।</p>
<p></p>
<p>इससे पहले रविवार को ब्रिटेन के ऊर्जा सचिव एड मिलिबैंड ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का सबसे अच्छा और स्थायी तरीका यह है कि मौजूदा संघर्ष को समाप्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।</p>
<p></p>
<p>मिलिबैंड ने ब्रिटिश मीडिया से कहा कि तेल और गैस की कीमतों में जो तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, उसका मुख्य कारण होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर इस समुद्री मार्ग को फिर से खुलवाने की कोशिश करना चाहता है।</p>
<p></p>
<p>शनिवार को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि कई देश होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजेंगे, हालांकि उन्होंने इसके बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।</p>
<p></p>
<p>28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राष्ट्र ने मिलकर तेहरान और ईरान के अन्य शहरों पर हमला किया था। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और 1300 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई थी।</p>
<p></p>
<p>इसके जवाब में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से कई हमले किए, जिनका निशाना मध्य पूर्व में मौजूद इजरायल और अमेरिका के सैन्य ठिकाने और अन्य ठिकाने थे। अब ये हमले तीसरे सप्ताह में पहुंच चुके हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावी रूप से बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ता जा रहा है।</p>
<p></p>
<p>इस बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले संदेश में कहा है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना प्रभाव बनाए रखेगा।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश: &amp;quot;होर्मुज स्ट्रेट रहेगा बंद, अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहेंगे&amp;quot;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/first-message-from-mojtaba-khamenei-the-new-supreme-leader-of-iran-hormuz-strait-will-remain-closed-attacks-on-us-bases-will-continue</link>
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<description><![CDATA[ ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका को क्षेत्र से बाहर निकलने की चेतावनी दी। होर्मुज स्ट्रेट बंद रखने और शहीदों का बदला लेने का किया ऐलान। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Mar 2026 22:48:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Mojtaba Khamenei First Message 2026, Iran New Supreme Leader US Warning, Strait of Hormuz Closure News, Mojtaba Khamenei Health Update, Iran Yemen Iraq Alliance</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का पहला संदेश गुरुवार को सरकारी टेलीविजन पर पढ़कर सुनाया गया। इस संदेश में उनके तल्ख तेवर साफ दिखे। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि अमेरिकी हवाई अड्डों पर हमला ईरान नहीं बंद करेगा, वहीं पड़ोसी देशों के साथ मित्रता भी बनाए रखेगा। अपनी सेना की हिम्मत को सलाम करते हुए, उन्होंने ईरान से कहा कि देश शहीदों के खून का बदला जरूर लेगा।</p>
<p>अपनी सेना की हिम्मत की प्रशंसा करते हुए खामेनेई ने कहा, देश की मिलिट्री का शुक्रिया जिसने ईरान को बंटने से रोका और जंग जैसे हालात के बीच किसी को खुद पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “मैं उन बहादुर लड़ाकों को धन्यवाद देना चाहता हूं जो ऐसे समय में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं जब हमारा देश दबाव में है और उस पर हमला हो रहा है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि ईरान जवाबी हमला जारी रखेगा। मोजतबा ने पड़ोसी देशों से रिश्ता बेहतर करने पर भी बल दिया। कहा, हमें अपने पड़ोसियों से संबंध बेहतर करने होंगे।</p>
<p>नए ईरानी सुप्रीम लीडर ने दावा किया कि यमन और इराक के हथियारबंद लड़ाके भी उनकी मदद को तैयार हैं। खामेनेई ने कहा कि यमन भी हमारे साथ है और इराक में हथियारबंद ग्रुप भी इस्लामिक क्रांति में "मदद करने को तैयार हैं"।</p>
<p>पहले संदेश में मोजतबा खामेनेई ने देश से एकजुट होने की अपील करते हुए दावा किया कि ईरान के दुश्मनों पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज स्ट्रेट बंद रहेगा। ईरान पड़ोसियों से दोस्ती में विश्वास करता है और सिर्फ यूएस बेस को निशाने पर ले रहा है और ऐसा करना वो जारी रखेगा।</p>
<p>मित्र देशों को चेतावनी दी कि इलाके में सभी यूएस बेस तुरंत बंद कर दें, "नहीं तो उन पर हमला किया जाएगा।"</p>
<p>नियुक्ति की घोषणा के बाद से मुजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। साइप्रस में ईरान के राजदूत अलीरेजा सालारियन ने बुधवार को गार्जियन अखबार से कहा था कि खामेनेई उसी हवाई हमले में घायल हुए थे, जिसमें उनके पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>दक्षिण कोरिया की प्रति व्यक्ति आय में मामूली बढ़त; $36,855 के साथ वैश्विक स्तर पर छठे स्थान पर</title>
<link>https://www.newstvindia.in/minor-increase-in-south-korea-s-per-capita-income-ranked-sixth-globally-with-36-855</link>
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<description><![CDATA[ बैंक ऑफ कोरिया के अनुसार 2025 में दक्षिण कोरिया की प्रति व्यक्ति GNI 0.3% बढ़ी। ताइवान और जापान से पिछड़ा कोरिया। 2027 तक $40,000 का लक्ष्य। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 09:57:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>South Korea Per Capita GNI 2025, Bank of Korea Income Data, Korean Won Depreciation 2026, Taiwan vs South Korea GNI, South Korea Economy $40, 000 Goal</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>सियोल :</strong> केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया की प्रति व्यक्ति आय 2025 में 0.3 प्रतिशत बढ़कर 36,000 डॉलर के स्तर पर पहुंच गई क्योंकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कोरियाई वॉन के मूल्यह्रास ने वास्तविक मजबूत आय वृद्धि को संतुलित कर दिया।</p>
<p>केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ कोरिया के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया की नाममात्र प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय पिछले वर्ष 36,855 डॉलर रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.3 प्रतिशत वृद्धि है।</p>
<p>योनहेप न्यूज एजेंसी के मुताबिक कोरियाई वॉन जीएनआई 2025 में पिछले वर्ष की तुलना में 4.6 प्रतिशत बढ़कर 52.42 मिलियन वॉन हो गई।</p>
<p>यह आंकड़ा पहली बार 2014 में 30,000 डॉलर पार कर गया था। इसके बाद यह लगातार बढ़ता रहा और 2021 में लगभग 38,000 डॉलर तक पहुँच गया।</p>
<p>2022 में यह घटकर 35,000 डॉलर के स्तर पर आ गया लेकिन 2023 में फिर 36,195 डॉलर तक उभर गया। 2024 में वृद्धि धीमी होकर 1.5 प्रतिशत और 2025 में केवल 0.3 प्रतिशत रही, जिससे यह लगातार तीसरे वर्ष 36,000 डॉलरके स्तर पर बनी रही।</p>
<p>नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (डीजीपी) 2025 में 4.2 प्रतिशत बढ़कर 2,663.3 ट्रिलियन वॉन तक पहुँच गया, लेकिन डॉलर के हिसाब से यह कमजोर वॉन के कारण 0.1 प्रतिशत गिरकर 1.87 ट्रिलियन डॉलर रह गया।</p>
<p>केंद्रीय बैंक के अनुसार, पिछले वर्ष डॉलर के मुकाबले कोरियाई वॉन का मूल्य 4.3 प्रतिशत गिरा, जिसका कारण विदेशी मुद्रा की आपूर्ति और मांग में असंतुलन और स्थानीय निवेशकों द्वारा भारी विदेशी प्रतिभूति निवेश जैसे कई कारक थे।</p>
<p>बैंक ऑफ कोरिया के राष्ट्रीय आय विभाग के प्रमुख किम ह्वा यंग ने कहा, “ताइवान की प्रति व्यक्ति जीएनआई 2025 में 40,585 डॉलर रही, क्योंकि सेमीकंडक्टर उद्योग से उन्हें बड़ा लाभ मिला।”</p>
<p>“जापान की प्रति व्यक्ति जीएनआई भी दिसंबर 2025 में बेस-ईयर संशोधन के बाद 38,000 डॉर के स्तर तक बढ़ गई।” 50 मिलियन या उससे अधिक जनसंख्या वाले देशों में दक्षिण कोरिया अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली के बाद छठे स्थान पर है।</p>
<p>अधिकारी ने कहा, “अगर वॉन-डॉलर विनिमय दर पर कोई नया असर नहीं पड़ता है, तो हमारी प्रति व्यक्ति जीएनआई 2027 तक 40,000 डॉलर पार कर सकती है।”</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>संयुक्त राष्ट्र में भारत का कड़ा रुख: अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा; &amp;apos;दोहरे मापदंड&amp;apos; को किया बेनकाब</title>
<link>https://www.newstvindia.in/india-s-strong-stance-at-the-un-condemns-pakistan-s-airstrikes-on-afghanistan-exposes-double-standards</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/india-s-strong-stance-at-the-un-condemns-pakistan-s-airstrikes-on-afghanistan-exposes-double-standards</guid>
<description><![CDATA[ भारत ने यूएन में अफगानिस्तान पर पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक को बताया अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन। रमजान के महीने में महिलाओं और बच्चों की मौत पर पाकिस्तान को घेरा। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 09:54:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>India UN Statement Pakistan Air Strike Afghanistan, P Harish UNSC Speech 2026, TRF Pahalgam Attack 2025, Afghan Pakistan Border Tension, Human Rights Violation Ramadan Strikes</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संयुक्त राष्ट्र : </strong>पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव जारी है। इस बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। यूएन में भारत ने कहा कि यह हमला रमजान के महीने में किया गया, जिसमें ज्यादातर औरतें और बच्चे मारे गए। यह हमला ऐसे समय में किया गया जब इस्लामिक एकता, यानी कि रमजान का महीना चल रहा है।</p>
<p>भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा, “एक तरफ अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामिक एकता के ऊंचे सिद्धांतों की बात करना और दूसरी तरफ रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से एयर स्ट्राइक करना दोहरे मापदंड को दिखाता है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि इन हमलों में "6 मार्च 2026 तक 185 बेगुनाह आम लोग मारे गए हैं, जिनमें से लगभग 55 फीसदी महिलाएं और बच्चे हैं।" उन्होंने कहा, “भारत अफगान इलाके पर एयरस्ट्राइक की कड़ी निंदा करता है, जो इंटरनेशनल कानून और यूएन चार्टर और देश की संप्रभुता के सिद्धांत का खुला उल्लंघन है।”</p>
<p>इस दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, लेकिन डिप्लोमैटिक तरीके से कही गई बातें साफ थीं कि वे किसके खिलाफ थीं। पाकिस्तान ने दावा किया है कि वह अफगानिस्तान पर हमला इसलिए कर रहा है क्योंकि वह अपने इलाके से आतंकवादियों को काम करने दे रहा था।</p>
<p>हालांकि, हरीश ने बताया कि पाकिस्तान ही पड़ोसियों पर हमला करने के लिए आतंकवादी समूहों का इस्तेमाल प्रॉक्सी के तौर पर कर रहा है। उन्होंने कहा, "आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए संकट बनी हुई है जो इंसानियत को परेशान कर रही है, और सिर्फ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मिलकर की गई कोशिशों से ही यह सुनिश्चित होगा कि इस्लामिक स्टेट आईएसआईएल और अलकायदा और उनके साथी, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद और एलईटी के प्रॉक्सी जैसे द रेजिस्टेंस फ्रंट शामिल हैं और जो लोग उनके ऑपरेशन में मदद करते हैं, वे अब क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म में शामिल न हों।"</p>
<p>बता दें, इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लेवेंट (आईएसआईएल) एक चरमपंथी आतंकवादी समूह है जो मध्य पूर्व के बड़े क्षेत्र सीरिया, लेबनान, जॉर्डन और इजरायल-फिलिस्तीन में काफी सक्रिय है।</p>
<p>द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में धर्म से प्रेरित आतंकवादी हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए। अफगानिस्तान के लिए यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के उप-विशेष प्रतिनिधि, जॉर्जेट गैग्नन ने कहा, “पाकिस्तान के साथ लड़ाई की इंसानी और आर्थिक कीमत बहुत ज्यादा चुकानी पड़ी है।”</p>
<p>उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ अपनी सीमा बंद कर दी है, इसलिए व्यापार का एकमात्र रास्ता ईरान से होकर जाता है, जो युद्ध की वजह से रुक गया है। इस वजह से जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ने लगी हैं, जिससे “अफगानिस्तान की पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।"</p>
<p>उन्होंने कहा, “इस इलाके में, अफगानिस्तान के दोनों सबसे लंबे बॉर्डर पर अस्थिरता अफगानिस्तान की स्थिरता को कमजोर कर रही है।”</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ऑपरेशन एपिक फ्यूरी: अमेरिका का ईरान पर भीषण हमला; 10 दिनों में 5,000 सैन्य ठिकाने तबाह</title>
<link>https://www.newstvindia.in/operation-epic-fury-us-fierce-attack-on-iran-5-000-military-bases-destroyed-in-10-days</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/operation-epic-fury-us-fierce-attack-on-iran-5-000-military-bases-destroyed-in-10-days</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी सेंटकॉम का बड़ा खुलासा: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों, IRGC मुख्यालय और मिसाइल साइटों पर भीषण बमबारी। B-2 स्टेल्थ और F-35 जेट्स मिशन में शामिल। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 09:19:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Operation Epic Fury US Iran War 2026, US Centcom Iran Strikes Data, B-2 Stealth Bomber Iran Mission, THAAD Missile Defense US Iran, IRGC Headquarters Attack</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन : </strong>अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच बड़ा खुलासा हुआ है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, अमेरिका ने युद्ध के पहले 10 दिनों में ईरान के 5,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है। यह हमला ईरान की सुरक्षा व्यवस्था और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे बड़े सैन्य अभियान का हिस्सा है।</p>
<p>अमेरिकी सेना के अनुसार, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम का यह सैन्य अभियान 28 फरवरी को सुबह 1:15 बजे शुरू किया गया था। इस अभियान में अमेरिका की वायु सेना, नौसेना और मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।</p>
<p>सेंटकॉम ने बताया कि यह अभियान अमेरिका के राष्ट्रपति के निर्देश पर शुरू किया गया। इसमें उन सभी ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है जो ईरान के सुरक्षा तंत्र से जुड़े हैं या जिनसे तत्काल खतरा पैदा होने की आशंका है।</p>
<p>सैन्य ऑपरेशन की जानकारी के मुताबिक, अब तक ईरान के 5,000 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। वहीं, युद्ध के पहले दस दिनों में ईरान के करीब 50 नौसैनिक जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या नष्ट कर दिया गया है।</p>
<p>इस बड़े अभियान में अमेरिका के कई अत्याधुनिक हथियार और विमान शामिल हैं। लंबी दूरी तक मार करने वाले बी-1, बी-2 स्टेल्थ और बी-52 बमवर्षक विमान लगातार हमले कर रहे हैं। इसके साथ एफ-15, एफ-16, एफ-18, एफ-22 स्टेल्थ फाइटर और एफ-35 स्टेल्थ फाइटर जेट भी मिशन में तैनात हैं।</p>
<p>इसके अलावा, ए-10 अटैक एयरक्राफ्ट और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए इस्तेमाल होने वाला ईए-18जी इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट भी इस अभियान का हिस्सा हैं।</p>
<p>अमेरिका के कई खुफिया और निगरानी विमान भी इस ऑपरेशन को समर्थन दे रहे हैं। इनमें यू-2 ड्रैगन लेडी, आरसी-135 रिकॉनिसेंस विमान और पी-8 मैरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट शामिल हैं। ये विमान ईरान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखते हुए संभावित लक्ष्यों की जानकारी दे रहे हैं।</p>
<p>ड्रोन भी इस अभियान में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एलयूसीएएस (कम लागत वाली मानवरहित लड़ाकू हमला प्रणाली) ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी और हमले दोनों के लिए कर रहा है।</p>
<p>अमेरिकी सेना ने अपने ठिकानों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम और टीएचएएडी (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम भी तैनात किए हैं।</p>
<p>नौसैनिक ताकत भी इस ऑपरेशन का अहम हिस्सा है। न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर समुद्र से इस अभियान को समर्थन दे रहे हैं, जबकि ईंधन और रसद पहुंचाने वाले जहाज लंबी दूरी के अभियानों को जारी रखने में मदद कर रहे हैं।</p>
<p>लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130 कार्गो विमान लगातार हथियार, उपकरण और जरूरी सामान पहुंचा रहे हैं, जिससे यह बड़ा सैन्य अभियान जारी रह सके।</p>
<p>सेंटकॉम के मुताबिक जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया है उनमें कमांड और कंट्रोल सेंटर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के मुख्यालय, खुफिया ठिकाने और इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।</p>
<p>इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइल साइट, एंटी-शिप मिसाइल लोकेशन, ईरानी नौसेना के जहाज और पनडुब्बियां, सैन्य संचार नेटवर्क तथा बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन निर्माण से जुड़े ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं।</p>
<p>अमेरिकी सेना ने यह भी बताया कि इस अभियान में काउंटर-ड्रोन सिस्टम, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट, कम्युनिकेशन रिले प्लेटफॉर्म और काउंटर रॉकेट, आर्टिलरी और मोर्टार डिफेंस सिस्टम भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जो इस ऑपरेशन के बड़े पैमाने को दर्शाते हैं।</p>
<p>सेंटकॉम के ऑपरेशनल सार में यह भी कहा गया है कि मिशन में कुछ ऐसी विशेष क्षमताएं भी इस्तेमाल की जा रही हैं जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ गुप्त तकनीकों और सिस्टम का भी उपयोग किया जा रहा है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका में ईंधन संकट: ट्रंप की ईरान नीति पर डेमोक्रेट्स का हमला; तेल की कीमतें $120 के करीब</title>
<link>https://www.newstvindia.in/fuel-crisis-in-the-us-democrats-attack-trump-s-iran-policy-oil-prices-closer-to-120</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/fuel-crisis-in-the-us-democrats-attack-trump-s-iran-policy-oil-prices-closer-to-120</guid>
<description><![CDATA[ ईरान युद्ध के बीच अमेरिका में कच्चा तेल $120 प्रति बैरल पहुंचा। राजा कृष्णमूर्ति और चक शूमर ने ट्रंप प्रशासन से रणनीतिक तेल भंडार जारी करने की मांग की। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Mar 2026 08:00:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US Gas Prices Hike 2026, Trump Iran Conflict Oil Market, Raja Krishnamoorthi Statement Fuel Price, US Strategic Petroleum Reserve Release, Strait of Hormuz Oil Supply Disruption</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन : </strong>अमेरिका में गैसोलीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच वहां के डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ चल रही जंग की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने व्हाइट हाउस से मांग की है कि आम लोगों को राहत देने के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी किया जाए।</p>
<p>मध्य पूर्व में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें चार साल में पहली बार 100 डॉलर से ऊपर पहुंच गई हैं। एक बैरल कच्चे तेल की कीमत लगभग 120 डॉलर के करीब पहुंच गई है। इसकी वजह से पूरे अमेरिका में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।</p>
<p>इंडियन अमेरिकन कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि बढ़ती कीमतें सीधे उन परिवारों पर असर डाल रही हैं जो पहले से ही रहने-खाने के खर्चों से जूझ रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान के साथ जंग के कारण इलिनोइस में पिछले एक महीने में ईंधन की औसत कीमत लगभग 50 सेंट प्रति गैलन बढ़ गई है। ट्रंप भले ही इसे “बहुत छोटी कीमत” बता रहे हों, लेकिन जिन परिवारों को अपने वाहनों में पेट्रोल भरवाना पड़ता है, उनके लिए यह बड़ी समस्या बन गई है।</p>
<p>कृष्णमूर्ति ने यह भी कहा कि अब साफ हो गया है कि राष्ट्रपति ने बिना किसी ठोस रणनीति और बिना जंग खत्म करने की योजना के यह संघर्ष शुरू किया है। साथ ही उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि इसका असर मेहनत करने वाले अमेरिकी नागरिकों पर क्या पड़ेगा।</p>
<p>उन्होंने सरकार से तुरंत रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि जब यूक्रेन में युद्ध शुरू हुआ था, तब भी इसी भंडार से तेल जारी किया गया था, इसलिए इस बार ऐसा न करना समझ से परे है।</p>
<p></p>
<p>मिशिगन की कांग्रेस सदस्य हेली स्टीवंस ने भी एडमिनिस्ट्रेशन की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी परिवार इस लड़ाई के फाइनेंशियल नतीजे भुगत रहे हैं।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों की वजह से अमेरिकी परिवारों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। कभी अस्थिर व्यापार शुल्क और अब ईरान के साथ युद्ध, इन सबकी वजह से दुनिया में अस्थिरता बढ़ रही है और अमेरिका में लोगों का जीवन और महंगा होता जा रहा है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>स्टीवंस ने कहा कि अमेरिका इस युद्ध पर हर दिन लगभग एक बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है। इसके साथ ही तेल और गैस की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि प्रशासन ने ईरान की संभावित प्रतिक्रिया का सही अंदाजा नहीं लगाया।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>सीनेट डेमोक्रेटिक लीडर चक शूमर ने भी एडमिनिस्ट्रेशन से रिजर्व से तेल छोड़ने की अपील की, और चेतावनी दी कि ईरान के साथ लड़ाई की वजह से पूरे देश में एनर्जी की लागत पहले से ही तेज़ी से बढ़ रही है। शूमर ने कहा कि रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार ऐसे ही आपात समय के लिए बनाया गया है। जब युद्ध या वैश्विक संकट के कारण ऊर्जा बाजार प्रभावित होते हैं, तब अमेरिका के पास दखल देने की क्षमता होती है। लेकिन ट्रंप प्रशासन ऐसा करने से इनकार कर रहा है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>ईरान के साथ संघर्ष 28 फरवरी से शुरू हुआ था। तब से अब तक ईंधन कीमत लगभग 43 सेंट प्रति गैलन बढ़कर करीब 3.41 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। सिर्फ एक हफ्ते में कीमतों में करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टैंकर ट्रैफिक में रुकावटों ने दुनिया भर में तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा काट दिया है, जिससे एनर्जी मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है और फ्यूल की कीमतें बढ़ गई हैं। शूमर ने कहा कि सरकार को तुरंत कदम उठाना चाहिए। उनके मुताबिक ट्रंप को अभी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से तेल जारी करना चाहिए, ताकि बाजार स्थिर हो सके, कीमतें कम हों और अमेरिकी परिवारों पर पड़ रहा आर्थिक बोझ कम किया जा सके।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>सीनेट डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन ने भी लड़ाई से निपटने के एडमिनिस्ट्रेशन के तरीके की आलोचना की।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>डर्बिन ने कहा, "प्रेसिडेंट ट्रंप ने खुद को 'पीस प्रेसिडेंट' के तौर पर दिखाने की कोशिश की है, लेकिन उनके काम कुछ और ही कहानी बताते हैं। ईरान के साथ संघर्ष में उलझकर उन्होंने ईंधन की कीमतें बढ़ा दी हैं, अमेरिकियों की जानें गई हैं, और ट्रंप ने एक मुश्किल इलाके में रिस्क और अनिश्चितता पैदा कर दी है। मुझे चिंता है कि यह सब बिना किसी साफ स्ट्रेटेजी या एंड गेम के हो रहा है।”</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>डर्बिन ने चेतावनी दी कि युद्धों की भारी इंसानी और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ती है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>इसी बीच, डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने भी एडमिनिस्ट्रेशन की आलोचना करते हुए कहा कि फ्यूल की बढ़ती कीमतें अमेरिकी परिवारों के सामने सबसे नया आर्थिक बोझ हैं।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>समिति की प्रवक्ता केंडल विटमर ने कहा कि ट्रंप आम अमेरिकी नागरिकों की रोजमर्रा की परेशानियों से कटे हुए नजर आते हैं। कामकाजी परिवार अपने बैंक खातों की आखिरी बचत तक खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं, ताकि पेट्रोल, खाने-पीने का सामान और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>इजरायल की ईरान को आख़िरी चेतावनी: &amp;quot;खामेनेई का वारिस जो भी बनेगा, मारा जाएगा&amp;quot;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/israel-s-last-warning-to-iran-whoever-becomes-khamenei-s-heir-will-be-killed</link>
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<description><![CDATA[ इजरायली सेना ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के उत्तराधिकारियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। मध्य पूर्व में तनाव और मिसाइल हमले तेज। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 17:26:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Israel Iran War 2026, Ayatollah Khamenei Successor, Israel Warning Iran, Tehran Missile Attack, Middle East Conflict Update</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : </strong>मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच इजरायली सेना ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। इजरायली सैन्य बलों ने चेतावनी दी है कि वह ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के किसी भी उत्तराधिकारी का पीछा करना जारी रखेगा।</p>
<p></p>
<p>इजरायली सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर फारसी भाषा में पोस्ट करते हुए यह चेतावनी जारी की। पोस्ट में कहा गया कि इजरायल उन सभी लोगों को भी निशाना बनाएगा जो खामेनेई के उत्तराधिकारी को चुनने या नियुक्त करने की प्रक्रिया में शामिल होंगे।</p>
<p></p>
<p>इजरायली सेना ने खामेनेई को निष्क्रिय किए जाने के बाद ईरान का शासन खुद को फिर से संगठित करने और नया नेता चुनने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इजरायल का हाथ हर उत्तराधिकारी और हर उस व्यक्ति तक पहुंचेगा जो नए नेता की नियुक्ति की कोशिश करेगा।</p>
<p></p>
<p>इजरायल ने यह चेतावनी भी दी कि जो लोग उत्तराधिकारी चुनने की बैठक में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। बयान में कहा गया कि हम उन सभी को चेतावनी देते हैं जो उत्तराधिकारी चयन की बैठक में भाग लेने का इरादा रखते हैं । इन सभी लोगों को निशाना बनाने से इजरायल पीछे नहीं हटेगा।</p>
<p></p>
<p>यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नामक संस्था जल्द ही कोम शहर में बैठक करने वाली है। यही संस्था ईरान के सर्वोच्च नेता का चुनाव करने के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। बताया जा रहा है कि यह संस्था लंबे समय से नहीं मिली थी लेकिन अब नए नेता के चयन को लेकर बैठक बुलाने की तैयारी है।</p>
<p></p>
<p>इस बीच, ईरान के तेल भंडारण ठिकानों पर किए गए हमलों में चार टैंकर चालकों की मौत हो गई है। यह जानकारी ईरान की समाचार एजेंसी फार्स ने दी है। रिपोर्ट के अनुसार इजरायल के हमलों में तेहरान और अलबोर्ज प्रांत में स्थित चार तेल भंडारण सुविधाओं व एक तेल ट्रांसफर केंद्र को निशाना बनाया गया।</p>
<p></p>
<p>फार्स न्यूज एजेंसी ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि पहले मिसाइल हमले के बाद बचावकर्मी और स्थानीय लोग घायलों की मदद कर रहे थे। इसी दौरान कुछ मिनट बाद उसी स्थान पर दूसरी मिसाइल आ गिरी, जिससे और अधिक लोग इसकी चपेट में आ गए।</p>
<p></p>
<p>वहीं, इजरायल में भी युद्ध का असर दिखाई दे रहा है। इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 1,929 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से पिछले 24 घंटों में 157 लोग अस्पताल पहुंचे हैं। इन घायलों में नौ लोगों की हालत गंभीर, 42 की हालत मध्यम और 70 लोग मामूली रूप से घायल हैं।</p>
<p></p>
<p>इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और गहरा कर दिया है। इजरायली सेना की ताजा चेतावनी और मिसाइल हमलों की घटनाओं ने इस संकट को और गंभीर बना दिया है। इसके चलते मध्य-पूर्व की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेपाल चुनाव 2026: &amp;apos;बालेन शाह&amp;apos; की आंधी में उड़े केपी ओली, &amp;apos;प्रचंड&amp;apos; ने बचाई साख; क्या &amp;apos;जेन&#45;जी&amp;apos; बदलेगी नेपाल की किस्मत?</title>
<link>https://www.newstvindia.in/nepal-election-2026-kp-oli-prachanda-save-credentials-in-balen-shah-storm-will-gen-g-change-nepal-s-fate</link>
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<description><![CDATA[ नेपाल आम चुनाव 2026 में बड़ा उलटफेर। बालेन शाह ने केपी ओली को पछाड़ा। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) बनी सबसे बड़ी ताकत। जानें ताजा चुनावी आंकड़े। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 12:45:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Nepal Election Results 2026, Balen Shah vs KP Oli, Prachanda Won Rukum East, Rastriya Swatantra Party Nepal, Gagan Thapa Nepal Election, Gen-Z Nepal Protest</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> नेपाल में 5 मार्च को हुए आम चुनाव के बाद वोटों की गिनती अब भी जारी है। शुरुआती रुझानों के हिसाब से नेपाल में इस बार जेन-जी बनने जा रही है। अब तक हुई वोटों की गिनती में, पीएम पद के उम्मीदवार बालेंद्र शाह उर्फ बालेन शाह केपी ओली को हराकर भारी बढ़त के साथ आगे बढ़ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ नेपाल के पूर्व पीएम पुष्प कमल प्रचंड दहन ने रुकुम ईस्ट-1 सीट से जीत दर्ज कर ली है।</p>
<p>नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के नेता प्रचंड को 10,240 वोट मिले और 6,778 वोटों से उन्होंने जीत हासिल की है। वहीं झापा-5 में बालेंद्र शाह की अगर बात करें, तो अब तक उन्हें 34,863 वोट मिले हैं और 25,795 वोटों से वह आगे बढ़ रहे हैं। वहीं नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली 25,795 वोटों से पीछे चल रहे हैं।</p>
<p>शुरुआती रुझान के हिसाब से नेपाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव होता हुआ नजर आ रहा है। सितंबर 2025 में नेपाल में हिंसक जेन-जी विरोध प्रदर्शन हुए और केपी ओली की सरकार को सत्ता से हटा दिया गया। इसके बाद पहली बार वहां चुनाव हुआ। शुरुआती रुझान में पुराने राजनीतिक दलों को मात देते हुए तीन साल पुरानी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) आगे निकल रही है।</p>
<p>शुक्रवार को जब 5 मार्च को हुए चुनावों के वोटों की गिनती हो रही थी, तो भंग हुई पार्लियामेंट की सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के प्रेसिडेंट गगन थापा, सरलाही-4 में आरएसपी के अमरेश कुमार सिंह से काफी पीछे चल रहे थे।</p>
<p>नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के सहयोजक प्रचंड पुरानी 'बिग थ्री' के शीर्ष नेताओं में से अकेले ऐसे उम्मीदवार हैं, जो इस बार रुकुम ईस्ट-1 से जीते। नेपाली मीडिया की ओर से जारी आंकड़ों के हिसाब से आरएसपी पूरे देश में भारी वोटों से आगे चल रही है। आंकड़ों को लेकर वित्त मंत्री रमेशोर खनल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लिखा, "अब तक गिने गए वोटों के आधार पर, ऐसा लगता है कि यह दावा कि यह संविधान बहुमत वाली स्थिर सरकार नहीं दे सकता, एक बार फिर गलत साबित होगा।"</p>
<p>जानकारों का मानना ​​है कि बालेन शाह फैक्टर की प्रतिष्ठा भ्रष्टाचार-मुक्त काठमांडू मेयर के रूप में है। बालेन शाह के अलावा आरएसपी पर लोगों के अभूतपूर्व भरोसे के कुछ और कारण भी हैं।</p>
<p>आरएसपी के प्रवक्ता मनीष झा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हमारा मकसद देश में अच्छे बदलाव लाना है और इसके लिए हमें अभी भी कड़ी मेहनत करनी है। हमें नेता के तौर पर नहीं, बल्कि मददगार के तौर पर काम करना चाहिए। लोगों ने हमें बड़ी उम्मीदों के साथ जनादेश और जिम्मेदारी सौंपी है।"</p>
<p>आरएसपी प्रवक्ता झा ने कहा, "हमारे असली दुश्मन देश में भ्रष्टाचार, गरीबी और खराब शासन हैं। उम्मीदवार और राजनीतिक दल डेमोक्रेटिक प्रक्रिया में सिर्फ कॉम्पिटिटर हैं और सभी के अस्तित्व का सम्मान करते हुए, हमें संयमित, उदार और जिम्मेदार रहना चाहिए। यह सभी से एक अनुरोध है।"</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>सात समंदर पार होली की धूम! ऑस्ट्रेलियाई पीएम अल्बनीज बोले&#45; &amp;quot;होली अब हमारी साझा पहचान है&amp;quot;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/holi-dhoom-across-the-seven-seas-holi-is-our-shared-identity-now-says-australian-pm-albanese</link>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने होली पर ऑस्ट्रेलिया के भारतीय समुदाय को दी बधाई। विविधता के सम्मान और दोस्ती के महत्व पर दिया जोर। पीएम मोदी ने भी दी शुभकामनाएं। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 12:31:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Anthony Albanese Holi Wishes 2026, Australia PM Holi Message, PM Modi Holi Greetings 2026, Indian Diaspora Australia Holi, Unity in Diversity Australia</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>कैनबरा :</strong> ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने बुधवार को होली के मौके पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह त्योहार अच्छाई की बुराई पर जीत, दोस्ती और माफी के महत्व तथा इंसानियत की एकता का संदेश देता है।</p>
<p></p>
<p>अपने संदेश में उन्होंने कहा कि हिंदू और दक्षिण एशियाई मूल के कई ऑस्ट्रेलियाई लोगों के लिए होली एक ऐसा समय है जब लोग अपनी साझा परंपराओं, इतिहास और संस्कृति को मिलकर मनाते हैं। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है। साथ ही यह दोस्ती, आपसी माफी और इंसानों के बीच एकता की भावना को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि होली हमें खुद को और एक-दूसरे के साथ अपने रिश्तों को नया करने का मौका देती है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>अल्बनीज ने यह भी कहा कि रंगों से भरा यह त्योहार अब पूरे ऑस्ट्रेलिया में बहुत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। उनके अनुसार यह देखना बहुत अच्छा है कि होली आज के आधुनिक ऑस्ट्रेलिया की कहानी का भी हिस्सा बन चुकी है। रंग, प्यार और नई शुरुआत का संदेश देने वाला यह त्योहार अब अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हो गया है और देश के त्योहारों में खास जगह बना चुका है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि होली जैसे त्योहार हमें याद दिलाते हैं कि सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को दुनिया भर के लोगों के विश्वासों, रीति-रिवाजों और अनुभवों के साथ-साथ देश के प्रति उनकी उम्मीदों, कड़ी मेहनत और गहरे कमिटमेंट से फायदा होता है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>अल्बनीज ने आगे कहा, “हम एक-दूसरे के मतभेदों का सम्मान करते हैं, और ऑस्ट्रेलियाई के तौर पर अपनी साझा पहचान में एक साथ आते हैं। उम्मीद है कि इस साल का होली का जश्न दोस्ती को बढ़ावा देगा और कम्युनिटी बनाएगा ताकि गुलाल के चले जाने के लंबे समय बाद भी, हमें जोड़ने वाली सभी चीजों की मजबूती बनी रहे।”</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह रंगों और खुशियों का त्योहार सभी के जीवन में आनंद लेकर आए और हर किसी का जीवन सुख, समृद्धि और सफलता के रंगों से भर जाए।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश साझा करते हुए सभी नागरिकों को होली की बधाई दी। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "होली का त्योहार पूरे माहौल में नई ऊर्जा भर देता है। यही इस उत्सव की बड़ी विशेषता है। हर तरफ जिस प्रकार खुशियों के रंग बिखरे नजर आते हैं, वो हर किसी को उल्लास और आनंद से सराबोर कर जाता है।"</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अमेरिका में &amp;apos;नफरत&amp;apos; की बलि चढ़ी भारतीय बेटी; सविता शान की हत्या के पीछे निकला आतंकी कनेक्शन</title>
<link>https://www.newstvindia.in/indian-daughter-sacrificed-to-hate-in-us-terrorist-connection-behind-savita-shaan-s-murder</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/indian-daughter-sacrificed-to-hate-in-us-terrorist-connection-behind-savita-shaan-s-murder</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिका के टेक्सास में ईरानी समर्थक हमलावर ने भारतीय मूल की छात्रा सविता शान की हत्या कर दी। एफबीआई ने आतंकवाद की जांच शुरू की। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 09:31:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Savita Shan Texas Shooting, Indian Student Killed Austin, Nadiaga Diagne Texas, Iran Bombing Retaliation US, FBI Terror Alert Austin</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>न्यूयॉर्क : </strong>अमेरिका के टेक्सास में युद्ध की प्रतिक्रिया में ईरान का प्रतीक चिह्न पहने एक व्यक्ति ने गोलीबारी करते हुए भारतीय मूल की छात्रा को एक अन्य छात्र के साथ मार डाला।</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों ने ऑस्टिन में रविवार तड़के हुई गोलीबारी में मारे गए दो लोगों में से एक के रूप में सविता शान की पहचान की। इस गोलीबारी में 14 अन्य लोग घायल भी हुए थे।</p>
<p>अधिकारियों ने बताया कि हमलावर सेनेगल का एक अप्रवासी था, जिसने ईरानी झंडे वाली टी-शर्ट और "अल्लाह की संपत्ति" लिखी हुई शर्ट पहन रखी थी।</p>
<p>संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) के कार्यवाहक विशेष एजेंट एलेक्स डोरान ने कहा कि 53 वर्षीय हमलावर नडियागा डियाग्ने के "आतंकवाद से संबंध" होने के संकेत मिले हैं, जिसकी जांच जारी है।</p>
<p>अमेरिका और इजरायल द्वारा शनिवार को ईरान पर बमबारी शुरू करने के बाद आतंकवाद के डर से पूरे अमेरिका में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को हाईअलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p>एफबीआई निदेशक काश पटेल ने सोशल साइट एक्स पर लिखा कि उन्होंने आतंकवाद रोधी और खुफिया टीमों को हाईअलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है"।</p>
<p>टेक्सास विश्वविद्यालय के अध्यक्ष जिम डेविस ने कैंपस के छात्रों को एक ईमेल में शान की मौत की पुष्टि करते हुए कहा कि वह एक ऐसी छात्रा थीं जो "दुनिया को बदलने की तैयारी कर रही थीं"।</p>
<p>उन्होंने उसे “प्यार करने वाले माता-पिता की बेटी” और “कई लोगों की वफादार दोस्त” बताया। उन्होंने कहा, “हम सभी इस भयानक खबर से दुखी हैं और हम उसे हमेशा याद रखेंगे।”</p>
<p>टेक्सास विश्वविद्यालय के रेडियो स्टेशन ने बताया कि एक दोस्त के अनुसार वह 21 साल की थी और ऑस्टिन में पली-बढ़ी थी।</p>
<p>लिंक्डइन पर शान ने पोस्ट किया था कि वह ऑस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और प्रबंधन सूचना प्रणाली में दोहरी स्नातक की डिग्री हासिल कर रही है और इस साल स्नातक होने की उम्मीद है।</p>
<p>उसने लिखा था कि वह ऑस्टिन तमिल संगम में स्वयंसेवक थी। उसने स्टिकर बेचने वाला एक ई-कॉमर्स व्यवसाय, सनफ्लेक स्टिकर्स भी शुरू किया था। उसने प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स और ऑफिस सप्लाई के बड़े रिटेलर स्टेपल्स में इंटर्नशिप की थी।</p>
<p>गोलीबारी के बारे में बताते हुए ऑस्टिन पुलिस प्रमुख लिसा डेविस ने कहा कि रविवार तड़के डायग्ने ने अपनी कार एक बीयर गार्डन के बाहर खड़ी की और उसके आंगन में बैठे लोगों पर पिस्टल से गोली चलाई। वह कार से बाहर निकला और राहगीरों पर राइफल से फायरिंग करने लगा, जिसके बाद पुलिस ने उसे मार गिराया।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान पर हमले के बाद एक्शन में UN; गुटेरेस ने कतर और ओमान के साथ शुरू की &amp;apos;शांति वार्ता&amp;apos;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/un-in-action-after-attack-on-iran-guterres-launches-peace-talks-with-qatar-and-oman</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/un-in-action-after-attack-on-iran-guterres-launches-peace-talks-with-qatar-and-oman</guid>
<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच कतर और ओमान से बात की। वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर जताई चिंता। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 09:27:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Antonio Guterres UN Iran War, Gulf Leaders Meeting UN, Oil Price Hike Strait of Hormuz, Oman Mediation US Iran, Global Economy Impact War 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संयुक्त राष्ट्र :</strong> संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने खाड़ी क्षेत्र के कई नेताओं से बातचीत की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सोमवार को कहा कि क्षेत्र में हो रही सैन्य गतिविधियों का पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात का सबसे ज्यादा असर हमेशा कमजोर और गरीब देशों पर पड़ता है।</p>
<p></p>
<p>खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है। सोमवार को तेल की कीमतों में 5.63 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगर होर्मुज की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही बंद होती है, तो ऊर्जा की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।</p>
<p></p>
<p>प्रवक्ता ने बताया कि गुटेरेस खास तौर पर इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हमले उन देशों तक फैल सकते हैं, जो शुरुआत में इस संघर्ष में शामिल नहीं थे। इनमें खाड़ी देश, जॉर्डन, सीरिया और लेबनान जैसे देश शामिल हैं।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि इस समय सबसे जरूरी है कि क्षेत्र में तनाव खत्म करने का रास्ता निकाला जाए। गुटेरेस ने फिर से अपील की है कि तुरंत संघर्ष रोका जाए, हालात को और बिगड़ने से रोका जाए और अच्छे संवाद तथा बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाए।</p>
<p></p>
<p>प्रवक्ता के अनुसार, गुटेरेस ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी और छह सदस्यीय खाड़ी सहयोग परिषद के राजदूतों से बातचीत की।</p>
<p></p>
<p>कतर के अमीर के साथ बातचीत में क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और सैन्य तनाव को जल्द खत्म कर स्थिरता के लिए बातचीत की राह पर लौटने की जरूरत पर चर्चा हुई।</p>
<p></p>
<p>दुजारिक ने कहा, "अल्बुसैदी के साथ अपनी बातचीत के दौरान, गुटेरेस ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिशों के लिए ओमान को धन्यवाद दिया, और ईरान के खिलाफ हमलों और खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों की निंदा दोहराई।"</p>
<p></p>
<p>अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर यह हमले जिनेवा में ईरान और इजरायल के बीच हुई आखिरी वार्ता के दो दिन बाद किए। यह वार्ता ओमान की मध्यस्थता से आयोजित की गई थी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;इजरायल युद्ध के बीच इस्फहान में फंसे भारतीय छात्र; &amp;apos;यूनिवर्सिटी&amp;apos; से बाहर धमाकों की आवाज़ें, सरकार से गुहार</title>
<link>https://www.newstvindia.in/indian-students-stranded-in-isfahan-amid-iran-israel-war-sounds-of-explosions-outside-university-urges-government</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/indian-students-stranded-in-isfahan-amid-iran-israel-war-sounds-of-explosions-outside-university-urges-government</guid>
<description><![CDATA[ ईरान के इस्फहान में भारतीय छात्रों ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई है। धमाकों के बीच फंसे छात्रों के पास राशन और इंटरनेट खत्म हो गया है। ]]></description>
<enclosure url="https://www.newstvindia.in/uploads/images/202603/image_870x580_69a58bf41f820.webp" length="13498" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:40:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Indian Students Trapped in Isfahan Iran, Iran Israel War Student Evacuation, Isfahan University of Medical Sciences, MEA India Iran Helpline, Air-lift Indian students from Iran</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>इस्फहान :</strong> मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के शहर इस्फहान में फंसे भारतीय छात्रों के बीच भय और अनिश्चितता का माहौल गहरा गया है। छात्रों ने भारत सरकार से अपील की है कि स्थिति सामान्य होने तक उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए या स्वदेश वापस लाने की व्यवस्था की जाए।</p>
<p>इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज की छात्रा फातिमा ने वीडियो जारी कर बताया कि वर्तमान में लगभग 25 से 30 भारतीय छात्र इस क्षेत्र में मौजूद हैं और लगातार चिंता में जी रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, “हम सरकार से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करते हैं कि हालात स्थिर होने तक हमें किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए या हमारे माता-पिता के पास भारत भेजा जाए।”</p>
<p>फातिमा ने स्पष्ट किया कि छात्र पहले इसलिए नहीं लौट सके, क्योंकि उनकी शैक्षणिक प्रतिबद्धताएं बाधा बनीं। उन्‍होंने बताया, “हम नहीं रुकना चाहते थे, लेकिन कक्षाओं, परीक्षाओं, अस्पताल की शिफ्टों और शैक्षणिक दौरों के कारण यहां रुकना अपरिहार्य था।”</p>
<p>छात्रा के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को सूचित किया है कि अगला सेमेस्टर ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा, जिससे उन्हें ईरान में रहने या घर लौटने का विकल्प मिलेगा और वे अप्रैल में परीक्षा देने वापस आ सकते हैं, हालांकि अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए अस्पताल में प्रतिदिन ड्यूटी पर उपस्थित रहना अनिवार्य कर दिया गया है।</p>
<p>छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से उन्हें केवल छात्रावास में रहने और बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। उन्‍होंने दावा किया,“हम पर मौजूदा छात्रावास खाली कर दूसरे छात्रावास में जाने का दबाव डाला जा रहा है। दिन-रात हमसे कमरा खाली करने को कहा जा रहा है।”</p>
<p>फातिमा ने बताया कि कई छात्र इस समय परिसर से बाहर किराए के आवासों में रह रहे हैं और सीमित संसाधनों के सहारे गुजारा कर रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा,“दुकानें बंद हैं, ऑनलाइन ऑर्डर संभव नहीं है और हमें बाहर निकलने की अनुमति नहीं है। हम जो भी सामान हमारे पास है, उसे आपस में बांटकर काम चला रहे हैं। इंटरनेट सेवाओं में बाधा के कारण भारत में अपने परिवारों से संपर्क करना भी कठिन हो गया है।"</p>
<p>छात्रा ने यह भी कहा कि हाल ही में उनके इलाके के पास विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि सटीक स्थान स्पष्ट नहीं है, लेकिन घटना कैंपस के करीब होने की आशंका जताई जा रही है। फातिमा ने कहा,“हम छात्रावास में भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। घर पर भी सुरक्षा का एहसास नहीं है। चारों ओर दहशत और अनिश्चितता का माहौल है।”</p>
<p>उन्होंने बताया कि भारत में उनके परिवारजन लगातार समाचारों के माध्यम से स्थिति पर नजर रख रहे हैं और बेहद चिंतित हैं। माता-पिता हमसे भी ज्यादा डरे हुए हैं।</p>
<p>छात्रों ने भारतीय अधिकारियों से शीघ्र हस्तक्षेप करने और सामान्य स्थिति बहाल होने तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>खाड़ी देशों में &amp;apos;महायुद्ध&amp;apos; का आगाज़: दुबई, अबू धाबी और दोहा पर ईरानी मिसाइल हमले, कुवैत में अमेरिकी विमान क्रैश</title>
<link>https://www.newstvindia.in/great-war-begins-in-gulf-countries-iranian-missile-attacks-on-dubai-abu-dhabi-and-doha-us-aircraft-crash-in-kuwait</link>
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<description><![CDATA[ ईरान ने दुबई, दोहा और अबू धाबी पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कुवैत में अमेरिकी विमान गिरने से 3 सैनिकों की मौत। खाड़ी में महायुद्ध की शुरुआत। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Mar 2026 18:38:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Iran Attacks Dubai Abu Dhabi Doha, US Fighter Jet Crash Kuwait, 3 US Soldiers Killed Kuwait, Middle East War 2026, Iran Missile Strike Gulf Countries</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान :</strong> दुबई, अबू धाबी और दोहा में सोमवार सुबह से ही धमाकों की आवाजें सुनी गईं। ईरान कई पड़ोसी देशों पर लगातार हमलावर बना हुआ है। इन हमलों में सैन्य ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचे दोनों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच भी गोलीबारी हुई।</p>
<p>बहरीन में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह से ही तेज धमाकों और सायरनों की आवाजें सुनी गईं। इसके अलावा रात में भी कई विस्फोट सुने गए।</p>
<p>शुरुआत में ईरानी हमले बहरीन में अमेरिकी नौसेना और सैन्य ठ‍िकानों पर केंद्रित प्रतीत हुए। हालांकि अब हवाई अड्डों और अन्य नागरिक सुविधाओं को भी टारगेट किया जा रहा है।</p>
<p>खाड़ी देशों में ऊंची-ऊंची रिहायशी इमारतें, लग्जरी होटल, शॉपिंग सेंटर और मॉडर्न एयरपोर्ट टर्मिनल पर छिटपुट हमले हुए हैं। एयर डिफेंस सिस्टम आने वाले खतरों की संख्या का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p>सीएनएन के जियोलोकेटेड एक ऑनलाइन वीडियो के अनुसार, कुवैत में एक अमेरिकी हवाई अड्डे के पास एक लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे बढ़ते युद्ध को लेकर चिंताएं और गहरा गई हैं। यह दुर्घटना तब हुई जब ईरान ने अपने क्षेत्र पर संयुक्त अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद खाड़ी में अपने अभियान को तेज कर दिया।</p>
<p>टकराव जारी रहने का संकेत इस बात से और बढ़ गया जब एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि तेहरान वॉशिंगटन के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा।</p>
<p>अमेर‍िकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना कि कुवैत में तीन अमेर‍िकी सर्विस मेंबर्स के मारे जाने के बाद और भी अमेरिकी हताहत हो सकते हैं।</p>
<p>रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि उसने 165 बैलिस्टिक मिसाइलें, दो क्रूज मिसाइलें और 541 ईरानी ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में धमाकों और सायरनों की आवाजें सुनी गईं।</p>
<p>सऊदी अरब और ओमान अब तक कम प्रभावित हुए हैं। ओमान ने अपने वाणिज्यिक बंदरगाह दुक़्म पर एक ड्रोन हमले की सूचना दी, जबकि सऊदी अधिकारियों ने कहा कि रियाद और पूर्वी प्रांत को निशाना बनाकर किए गए हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया गया, और इसे गलत हमला बताया।</p>
<p>हालांकि ईरान को पहले भी खाड़ी क्षेत्र में हुए हमलों से जोड़ा गया, लेकिन वर्तमान हमलों का पैमाना और तालमेल एक बड़ी और खतरनाक बढ़त दिखाता है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>खामेनेई की मौत से भड़के पुतिन: अमेरिका और इजरायल को दी गंभीर चेतावनी, बताया &amp;apos;नैतिकता का उल्लंघन&amp;apos;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/putin-stirred-up-by-khamenei-s-death-serious-warning-to-the-us-and-israel-calling-it-a-breach-of-morality</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका-इजरायल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत। रूस, चीन और उत्तर कोरिया ने की कड़ी निंदा, ऑस्ट्रेलिया बोला- शोक नहीं मनाएंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 18:37:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Ayatollah Khamenei Death Reaction, Putin on Iran Strike, China Condemns US Israel Attack, Anthony Albanese on Khamenei, Iran News Today</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : </strong>अमेरिका और इजरायलके हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम नेता खामेनेई की मौत के बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। वहीं चीन और उत्तर कोरिया ने भी नाराजगी जाहिर की है।</p>
<p>इजरायली मीडिया टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई इंसानी नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी नियमों का उल्लंघन करती है।</p>
<p>पुतिन ने ईरानी समकक्ष मसूद पेजेशकियन को लिखे एक नोट में कहा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और उनके परिवार के सदस्यों की मौत के संबंध में मेरी गहरी संवेदनाएं स्वीकार करें।”</p>
<p>चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि खामेनेई पर हमला ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है। यह यूएन चार्टर के मकसद और सिद्धांतों और इंटरनेशनल रिलेशन के बेसिक नियमों को रौंदता है। चीन इसका कड़ा विरोध करता है और इसकी कड़ी निंदा करता है। हम सैन्य ऑपरेशन को तुरंत रोकने, तनावपूर्ण स्थिति को और न बढ़ाने और मिडिल ईस्ट और पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर कोशिश करने की अपील करते हैं।</p>
<p>उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया, कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा है कि ईरान पर इजरायल के हमले और वहां अमेरिकी सैन्य अभियान गैरकानूनी हमले और राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन हैं।</p>
<p>ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि खामेनेई सरकार के बैलिस्टिक मिसाइल और न्यूक्लियर प्रोग्राम, हथियारबंद प्रॉक्सी को सपोर्ट और अपने ही लोगों के खिलाफ हिंसा और डराने-धमकाने के क्रूर कामों के लिए जिम्मेदार थे। वह ऑस्ट्रेलियाई जमीन पर हमलों की प्लानिंग के लिए जिम्मेदार थे। उनकी मौत पर शोक नहीं मनाया जाएगा। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस हमले में खामेनेई की बेटी, पोता और दामाद की भी मौत हो गई है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना! डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से भड़के सैंडर्स और वॉरेन, दी बड़ी चेतावनी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/targeting-iran-s-top-leadership-sanders-and-warren-warn-against-donald-trump-s-decision</link>
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<description><![CDATA[ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू किए। अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स ने इसे असंवैधानिक बताया, जबकि रिपब्लिकन ने समर्थन किया। जानें पूरी रिपोर्ट। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 01 Mar 2026 07:42:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump Iran Strike 2026, Bernie Sanders on Iran War, US-Iran Conflict News, Republican Support Trump Attack, US Foreign Policy Iran</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन : </strong>राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान में सैन्य हमले शुरू करने के फैसले ने अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज कर दी है। वरिष्ठ डेमोक्रेट नेताओं ने इसे अनधिकृत और खतरनाक कार्रवाई करार दिया है, जबकि रिपब्लिकन सांसद इसे निर्णायक और आवश्यक कदम बता रहे हैं।</p>
<p>सिनेट इंटेलिजेंस के उपाध्यक्ष मार्क वार्नर ने कहा कि राष्ट्रपति ने व्यापक अमेरिकी हमले किए हैं, जिनमें केवल परमाणु या मिसाइल ढांचा नहीं, बल्कि वरिष्ठ ईरानी नेतृत्व समेत कइयों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह अमेरिका को मध्य पूर्व में एक और व्यापक संघर्ष में खींच सकता है और इस कार्रवाई में कानूनी और संवैधानिक सवाल उठते हैं।</p>
<p>सिनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने अकेले ईरान के साथ एक और युद्ध शुरू किया है। यह खतरनाक और अवैध है। अमेरिका को घरेलू जरूरतों की अनदेखी करके झूठ पर आधारित हमेशा चलने वाले युद्ध में नहीं फंसाया जाना चाहिए।”</p>
<p>हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी मीक्स ने इसे राष्ट्रपति के अधिकार का दुरुपयोग करार दिया और कहा कि इस अनधिकृत युद्ध के लिए कांग्रेस (संसद) को अब निर्णय लेना होगा।</p>
<p>सिनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा कि ट्रंप और उनके इजरायली सहयोगी नेतन्याहू ने अवैध, पूर्वनियोजित और असंवैधानिक युद्ध शुरू किया है। उन्होंने चेताया कि अमेरिकी जनता को फिर से धोखा दिया जा रहा है।</p>
<p>अन्य डेमोक्रेट नेताओं ने भी युद्ध की रणनीति और अमेरिकी नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई और युद्ध शक्तियों के तहत कानूनी प्रक्रिया अपनाने की मांग की।</p>
<p>वहीं, रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति के कदम का समर्थन किया। सिनेट रोजर विकर ने इसे अमेरिकी और अमेरिकी हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई कहा। हाउस फॉरेन अफेयर्स समिति के चेयरमैन ब्रायन मास्ट ने इसे ईरान की लगातार 47 सालों की आक्रामकता का जवाब बताया।</p>
<p>टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने घरेलू सुरक्षा बढ़ाने के लिए निर्देश दिए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने नागरिकों की सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयासों के लिए टास्क फोर्स बनाई है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ट्रंप का ईरान पर युद्ध का ऐलान: &amp;quot;हथियार डालो या मौत चुनो&amp;quot;, मिडिल ईस्ट में महायुद्ध शुरू</title>
<link>https://www.newstvindia.in/trump-s-declaration-of-war-on-iran-choose-arms-or-die-the-great-war-begins-in-the-middle-east</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/trump-s-declaration-of-war-on-iran-choose-arms-or-die-the-great-war-begins-in-the-middle-east</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान में &#039;मुख्य युद्ध कार्रवाई&#039; शुरू होने की घोषणा की। उन्होंने ईरानी सुरक्षा बलों से कहा, “अपने हथियार डालो और पूरी सुरक्षा पाओ, या मृत्यु का सामना करो।” उन्होंने ईरानी जनता से भी कहा, “आपकी स्वतंत्रता का समय अब आ गया है।” ]]></description>
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<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 23:45:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords></media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन : </strong>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को ईरान में 'मुख्य युद्ध कार्रवाई' शुरू होने की घोषणा की। उन्होंने ईरानी सुरक्षा बलों से कहा, “अपने हथियार डालो और पूरी सुरक्षा पाओ, या मृत्यु का सामना करो।” उन्होंने ईरानी जनता से भी कहा, “आपकी स्वतंत्रता का समय अब आ गया है।”</p>
<p></p>
<p>ट्रंप ने नागरिकों को घर के अंदर रहने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “सुरक्षित रहें। घर से बाहर मत निकलें। बाहर बहुत खतरा है। हर जगह बम गिर सकते हैं।”</p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने हाल ही में ईरान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की। उनका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा करना और ईरानियों से आने वाले तत्काल खतरों को खत्म करना है। उन्होंने ईरान पर अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए खतरा पैदा करने का आरोप लगाया।</p>
<p></p>
<p>राष्ट्रपति ने कहा कि ईरानी शासन अमेरिका के लिए 47 वर्षों से शत्रुता की प्रतीक रहा है। उन्होंने 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास के कब्जे और 1983 में बेरुत में मरीन बैरक बम विस्फोट का हवाला दिया। ट्रंप ने ईरान को दुनिया का नंबर वन आतंकवाद का प्रायोजक राज्य बताया और कहा कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने जून में हुए 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' का जिक्र किया और कहा कि फोर्डो, नतान्ज और इस्फहान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट किया गया। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने का हर मौका ठुकरा दिया।</p>
<p></p>
<p>ट्रंप ने नए हमले की घोषणा करते हुए कहा, “अमेरिकी सेना ने इस अत्याचारी और कट्टरपंथी शासन को अमेरिका और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने से रोकने के लिए विशाल अभियान शुरू किया है। हम उनके मिसाइल और नौसैनिक उद्योग को पूरी तरह नष्ट करेंगे।”</p>
<p></p>
<p>उन्होंने युद्ध में होने वाले खतरों को स्वीकार करते हुए कहा कि बहादुर अमेरिकी सैनिकों की जान जा सकती है और हममें से कुछ घायल हो सकते हैं। युद्ध में यह सामान्य है।</p>
<p></p>
<p>यह सैन्य कदम पश्चिम एशिया में दशकों में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।</p>
<p></p>
<p>भारत का ईरान के साथ पुराना सांस्कृतिक संबंध है और अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी भी बढ़ रही है। किसी भी लंबे संघर्ष से ऊर्जा आपूर्ति, क्षेत्रीय स्थिरता और पश्चिम एशिया में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मिडिल ईस्ट में तनाव से बढ़ा संकट: दुबई समेत कई देशों ने बंद किए अपने हवाई अड्डे।</title>
<link>https://www.newstvindia.in/tensions-escalate-in-the-middle-east-several-countries-including-dubai-have-closed-their-airports</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/tensions-escalate-in-the-middle-east-several-countries-including-dubai-have-closed-their-airports</guid>
<description><![CDATA[ इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है। एयर इंडिया और फ्लाईदुबई समेत कई एयरलाइंस की उड़ानें प्रभावित। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 22:59:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Dubai Airport Suspended, Israel Iran War, Air India Flights Cancelled, Middle East Airspace Closed, DXB Airport Update, Travel News</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : </strong>इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बीच दुबई एयरपोर्ट्स ने शनिवार को घोषणा की कि दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (डीएक्सबी) और दुबई वर्ल्ड सेंट्रल-अल मकतूम इंटरनेशनल (डीडब्ल्यूसी) एयरपोर्ट पर सभी उड़ान संचालन अगली सूचना तक निलंबित रहेंगे।</p>
<p>शनिवार को इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए हवाई हमलों के बाद इजरायल, ईरान, दुबई और इराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे मध्य पूर्व की कई दिशाओं में हवाई यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई।</p>
<p>दुबई एयरपोर्ट्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, "डीएक्सबी और दुबई वर्ल्ड सेंट्रल-अल मकतूम इंटरनेशनल (डीडब्ल्यूसी) हवाई अड्डे पर उड़ान संचालन अगली सूचना तक निलंबित कर दिया गया है। यात्रियों को एयरपोर्ट न जाने की सलाह दी जाती है और उड़ान संबंधी अपडेट के लिए अपनी एयरलाइन से संपर्क करें।"</p>
<p>पोस्ट में आगे कहा गया कि "हम यात्रियों के सहयोग की सराहना करते हैं। स्थिति पर नजर रखते हुए आगे की जानकारी दी जाएगी।"</p>
<p>दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है, जहां प्रति सप्ताह 8,500 से अधिक उड़ानें और प्रतिदिन 1,200 से अधिक उड़ानें संचालित होती हैं। यहां 100 से अधिक विमानन कंपनियां 270 से ज्यादा गंतव्यों के लिए सेवाएं देती हैं।</p>
<p>प्रमुख एयरलाइंस कंपनियों में अमीरात, फ्लाईदुबई, इंडिगो और एयर इंडिया शामिल हैं।</p>
<p>खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देशों के हवाई अड्डे प्रभावित हुए, जिसके चलते सुरक्षा कारणों से कई उड़ानें रद्द कर दी गईं, मोड़ दी गईं या फिर उनके मार्ग बदल दिए गए।</p>
<p>हमलों के तुरंत बाद इजरायल ने नागरिक विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जबकि यूरोप और खाड़ी क्षेत्र की कई एयरलाइनों ने अपनी सेवाएं रद्द कर दीं या उड़ानों के मार्ग बदल दिए।</p>
<p>दुबई स्थित एयरलाइन फ्लाईदुबई ने पहले कहा था कि इराक, ईरान और इजरायल के हवाई क्षेत्र के अस्थायी बंद होने के कारण उसकी कुछ उड़ानें प्रभावित हुई हैं।</p>
<p>एयर इंडिया ने कहा है कि मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उसने मध्य पूर्व के सभी गंतव्यों के लिए अपनी सभी उड़ानें निलंबित कर दी हैं।</p>
<p>यह घोषणा ऐसे समय में की गई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान में 'बड़े सैन्य अभियान' शुरू किए, जिससे मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया। इस घटनाक्रम से व्यापक टकराव की आशंका बढ़ गई है, जिसके दूरगामी भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं।</p>
<p>एयर इंडिया ने एक बयान में कहा, "मध्य पूर्व के कुछ हिस्सों में नाजुक हो रही स्थिति को देखते हुए मध्य पूर्व के सभी गंतव्यों के लिए एयर इंडिया की सभी उड़ानें निलंबित की जाती हैं।”</p>
<p>एयरलाइन ने कहा, "हम अपने यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम स्थिति का लगातार आकलन करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर संचालन में बदलाव करेंगे। हमारी टीमें यात्रियों को हर संभव सहायता प्रदान करेंगी।"</p>
<p>एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए एयर इंडिया एक्सप्रेस ने सभी पश्चिम दिशा की अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निलंबित कर दी हैं। उन्होंने कहा कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान पर अमेरिकी राजनीति में दरार: रिपब्लिकन ने दी सैन्य तैयारी की चेतावनी, डेमोक्रेट्स ने पेश किया &amp;apos;वॉर पावर्स&amp;apos; प्रस्ताव</title>
<link>https://www.newstvindia.in/rift-in-us-politics-over-iran-republicans-warn-of-military-readiness-democrats-propose-war-powers</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/rift-in-us-politics-over-iran-republicans-warn-of-military-readiness-democrats-propose-war-powers</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिका में ईरान नीति को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच खींचतान तेज। राष्ट्रपति ट्रंप की &#039;शक्ति से शांति&#039; की नीति का विरोध कर रहे डेमोक्रेट्स ने &#039;वॉर पावर्स&#039; प्रस्ताव पेश किया। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 07:34:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US Iran Policy 2026, Donald Trump Iran Strategy, John Thune, Chuck Schumer, War Powers Resolution, US Senate Iran Debate</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन :</strong> ईरान के मुद्दे पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। सीनेट मेजोरिटी लीडर जॉन थ्यून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति का समर्थन कर रहे हैं, तो वहीं हाउस डेमोक्रेट्स ने किसी भी मिलिट्री एक्शन को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर मतदान कराने की पहल की।</p>
<p>फॉक्स न्यूज पर बोलते हुए थ्यून ने कहा, “यह राष्ट्रपति सुरक्षित सड़कों, अमेरिकी लोगों की जेब में अधिक पैसे और अमेरिकियों के आगे बढ़ने के नए अवसरों के लिए प्रतिबद्ध हैं।”</p>
<p>विदेश नीति पर उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि राष्ट्रपति हमें उस क्षेत्र और देश के भीतर अमेरिका के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए तैयार कर रहे हैं। हम परमाणु हथियारों से लैस ईरान को बर्दाश्त नहीं कर सकते। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह बात कल रात अपने भाषण में स्पष्ट की थी। मुझे लगता है कि इस पर अमेरिकी जनता का बड़ा बहुमत सहमत है।”</p>
<p>थ्यून ने यह भी कहा कि अमेरिका के उस इलाके में जरूरी हित हैं और राष्ट्रपति शक्ति के माध्यम से शांति की नीति अपना रहे हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका के पास सही समय और सही स्थान पर उचित संसाधन उपलब्ध हों। उन्होंने कहा क‍ि उम्मीद है कि इसकी आवश्यकता नहीं पड़ेगी। अगर ईरान वार्ता की मेज पर आता है, तो संभव है कि कोई समझौता हो सके।</p>
<p>इसी बीच, हाउस में डेमोक्रेट नेताओं ने घोषणा की कि जब कांग्रेस अगले सप्ताह फिर से बैठक करेगी, तो वे द्विदलीय खन्ना-मासी ईरान वॉर पावर्स प्रस्ताव पर पूर्ण सदन में मतदान कराएंगे।</p>
<p>संयुक्त बयान में डेमोक्रेट नेताओं ने कहा, “जैसे ही कांग्रेस अगले सप्ताह दोबारा बैठक करेगी, हम प्रतिनिधि सभा में द्विदलीय खन्ना-मासी वॉर पावर्स प्रस्ताव पर मतदान कराने के लिए बाध्य करेंगे।”</p>
<p>उन्होंने कहा, “यह कानून राष्ट्रपति को ईरान के खिलाफ सैन्य बल प्रयोग के लिए कांग्रेस के समक्ष अपना पक्ष रखने की आवश्यकता देगा।”</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा, “हमारा मानना है कि कांग्रेस से परामर्श और उसकी अनुमति के बिना ऐसी कोई भी कार्रवाई असंवैधानिक होगी। अगले सप्ताह हर सदस्य को यह दर्ज कराने का अवसर मिलेगा कि वे कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं या नहीं।”</p>
<p>सीनेट में डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने प्रशासन से अधिक स्पष्टता की मांग की, जबकि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी जिनेवा में वार्ता कर रहे थे।</p>
<p>सीनेट में शूमर ने कहा, “प्रशासन को स्पष्ट रूप से अमेरिकी जनता को बताना चाहिए कि ईरान में उसका लक्ष्य क्या है। मैंने हमेशा कहा है कि ईरान का सामना करने और उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए रणनीति, स्पष्टता और पारदर्शिता जरूरी है। लेकिन अब तक हमें प्रशासन से इनमें से कुछ भी नहीं मिल रहा है। अमेरिकी जनता जवाब की हकदार है।”</p>
<p>इस बीच, सीनेटर जैकी रोसेन और डेव मैककॉर्मिक ने इंटरनेट ब्लैकआउट और विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बाद तेहरान पर दबाव बढ़ाने के लिए बाइपार्टिसन ईरान ह्यूमन राइट्स, इंटरनेट फीडम और अकाउंटेबिलिटी एक्ट पेश किया।</p>
<p>रोसेन ने कहा, “ईरान के लोगों को एक दबाने वाले शासन के तहत रहने के लिए मजबूर किया गया है, जिसने अपने लोगों की लड़ाई की कोशिशों को कमजोर करने के लिए सेंसरशिप और इंटरनेट ब्लैकआउट का इस्तेमाल किया है।”</p>
<p>“ईरान का भविष्य उसके लोगों को बनाना चाहिए, जो अपने अधिकारों की सुरक्षा और जानकारी तक मुफ़्त पहुंच के हकदार हैं।”</p>
<p>मैककॉर्मिक ने कहा कि यह कानून “आर्थिक, सैन्य और नैतिक रूप से दिवालिया शासन के खिलाफ ईरानी लोगों के साथ खड़े होने की अमेरिका की कोशिशों पर आधारित है।”</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>अफगानिस्तान की पाकिस्तान पर बड़ी जवाबी कार्रवाई: 15 सैन्य चौकियों पर कब्जे का दावा, सीमा पर तनाव बढ़ा</title>
<link>https://www.newstvindia.in/afghanistan-s-big-retaliation-on-pakistan-claims-to-occupy-15-military-outposts-border-tensions-escalate</link>
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<description><![CDATA[ अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर। तालिबान सरकार का दावा- जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की 15 चौकियों पर किया कब्जा, कई सैनिक मारे गए। जानें सीमा पर क्या हैं ताज़ा हालात। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 07:24:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Afghanistan Pakistan Border Tension, Taliban retaliatory strikes, Durand Line Conflict, Hamdullah Fitrat statement, UNAMA Afghanistan report, Pakistan Air Strikes victims</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>काबुल : </strong>अफगानिस्तान ने गुरुवार रात को दावा किया है कि वह हाल में हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों के जवाब में पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अफगान अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक दुश्मन की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान के उप प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कार्रवाई के दौरान कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, जबकि कुछ को जिंदा भी पकड़ लिया गया है।</p>
<p></p>
<p>प्रवक्ता के अनुसार, दुश्मन के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और सीमा क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त हासिल की जा रही है। उन्होंने कहा कि दुश्मन की कुल 15 पोस्ट पर कब्जा कर लिया गया है तथा कई सैनिक हताहत हुए हैं।</p>
<p></p>
<p>अफगान पक्ष ने यह भी बताया कि डूरंड लाइन पर तैनात अत्याधुनिक लेजर उपकरणों से लैस इकाइयों ने भी ऑपरेशन शुरू कर दिया है। बयान में कहा गया है कि रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए दुश्मन की हर गतिविधि को निशाना बनाया जाएगा।</p>
<p></p>
<p>हालांकि, पाकिस्तान की ओर से इन दावों पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए क्षेत्र में हालात संवेदनशील बने हुए हैं।</p>
<p></p>
<p>बता दें कि अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) ने पुष्टि की थी कि पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में किए गए हवाई हमलों में 13 नागरिकों की मौत हुई थी। इनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। स्थानीय मीडिया ने यूएनएएमए के हवाले से मंगलवार को ये खबर प्रकाशित की थी।</p>
<p></p>
<p>अफगानिस्तान की प्रमुख न्यूज एजेंसी खामा प्रेस ने यूएनएएमए की एक रिपोर्ट के हवाले से खुलासा किया था कि हालिया हवाई हमलों में 13 अफगान नागरिक मारे गए हैं, जबकि सात घायल हो गए थे। ये हमले नंगरहार के बेहसूद और खोगियानी जिलों में 21-22 फरवरी की दरमियानी रात किए गए थे।</p>
<p></p>
<p>पक्तिका के बरमल में एक स्कूल और मस्जिद को निशाना बनाया गया था, जबकि ओर्गुन जिले में एक घर पर एयर स्ट्राइक की गई थी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;अमेरिका वार्ता: विदेश मंत्री अराघची जिनेवा रवाना, क्या खत्म होगा बरसों का तनाव?</title>
<link>https://www.newstvindia.in/iran-us-talks-foreign-minister-araghchi-leaves-for-geneva-will-years-of-tensions-end</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/iran-us-talks-foreign-minister-araghchi-leaves-for-geneva-will-years-of-tensions-end</guid>
<description><![CDATA[ ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची जिनेवा में अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए रवाना हुए हैं। परमाणु समझौते और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 07:35:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Iran US Talks Geneva, Abbas Araghchi, Iran Nuclear Deal, Donald Trump Iran Policy, West Asia Tension, Diplomacy Iran US</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>तेहरान :</strong> ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची बुधवार को अमेरिका के साथ होने वाली नई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता में हिस्सा लेने के लिए एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में जेनेवा के लिए रवाना हुए।</p>
<p>सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह बातचीत इसलिए हो रही है क्योंकि वेस्ट एशिया रीजन में अमेरिक‍ी मिलिट्री की तैनाती के चलते ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है।</p>
<p>अराघची ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर कहा कि उनका देश गुरुवार को अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करेगा और वे न्यायसंगत और समान समझौता करने के संकल्प के साथ वार्ता में जाएंगे।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के पास एक ऐतिहासिक अवसर है कि वे एक ऐसा अभूतपूर्व समझौता करें, जो पारस्परिक चिंताओं का समाधान करे और साझा हितों की रक्षा करे। उन्होंने जोर देकर कहा कि समझौता संभव है, बशर्ते कूटनीति को प्राथमिकता दी जाए।</p>
<p>आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि अमेरिका के प्रति सभी विकल्प खुले हैं, जिनमें गरिमा-आधारित कूटनीति और पछतावा पैदा करने वाली रक्षा शामिल हैं।</p>
<p>मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के टकराव को डिप्लोमेसी के जरिए सुलझाना पसंद करते हैं लेकिन एक बात पक्की है, मैं कभी ईरान को न्यूक्लियर हथियार रखने की इजाजत नहीं दूंगा।</p>
<p>इसी बीच, ईरान के उप विदेश मंत्री (राजनीतिक मामलों) मजिद तक़्त रावांची ने मंगलवार को कहा कि ईरान परमाणु समझौता हासिल करने के लिए जो भी जरूरी हो, करने के लिए तैयार है।</p>
<p>उन्होंने एनपीआर रेडियो को द‍िए इंटरव्यू में कहा, "हम समझौता करने के लिए जो भी आवश्यक होगा करेंगे। हम ज‍िनेवा में पूरी ईमानदारी और सद्भावना के साथ वार्ता कक्ष में प्रवेश करेंगे।"</p>
<p>रावांची ने आगे कहा, "हमें उम्मीद है कि हमारी सद्भावना और अच्छी पहल का अमेरिकी पक्ष से भी प्रत्युत्तर मिलेगा और यदि सभी पक्षों में राजनीतिक इच्छाशक्ति है, तो मुझे विश्वास है कि समझौता जल्द ही संभव है।"</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बलूचिस्तान की &amp;apos;अम्मा हूरी&amp;apos; का निधन: बेटे की वापसी का 14 साल का इंतजार मौत के साथ हुआ खत्म</title>
<link>https://www.newstvindia.in/balochistan-s-amma-huri-dies-14-year-wait-for-son-s-return-ends-with-death</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/balochistan-s-amma-huri-dies-14-year-wait-for-son-s-return-ends-with-death</guid>
<description><![CDATA[ बलूचिस्तान में लापता लोगों के लिए संघर्ष करने वाली 80 वर्षीय अम्मा हूरी का निधन। 2012 से गायब बेटे गुल मोहम्मद मर्री की तलाश में वह 14 साल तक सड़कों पर रहीं। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 21 Feb 2026 23:05:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Amma Hoori Balochistan, Baloch Missing Persons, Gul Mohammad Marri, Quetta Protest, Baloch Mothers Struggle, Forced Disappearances Pakistan</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>क्वेटा :</strong><span> बलूचिस्तान में अपनों की तलाश में सड़कों पर उतरने वाली माताओं के संघर्ष का एक चेहरा 'अम्मा हूरी' अब इस दुनिया में नहीं रहीं। 16 फरवरी को 80 वर्ष की आयु में अम्मा हूरी का निधन हो गया। उनके जीवन का अंतिम पल भी उसी उम्मीद में बीता कि शायद उनका लापता बेटा घर लौट आए, लेकिन 14 साल का यह लंबा इंतजार उनकी मौत के साथ ही खत्म हुआ।</span></p>
<h4><span>संघर्ष और दर्द की कहानी</span></h4>
<p><span>अम्मा हूरी केवल एक मां नहीं थीं, बल्कि वे बलूचिस्तान की उन सैकड़ों माताओं की आवाज बन चुकी थीं, जिनके बच्चे वर्षों से लापता हैं। उनके बेटे </span><span>गुल मोहम्मद मर्री</span><span> को कथित तौर पर साल 2012 में जबरन गायब कर दिया गया था। तब से लेकर अपनी आखिरी सांस तक अम्मा हूरी ने सरकार और प्रशासन से केवल एक ही सवाल किया—"मेरा बेटा कहां है?"</span></p>
<p><span>शनिवार को सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अम्मा हूरी का संघर्ष अब बलूच समाज की राजनीतिक चेतना का एक बड़ा हिस्सा बन गया है। उन्होंने पाकिस्तानी राज्य की नीतियों और 'सामूहिक दंड' जैसी स्थितियों का सामना करते हुए न्याय की गुहार लगाई।</span></p>
<h4><span>सड़कों और धरनों पर बीती उम्र</span></h4>
<p><span>80 साल की बुजुर्ग अवस्था में भी अम्मा हूरी का जज्बा कम नहीं हुआ था। उन्होंने न्याय पाने के लिए सामाजिक बाधाओं को तोड़ा और:</span></p>
<p><span>• </span><span>विरोध प्रदर्शन:</span><span> वे क्वेटा के विरोध प्रदर्शनों और इस्लामाबाद की कड़कड़ाती ठंड में लगने वाले धरनों में हमेशा शामिल रहीं।</span></p>
<p><span>• </span><span>अदालतों के चक्कर:</span><span> अपने बेटे की बरामदगी के लिए उन्होंने थानों से लेकर अदालतों तक के चक्कर काटे।</span></p>
<p><span>• </span><span>कैंपों में उपस्थिति:</span><span> 'वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स' के चेयरमैन नसरुल्लाह बलूच ने बताया कि वह अक्सर अपनी पोती (लापता बेटे की बेटी) के साथ लापता व्यक्तियों के कैंप में आती थीं।</span></p>
<h4><span>सोशल मीडिया पर वायरल हुआ आखिरी संदेश</span></h4>
<p><span>अम्मा हूरी के निधन के बाद सोशल मीडिया पर उनका एक छोटा वीडियो खूब साझा किया जा रहा है। वीडियो में उनका दर्द साफ झलक रहा है। वह कह रही हैं:</span></p>
<p><em>"मेरे बेटे की कोई खबर नहीं है। वह जिंदा है या मर चुका है, मुझे नहीं पता। मैं 14 साल से सड़कों पर हूं... अब मैं बूढ़ी हो गई हूं। लोग मुझे वाहन से उतरते समय सहारा देते हैं, लेकिन मैं फिर भी यहां विरोध करने आती हूं ताकि मुझे न्याय मिल सके।"</em></p>
<h4><span>बलूचिस्तान में 'जबरन गुमशुदगी' का मुद्दा</span></h4>
<p><span>बलूचिस्तान में 'जबरन गुमशुदगी' (Forced Disappearances) एक बहुत बड़ा और संवेदनशील मुद्दा है। स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि हजारों बलूच युवाओं को सुरक्षा बलों द्वारा उठा लिया गया है, जिनका कोई सुराग नहीं मिलता। हालांकि, पाकिस्तानी सरकार और राज्य संस्थाएं इन आरोपों को अक्सर खारिज करती रही हैं।</span></p>
<p><span>अम्मा हूरी की कहानी बलूचिस्तान की उन अनगिनत माताओं की दास्तां बयां करती है, जो अपने बच्चों की फोटो हाथ में लिए सड़कों पर बैठी हैं। अम्मा हूरी तो चली गईं, लेकिन उनकी अधूरी आस और संघर्ष का संदेश अब बलूचिस्तान के हर घर तक पहुंच चुका है।</span></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बांग्लादेश में &amp;apos;रहमान राज&amp;apos; का आगाज़: पीएम तारिक रहमान ने अल्पसंख्यकों को दिया सुरक्षा का भरोसा, सांसदों की सुख&#45;सुविधाओं पर लगाई लगाम</title>
<link>https://www.newstvindia.in/bangladesh-launches-rehman-raj-pm-tariq-rehman-assures-security-to-minorities-restricts-mps-amenities</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ने कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। सांसदों की टैक्स-फ्री कार और प्लॉट की सुविधा भी खत्म की। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 19 Feb 2026 18:44:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>तारिक रहमान, बांग्लादेश न्यूज़, Tarique Rahman, बांग्लादेश नई सरकार, अल्पसंख्यक सुरक्षा बांग्लादेश, BNP Bangladesh, ढाका ट्रिब्यून</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : </strong> बांग्लादेश में नई सरकार की स्थापना हो चुकी है और देश को उनका नेता मिल चुका है। भारी अशांति और हिंसा देखने के बाद अब बांग्लादेश के लोगों को बदलाव का एक नया सूरज देखने को मिला। देश की कमान संभालते ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सख्त चेतावनी जारी कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एकजुटता दिखाई। देश में अल्पसंख्यक समुदायों ने हिंसा की चरम सीमा पार होते हुए देखी है और भोगा है। ऐसे में ये नई सरकार उनके लिए आशा की एक किरण बन सकती है।</p>
<p>बांग्लादेशी मीडिया ढाका ट्रिब्यून की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री रहमान ने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि शांति और लोगों का भरोसा वापस लाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “पार्टी, धर्म, जाति या पंथ कुछ भी हो, हमारी सरकार की मुख्य प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाकर और भ्रष्टाचार को सख्ती से कंट्रोल करके लोगों के मन में शांति और सुरक्षा वापस लाना है।”</p>
<p>इस दौरान उन्होंने जुआ और नशीले पदार्थों के फैलने को लोगों की सुरक्षा खराब करने का बड़ा कारण बताया और ऐसी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा की। पीएम रहमान ने कहा कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को पहले ही कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए जा चुके हैं।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी संवैधानिक, सरकारी और प्राइवेट संस्थाएं कानूनी नीतियों और नियमों के अनुसार सख्ती से काम करेंगी। उन्होंने घोषणा की, “न पार्टी का असर, न इज्जत, न जबरदस्ती, राज्य चलाने में कानून का राज ही आखिरी होगा।”</p>
<p>बांग्लादेशी पीएम ने सबको साथ लेकर चलने पर जोर दिया और कहा, “चाहे कोई मुस्लिम हो, हिंदू हो, बौद्ध हो या ईसाई हो, धर्म से उसकी नागरिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। जिन्होंने बीएनपी को वोट दिया और जिन्होंने नहीं दिया, आप सभी का इस सरकार पर बराबर हक है। हर किसी की अपनी पार्टी, धर्म और सोच हो सकती है, लेकिन देश सबका है। यह हम सबका देश है, जिसे हमें मिलकर आगे ले जाना है।”</p>
<p>सरकारी ऑफिस में ईमानदारी को बढ़ावा देने के मकसद से तारिक ने ऐलान किया कि बीएनपी के सांसद कुछ पारंपरिक सुविधाओं का फायदा नहीं उठाएंगे। उन्होंने कहा, “कैबिनेट की पहली बैठक में हमने तय किया कि कोई भी सांसद सरकारी फायदों के तहत टैक्स-फ्री गाड़ियां इंपोर्ट नहीं करेगा और प्लॉट का अलॉटमेंट नहीं करेगा।” इस फैसले को निष्पक्षता की झलक बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार नैतिक गवर्नेंस स्टैंडर्ड को बनाए रखने की कोशिश करेगी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>बीएनपी का &amp;apos;मिशन प्रेसिडेंट&amp;apos;: खंडाकर मोशर्रफ हुसैन या मिर्जा फखरुल? कौन होगा बांग्लादेश का अगला राष्ट्रपति?</title>
<link>https://www.newstvindia.in/bnp-s-mission-president-khandakar-mosharraf-hussain-or-mirza-fakhrul-who-will-be-the-next-president-of-bangladesh</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/bnp-s-mission-president-khandakar-mosharraf-hussain-or-mirza-fakhrul-who-will-be-the-next-president-of-bangladesh</guid>
<description><![CDATA[ बांग्लादेश चुनाव 2026 में बीएनपी की प्रचंड जीत। तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। खंडाकर मोशर्रफ हुसैन और नजरुल इस्लाम खान राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 21:13:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Tarique Rahman Prime Minister 2026, Bangladesh Election Results BNP, Next President of Bangladesh candidates, BNP 209 seats, Mohammed Shahabuddin resignation</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका :</strong> बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने 13वें संसदीय चुनाव में बड़ी जीत हासिल कर सत्ता की चाभी अपने हाथ में थाम ली है। पीएम तारिक रहमान होंगे लेकिन देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा, इस पर पार्टी में चर्चा शुरू हो गई है। सोशल मीडिया और लोकल मीडिया में कई नाम उछाले जा रहे हैं।</p>
<p>बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक सूत्र का हवाला देते हुए, बांग्लादेश के जाने-माने बांग्ला अखबार प्रोथोम आलो ने बताया कि स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य खंडाकर मोशर्रफ हुसैन को राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं।</p>
<p>बीएनपी के एक और स्टैंडिंग कमेटी मेंबर, नजरुल इस्लाम खान का नाम भी चर्चा में है।</p>
<p>इसके अलावा, बांग्लादेशी न्यूज आउटलेट एखोन टीवी ने बताया कि खंडाकर मोशर्रफ हुसैन और नजरुल इस्लाम खान के साथ, बीएनपी नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और अब्दुल मोईन खान को भी संभावित राष्ट्रपति उम्मीदवार माना जा रहा है।</p>
<p>हालांकि, प्रोथोम आलो ने कई बीएनपी सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि पार्टी का झुकाव खंडाकर मोशर्रफ हुसैन की तरफ ज्यादा है।</p>
<p>अध्यक्ष तारिक रहमान के नेतृत्व में, बीएनपी ने हालिया चुनाव में 209 सीटें हासिल कीं, और नव निर्वाचित सदस्य मंगलवार को शपथ लेंगे, जिसके बाद कैबिनेट मेंबर शपथ लेंगे।</p>
<p>रिपोर्ट्स बताती हैं कि बीएनपी की मीटिंग्स में कैबिनेट बनाने को लेकर अंदरूनी चर्चा भी हो रही है। जहां कई मंत्री की नियुक्ति लगभग तय हो चुकी है, वहीं पार्टी अगले राष्ट्रपति का चुनाव करने को लेकर भी मंथन कर रही है।</p>
<p>बांग्लादेश के मौजूदा राष्ट्रपति, मोहम्मद शहाबुद्दीन, नई सरकार बनने के बाद इस्तीफा दे सकते हैं। दिसंबर 2025 में एक अंतर्राष्ट्रीय मीडिया आउटलेट को दिए इंटरव्यू में, उन्होंने पद छोड़ने का इरादा जताया था।</p>
<p>बांग्लादेश अवामी लीग ने उन्हें नॉमिनेट किया था, और 2023 में 75 साल की उम्र में, वो निर्विरोध चुने गए थे। शहाबुद्दीन का पांच साल का कार्यकाल अप्रैल 2028 तक है; हालांकि, उनकी बातों से लगता है कि तब तक उनके पद पर बने रहने की संभावना नहीं है।</p>
<p>बीएनपी, जिसे 209 सीटें मिली हैं, के लिए राष्ट्रपति का चुनाव कथित तौर पर एक औपचारिकता मात्र है। संविधान के अनुसार, संसद सदस्य वोटिंग के जरिए नए राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>हिंद महासागर में रोका गया वेनेजुएला से जुड़ा तेल टैंकर &amp;apos;वेरोनिका III&amp;apos;; ट्रंप के &amp;apos;फुल ब्लॉकेड&amp;apos; आदेश के तहत कार्रवाई</title>
<link>https://www.newstvindia.in/venezuelan-oil-tanker-veronica-iii-intercepted-in-the-indian-ocean-action-under-trump-s-full-blockade-order</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/venezuelan-oil-tanker-veronica-iii-intercepted-in-the-indian-ocean-action-under-trump-s-full-blockade-order</guid>
<description><![CDATA[ पेंटागन ने हिंद महासागर में वेनेजुएला से जुड़े टैंकर वेरोनिका III को रोका। 19 लाख बैरल तेल ले जा रहे इस जहाज पर अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन का आरोप है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 07:31:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US Navy Intercepts Oil Tanker, Veronica III Venezuela Oil, Pentagon Indo-Pacific Command, Donald Trump Oil Blockade 2026, Nicolas Maduro Capture</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वॉशिंगटन : </strong>पेंटागन ने रविवार को बताया कि अमेरिकी सेना ने हिंद महासागर में वेनेजुएला से जुड़े एक अन्य तेल टैंकर को रोका और उस पर सवार हो गई।</p>
<p>पेंटागन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान में कहा कि वेरोनिका III नामक पोत को अमेरिकी अधिकारियों ने कैरेबियन सागर से हिंद महासागर तक ट्रैक किया और फिर उसे रोककर निरीक्षण किया। बयान में कहा गया है, "रात भर में, अमेरिकी सेना ने इंडोपाकॉम के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में बिना किसी घटना के वेरोनिका III पर कार्रवाई की।"</p>
<p>अमेरिका का कहना है कि यह जहाज राष्ट्रपति के आदेश के तहत लगाए गए प्रतिबंधों से बचकर निकलने की कोशिश कर रहा था।</p>
<p>अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र किसी भी अवैध गतिविधि के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है।</p>
<p>बताया गया कि यह जहाज पनामा के झंडे वाला तेल टैंकर है और इस पर ईरान और वेनेजुएला से जुड़े तेल प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज करीब 19 लाख बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल लेकर जा रहा था और 2023 से रूस, ईरान और वेनेजुएला के तेल परिवहन से जुड़ा रहा है।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति ने दिसंबर में वेनेजुएला से जुड़े प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर “पूरी तरह का ब्लॉकेड” लगाने का आदेश दिया था।</p>
<p>पिछले सप्ताह भी अमेरिकी सेना ने एक और टैंकर को हिंद महासागर में रोककर जांच की थी।</p>
<p>अमेरिका का कहना है कि वह जमीन, हवा और समुद्र—हर जगह प्रतिबंधों को लागू करेगा।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर में वेनेजुएला में आने या जाने वाले सभी अमेरिकी प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर पूरी तरह से रोक लगाने का आदेश दिया था।</p>
<p>3 जनवरी को अमेरिका की कार्रवाई और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद से यह प्रतिबंध जारी है।</p>
<p>अमेरिकी रक्षा विभाग ने रविवार को एक पोस्ट में कहा, "अंतरराष्ट्रीय जल कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। जमीन, हवा या समुद्र से, हम आपको ढूंढ लेंगे और न्याय दिलाएंगे। रक्षा विभाग अवैध तत्वों और उनके सहयोगियों को समुद्री क्षेत्र में आने-जाने की आजादी नहीं देगा।"</p>
<p>मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म के मुताबिक, वेरोनिका III 3 जनवरी, 2026 को वेनेजुएला से निकला था, उसी दिन वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ा गया था, और इसमें लगभग 19 लाख बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल था।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>9 मौतें और हिंसा के बीच बांग्लादेश का जनादेश: अवामी लीग के बिना बीएनपी का &amp;apos;क्लीन स्वीप&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव में तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने 200 से ज्यादा सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत हासिल की है। चुनाव में हिंसा के बीच 9 लोगों की मौत की खबर। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 08:41:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Bangladesh Election Results 2026, Tarique Rahman BNP Victory, Bangladesh 13th Parliament Polls, BNP vs Jamaat results, Bangladesh Election Violence Update</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका : </strong>बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान ने कहा है कि उनकी पार्टी देश के नेशनल पार्लियामेंट चुनाव में “ऐतिहासिक जीत” हासिल करने जा रही है। स्थानीय मीडिया ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।</p>
<p>सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएनपी के वरिष्ठ संयुक्त महासचिव रूहुल कबीर रिज़वी ने एक अलग बयान में देश की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को चुनाव में बहुमत सीटें मिली हैं, जो बड़ी सफलता है।</p>
<p></p>
<p>स्थानीय मीडिया की शुरुआती मतगणना रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से मिले रुझानों में बीएनपी को आधे से ज्यादा सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं। यह चुनाव गुरुवार को कराया गया था।</p>
<p></p>
<p>हालांकि, चुनाव के दौरान कई जगहों से धांधली, मतदाताओं को पैसे देकर प्रभावित करने और हिंसा की घटनाओं की खबरें भी सामने आई हैं। बताया गया है कि बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति कई स्थानों पर खराब रही।</p>
<p></p>
<p>इसी बीच, ज़ैनल अबेदीन नामक जमात-ए-इस्लामी के एक नेता को मतदान के दौरान पैसे बांटने के आरोप में हिरासत में लिया गया। यह घटना तंगाइल जिले के मिर्जापुर उपज़िला के गोराई यूनियन के रणाशाल गांव में हुई।</p>
<p></p>
<p>उपज़िला के सहायक आयुक्त (भूमि) और मोबाइल कोर्ट के मजिस्ट्रेट तारेक अज़ीज़ ने इस घटना की पुष्टि की। उन्होंने आरोपी पर 3,000 बांग्लादेशी टका का जुर्माना लगाया।</p>
<p></p>
<p>इसके अलावा, देश के कई मतदान केंद्रों पर हिंसा भड़कने की भी खबर है। मतदान के दौरान एक राजनीतिक नेता की मौत होने की जानकारी सामने आई है।</p>
<p></p>
<p>सुबह मतदान शुरू होते ही कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई। इन घटनाओं से यह संकेत मिलता है कि बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Bangladesh Election 2026: डॉ. यूनुस ने अतीत के &amp;apos;बुरे सपने&amp;apos; को पीछे छोड़ने का किया आह्वान</title>
<link>https://www.newstvindia.in/bangladesh-election-2026-dr-yunus-calls-for-leaving-behind-the-nightmare-of-the-past</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार डॉ. मुहम्मद यूनुस ने 13वें संसदीय चुनाव में मतदान किया। जानें चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों ने वोटिंग को लेकर क्या बड़े बयान दिए। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:59:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Bangladesh Parliamentary Elections 2026, Dr Muhammad Yunus Vote, Dhaka 13th Election News, Sharif Usman Haadi Case, Bangladesh Interim Government News, Election Commission Bangladesh</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका : </strong>बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद यूनुस ने गुरुवार को करीब 10:20 बजे ढाका के गुलशन मॉडल हाई स्कूल एंड कॉलेज में 13वें संसदीय चुनाव में वोट डाला। वोट डालने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान यूनुस ने कहा कि ये चुनाव नए बांग्लादेश का जन्मदिन है।</p>
<p>मुख्य सलाहकार यूनुस ने इस दिन को बहुत खुशी वाला दिन बताया और कहा कि देश ने बुरे सपने जैसे अतीत को पूरी तरह से त्याग दिया है और नागरिकों से संसदीय चुनाव और रेफरेंडम दोनों में हिस्सा लेने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने देश को ईद की बधाई भी दी।</p>
<p>चीफ इलेक्शन कमिश्नर एएमएम नासिर उद्दीन ने ढाका में वोट डालने के बाद चल रही वोटिंग प्रक्रिया को लेकर उम्मीद जताई। उन्होंने मीडिया से कहा, “हम देश को त्योहार के मूड में चुनाव का तोहफा देना चाहते थे। बांग्लादेश लोकतंत्र की ट्रेन में सवार हो गया है और जल्द ही अपनी मंजिल तक पहुंच जाएगा।” उन्होंने वोटिंग की तुलना ईद पर घर जा रहे लोगों से की।</p>
<p>नासिर उद्दीन ने कहा कि उन्होंने हाल के दिनों में दर्जनों अंतरराष्ट्रीय चुनाव ऑब्जर्वर और वॉचडॉग समूहों से मुलाकात की है। वे चुनाव आयोग के इंतजामों से बहुत खुश हैं।</p>
<p>जमात के साथ गठबंधन के उम्मीदवार और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के चीफ सहायक नसीरुद्दीन पटवारी ने गुरुवार को ढाका-8 चुनाव क्षेत्र में वोटिंग के माहौल पर खुशी जताई, लेकिन उन्होंने पिछली रात उनके समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया। उन्होंने आरामबाग हाई स्कूल और कॉलेज पोलिंग सेंटर का दौरा करने के बाद रिपोर्टरों से बात करते हुए कहा कि स्थिति शांतिपूर्ण रही।</p>
<p>उन्होंने कहा, "अभी तक वोटिंग का माहौल अच्छा है। सुबह से कोई अनहोनी नहीं हुई है।" अपनी चुनावी संभावनाओं के बारे में उम्मीद जताते हुए नसीरुद्दीन ने कहा, "इस चुनाव क्षेत्र में मेरी जीत का मतलब उस्मान हादी की जीत होगी। लोगों ने मुझे बताया है कि वे मेरे जरिए हादी को वोट दे रहे हैं।"</p>
<p>चुनाव की तारीख के ऐलान के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक हत्या के कई मामले सामने आए। हादी की हत्या उनमें से एक मामला है। दिसंबर 2025 में कट्टरपंथी समूह इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी को दिनदहाड़े दो बाइक सवार लोगों ने गोली मार दी थी।</p>
<p>हादी को गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में उन्हें सिंगापुर भी भेजा गया। हालांकि, इलाज के दौरान ही उनकी मौत हो गई। हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में जगह-जगह पर आगजनी और भारी हिंसा देखने को मिली थी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>व्हाइट हाउस का बड़ा बयान: जेफ्री एपस्टीन से ट्रंप के संबंधों पर लेविट ने दी सफाई— &amp;quot;सालों पहले खत्म हो चुका था नाता</title>
<link>https://www.newstvindia.in/big-white-house-statement-levitt-on-trump-s-relationship-with-jeffrey-epstein-ended-years-ago</link>
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<description><![CDATA[ व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने डोनाल्ड ट्रंप और जेफ्री एपस्टीन के पुराने संबंधों पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। हॉवर्ड लटनिक को प्रशासन का समर्थन। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 10:29:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Jeffrey Epstein Files, Donald Trump Epstein Relationship, Karoline Leavitt White House, Howard Lutnick, Ghislaine Maxwell Pardon</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन :</strong> व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जेफ्री एपस्टीन से पुराने संबंधों को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब दिया है। साथ ही प्रशासन ने कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लटनिक के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया है।</p>
<p>व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप ने बहुत पहले ही एपस्टीन से दूरी बना ली थी।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति हमेशा अपने बयान पर कायम रहे हैं। उन्होंने जेफ्री एपस्टीन को अपने मार-ए-लागो क्लब से बाहर निकाल दिया था, क्योंकि सच कहें तो एपस्टीन का व्यवहार ठीक नहीं था।"</p>
<p></p>
<p>लेविट ने यह भी कहा कि ट्रंप ने कई साल पहले ही एपस्टीन से अपने संबंध पूरी तरह खत्म कर लिए थे और इस बारे में वह लंबे समय से खुलकर और साफ तरीके से बात करते रहे हैं।</p>
<p></p>
<p>हाल ही में कुछ नए दस्तावेज सामने आए हैं, जिनमें 2000 के शुरुआती वर्षों में ट्रंप और पाम बीच के पुलिस प्रमुख के बीच हुई एक कथित बातचीत का जिक्र है। इस पर लेविट ने कहा कि यह एक फोन कॉल थी, जो हो भी सकती है और नहीं भी। उन्हें इसकी पक्की जानकारी नहीं है। उन्होंने दोहराया कि ट्रंप ने एपस्टीन को अपने क्लब से निकाल दिया था और यह बात आज भी सही है।</p>
<p></p>
<p>लेविट ने एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के सार्वजनिक होने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एपस्टीन और उसके गंभीर अपराधों से जुड़े 30 लाख से ज्यादा दस्तावेज जारी किए गए हैं। इससे यह दिखता है कि राष्ट्रपति और उनका प्रशासन पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और सच्चाई सामने लाना चाहता है।</p>
<p></p>
<p>जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप घिसलेन मैक्सवेल को माफी देने पर विचार करेंगे, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई विचार नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछली बार जब इस बारे में बात हुई थी, तब भी ट्रंप ने कहा था कि वह इस पर विचार नहीं कर रहे हैं।</p>
<p></p>
<p>वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक से भी सवाल पूछे गए थे, क्योंकि उन्होंने कैपिटल हिल में गवाही के दौरान एपस्टीन से अपने पुराने संपर्क को स्वीकार किया था। इस पर लेविट ने कहा कि लटनिक राष्ट्रपति की टीम के बहुत महत्वपूर्ण सदस्य हैं और राष्ट्रपति उनका पूरा समर्थन करते हैं।</p>
<p></p>
<p>इसके बाद लेविट ने सरकार की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को डॉव इंडेक्स पहली बार 50 हजार के स्तर को पार कर गया। उन्होंने माइग्रेंट्स के लिए एडमिनिस्ट्रेशन की डिटेंशन पॉलिसी को सही ठहराने वाले एक फेडरल अपील कोर्ट के फैसले का भी ज़िक्र किया और कहा, “लगातार नौवें महीने, दक्षिणी बॉर्डर पर कोई भी गैर-कानूनी बॉर्डर क्रॉसिंग नहीं हुई।”</p>
<p></p>
<p>जेफ्री एपस्टीन एक वित्तीय कारोबारी था, जिस पर सेक्स ट्रैफिकिंग से जुड़े आरोप लगे थे। साल 2019 में संघीय हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। बाद में घिसलेन मैक्सवेल को भी यौन तस्करी से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया। एपस्टीन का मामला इसलिए भी चर्चा में रहा, क्योंकि उसके संपर्क में कई प्रमुख और प्रभावशाली लोग रहे थे।</p>
<p></p>
<p>प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजों को जारी करना उनकी पारदर्शिता की नीति का हिस्सा है। वहीं आलोचक अब भी यह जानना चाहते हैं कि जिन लोगों के नाम इन दस्तावेजों में हैं, उनके साथ हुए पुराने संपर्क और फैसलों के बारे में पूरी स्पष्टता दी जाए।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>PM मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री के बीच फोन पर चर्चा; अगले हफ्ते भारत आएंगे रामगुलाम, &amp;apos;AI इम्पैक्ट समिट&amp;apos; में होंगे शामिल</title>
<link>https://www.newstvindia.in/phone-conversation-between-pm-modi-and-pm-of-mauritius-ramgoolam-to-visit-india-next-week-to-attend-ai-impact-summit</link>
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<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री मोदी और मॉरीशस के पीएम डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने फोन पर सहयोग की समीक्षा की। डॉ. रामगुलाम दिल्ली में आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 21:51:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>India AI Impact Summit 2026, PM Modi Mauritius PM call, Global AI Summit Delhi, India Mauritius Relations, एआई इम्पैक्ट समिट</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मेरे मित्र, प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम का फोन पाकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। हमने पिछले वर्ष वाराणसी में हुई हमारी यादगार मुलाकात के बाद से भारत और मॉरीशस के बीच व्यापक सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। हमने अपने दोनों देशों को जोड़ने वाले विशेष, ऐतिहासिक और जन-केंद्रित संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr">Happy to receive a phone call from my friend, Prime Minister Dr. Navinchandra Ramgoolam. We reviewed progress in the wide-ranging cooperation between India and Mauritius since our memorable meeting in Varanasi last year. Reaffirmed our commitment to further strengthen the…</p>
— Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/2020875631865872435?ref_src=twsrc%5Etfw">February 9, 2026</a></blockquote>
<script async="" src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
<p>उन्होंने कहा कि भारत और मॉरीशस हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता के साझा उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे। मैं अगले सप्ताह एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं। माना जा रहा है कि मॉरीशस के प्रधानमंत्री इस महीने दिल्ली में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट में भाग ले सकते हैं।</p>
<p>बता दें कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अब तक 35,000 से अधिक पंजीकरण हुए हैं। इसमें 100 से अधिक देशों के 500 से अधिक स्टार्टअप्‍स 500 सत्रों में हिस्सा लेंगे। यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय की ओर से सोमवार को दी गई।</p>
<p>मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट, जो 16-20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में होने वाला है। यह अब तक आयोजित चार ग्लोबल एआई समिट में सबसे बड़ा होने की उम्मीद है, जो जिम्मेदार, समावेशी और प्रभाव-संचालित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आसपास बढ़ती अंतरराष्ट्रीय गति को दर्शाता है।</p>
<p>बयान में आगे कहा गया कि इस सम्‍मेलन ने विश्‍व भर के देशों से 35,000 से अधिक पंजीकरण के साथ अभूतपूर्व रुचि आकर्षित की है। इसमें विजन को अमल में लाने को प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें जमीनी स्तर पर महत्‍व रखने वाले परिणामों पर स्पष्ट ध्यान दिया जाएगा।</p>
<p>सरकारें, उद्योगपति, शोधकर्ता, सिविल सोसाइटी संगठन और अंतर्राष्ट्रीय संस्थान समिट के एजेंडा को आकार देने में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसमें 100 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद है, जिनमें 15 से 20 राष्ट्राध्यक्ष, विभिन्न देशों के 50 से अधिक मंत्री और विश्‍व भर की तथा भारतीय कंपनियों के 40 से अधिक सीईओ शामिल हैं। ग्लोबल एआई इकोसिस्टम के लगभग 500 प्रमुख व्‍यक्तियों, जिनमें नवोन्‍मेषक, शोधकर्ता और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी शामिल हैं, के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>संबंधों में सुधार की नई उम्मीद: कनाडा में NSA डोवाल की हाई&#45;प्रोफाइल मीटिंग, सुरक्षा को लेकर बनी सहमति</title>
<link>https://www.newstvindia.in/new-hope-for-improving-relationships-nsa-doval-s-high-profile-meeting-in-canada-consensus-on-security</link>
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<description><![CDATA[ NSA अजीत डोवाल ने ओटावा में कनाडा की सुरक्षा सलाहकार नताली जी. ड्रौइन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की। दोनों देशों ने साइबर सुरक्षा और अपराध नियंत्रण पर साझा कार्य योजना बनाई है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 07:30:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Ajit Doval Canada Visit, India Canada Security Dialogue, Natalie Drouin, Organized Crime Cooperation, भारत-कनाडा सुरक्षा संबंध</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ओटावा : </strong>भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने कनाडा के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए इस सप्ताह ओटावा में उच्च स्तरीय वार्ता की। यह वार्ता दोनों देशों के संबंधों को फिर से मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।</p>
<p>शनिवार को डोवाल ने कनाडा के प्रधानमंत्री की उप सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नताली जी. ड्रौइन से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह बैठक दोनों देशों के बीच नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता का हिस्सा थी।</p>
<p>दोनों पक्षों ने अपने राष्ट्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मामलों पर भविष्य के सहयोग को निर्देशित करने के लिए एक साझा कार्य योजना पर सहमति व्यक्त की। इस कदम से साझा प्राथमिकताओं पर अधिक व्यावहारिक संयुक्त प्रयासों का मार्ग प्रशस्त हुआ।</p>
<p>चर्चाओं का एक अहम निर्णय दोनों देशों में सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रतिबद्धता थी। इस कदम का उद्देश्य संचार चैनलों को बेहतर बनाना और नशीली दवाओं की अवैध तस्करी, विशेष रूप से फेंटानिल प्रीकर्सर और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क की गतिविधियों सहित साझा खतरों पर जानकारी का तेजी से आदान-प्रदान करना है।</p>
<p>दोनों अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा में सहयोग को औपचारिक रूप देने का भी संकल्प लिया, जिसमें नीतिगत समन्वय और साइबर खतरों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है। उन्होंने प्रत्येक देश के घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का सम्मान करते हुए, धोखाधड़ी की रोकथाम और आव्रजन प्रवर्तन से संबंधित संयुक्त कार्यों पर बातचीत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।</p>
<p>इस यात्रा से संबंधों में अतीत में आए तनाव के बावजूद व्यावहारिक सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने में दोनों देशों की आपसी रुचि स्पष्ट हुई।</p>
<p>दो दिवसीय यात्रा के अंतर्गत, डोवाल ने शुक्रवार (6 फरवरी) को कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री से भी मुलाकात की। ये मुलाकातें भारत-कनाडा सुरक्षा संबंधों में सकारात्मक गति का संकेत देती हैं, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध जैसी सीमा पार चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।</p>
<p>दोनों पक्षों के अधिकारियों ने इन मुलाकातों को दोनों देशों में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्वास बढ़ाने और प्रभावी सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;अमेरिका वार्ता के बीच वॉशिंगटन जाएंगे नेतन्याहू: राष्ट्रपति ट्रंप से करेंगे अहम मुलाकात</title>
<link>https://www.newstvindia.in/netanyahu-to-travel-to-washington-amid-iran-us-talks-key-meeting-with-president-trump</link>
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<description><![CDATA[ क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक हलचलों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बुधवार को वॉशिंगटन का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरान और अमेरिका के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहन चर्चा करेंगे। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 08 Feb 2026 08:53:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Netanyahu Washington Visit, Trump Iran Talks, Israel Iran Conflict 2026, Ballistic Missile Sanctions, Oman Indirect Talks, US Middle East Policy</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>यरुशलम : </strong>इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस की तरफ से जारी किए गए एक बयान में बताया गया कि वह बुधवार को वॉशिंगटन जाएंगे। वहां वह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर चर्चा करेंगे।</p>
<p>नेतन्याहू के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि दोनों नेता ईरान के साथ चल रही बातचीत पर चर्चा करेंगे। बयान में यह भी कहा गया कि नेतन्याहू का मानना है कि बातचीत में बैलिस्टिक मिसाइलों पर रोक और ईरान द्वारा अपने सहयोगी गुटों को दिया जा रहा समर्थन खत्म करने की शर्त जरूर शामिल होनी चाहिए।</p>
<p>यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब शुक्रवार को ओमान में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच परोक्ष (अप्रत्यक्ष) बातचीत हुई। ट्रंप ने इन बातचीतों को बहुत अच्छी बातचीत बताया और कहा कि ईरान समझौता करने के लिए इच्छुक दिख रहा है।</p>
<p>सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, यह दोनों देशों के बीच बातचीत का पहला दौर था, जो पिछले साल जून में इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हुआ। उस हमले के बाद 12 दिनों तक युद्ध चला, जिसके दौरान अमेरिका ने ईरान के अहम परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी।</p>
<p>ट्रंप और नेतन्याहू की आखिरी मुलाकात दिसंबर में हुई थी। व्हाइट हाउस की ओर से इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।</p>
<p>अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को ओमान में हुई इस अप्रत्यक्ष बातचीत से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा फिर से शुरुआती स्तर पर लौट आई है।</p>
<p>ट्रंप ने बातचीत को बहुत अच्छी” बताया और कहा कि अगले हफ्ते की शुरुआत में आगे की बातचीत होने की योजना है।</p>
<p>ट्रंप ने पहले भी कई बार धमकी दी है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करता तो अमेरिका बल प्रयोग कर सकता है। इसी बीच, ईरान में देशभर में हुए प्रदर्शनों पर सख्ती के दौरान हजारों लोगों की मौत के बाद, अमेरिका ने यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और अन्य युद्धपोत भी उस क्षेत्र में भेजे थे।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>रूस ने ट्रंप के दावे को किया खारिज, कहा– भारत रूसी तेल खरीदने को लेकर पूरी तरह स्वतंत्र</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को रूस ने नकार दिया है, जिसमें कहा गया था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। क्रेमलिन ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है और रूसी तेल आपूर्ति पर कोई रोक नहीं है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:23:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>India Russia oil trade, Donald Trump statement, Russian oil to India, Kremlin response, India energy policy, India US trade deal, Russia India relations, crude oil imports India, global energy market, Russia Ukraine sanctions</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<ul></ul>
<p><strong>मॉस्को : </strong>हाल ही में भारत और रूस के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालांकि, रूस ने इस दावे को खारिज कर दिया है। रूस ने कहा कि भारत किसी भी सप्लायर से क्रूड खरीदने के लिए आजाद है और एनर्जी सोर्सिंग पर उसके फैसलों में कुछ भी अजीब नहीं है।</p>
<p>क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि भारत पहले से कई देशों से तेल खरीदता रहा है और रूस उसका अकेला क्रूड सप्लायर नहीं है। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि भारत ने व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा किया है।</p>
<p>पेसकोव ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "हम, बाकी सभी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों के साथ, अच्छी तरह जानते हैं कि रूस भारत को तेल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का अकेला सप्लायर नहीं है। भारत ने हमेशा ये प्रोडक्ट्स दूसरे देशों से खरीदे हैं। इसलिए, हमें यहां कुछ भी नया नहीं दिख रहा है।"</p>
<p>पेसकोव ने यह भी बताया कि रूस को भारत से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है जिससे पता चले कि वह रूसी तेल खरीदना बंद करने की योजना बना रहा है।</p>
<p>बता दें, भारत का रूस से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद होने को लेकर चर्चा ट्रंप के बयान के बाद शुरू हुई है। ट्रंप ने समझौते को लेकर यह भी दावा किया कि भारत एक बड़े व्यापार समझौते के तहत भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ में कमी के बदले में रूसी तेल की खरीद बंद करने पर सहमत हो गया है। इससे ड्यूटी घटकर 18 फीसदी हो जाएगी।</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय ने भारत के साथ हाइड्रोकार्बन व्यापार के आपसी फायदों पर जोर देते हुए कहा कि तेल सप्लाई में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और इससे अंतरराष्ट्रीय एनर्जी मार्केट में स्थिरता आती है।</p>
<p>विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि रूस भारत के साथ करीबी ऊर्जा सहयोग जारी रखने के लिए तैयार है। भारतीय रिफाइनर क्रूड ग्रेड और ब्लेंडिंग जरूरतों में अंतर के कारण रूसी क्रूड का आयात बंद नहीं कर सकते हैं, और अमेरिका ऑयल जैसे दूसरे संसाधनों के रूसी सोर्स से सप्लाई किए गए वॉल्यूम को तुरंत कवर नहीं कर सकते हैं।</p>
<p>बता दें, रूस ने यूक्रेन पर हमला किया, जिसके बाद 2022 में पश्चिमी देशों ने उसके ऊपर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद ही भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक रहा है और 2025 में भारत के कुल क्रूड आयात में रूसी क्रूड का हिस्सा लगभग एक-तिहाई था। हालांकि, ग्लोबल एनर्जी मार्केट और ट्रेड बातचीत में बदलाव के बीच हाल के महीनों में रूस से भारतीय आयात में कमी आई है।</p>
<p>पेसकोव ने दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति एक स्वतंत्र फैसला है और भारत के साथ रूस की रणनीतिक साझेदारी जरूरी बनी हुई है, जिससे पता चलता है कि तेल खरीदने में कोई भी बदलाव बाहरी दबाव के बजाय भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कमर्शियल बातों से निर्देशित होगा।</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>न्यू स्टार्ट समझौता खत्म: रूस बोला– अब अमेरिका पर कोई बाध्यता नहीं, अगले कदम खुद तय करेंगे</title>
<link>https://www.newstvindia.in/new-start-agreement-ends-russia-says-no-longer-binding-on-us-will-decide-next-steps-on-its-own</link>
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<description><![CDATA[ रूस के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी यानी न्यू स्टार्ट समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद अब रूस और अमेरिका, दोनों पर इस समझौते से जुड़ी कोई कानूनी बाध्यता नहीं रह गई है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 05 Feb 2026 08:32:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Russia US Relations, New START Treaty, Nuclear Arms Control, Vladimir Putin, Donald Trump, Global Security, Russia Foreign Ministry, Nuclear Weapons Agreement</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मॉस्को : </strong>रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब रूस और अमेरिका के बीच हुए न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी यानी न्यू स्टार्ट समझौते से जुड़ी कोई बाध्यता दोनों देशों पर नहीं रह गई है। मंत्रालय का मानना है कि समझौते की अवधि खत्म होने के बाद अब दोनों पक्ष इसके नियमों को मानने के लिए मजबूर नहीं हैं।</p>
<p>रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि परमाणु हथियारों की तय सीमा को समझौते की समाप्ति के बाद भी स्वेच्छा से बनाए रखने के रूस के प्रस्ताव पर अमेरिका की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक और साफ जवाब नहीं मिला है। यह समझौता 5 फरवरी को खत्म हो चुका है।</p>
<p></p>
<p>मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात में रूस यह मानता है कि न्यू स्टार्ट समझौते से जुड़े सभी पक्ष अब इस समझौते की शर्तों और आपसी घोषणाओं से मुक्त हो चुके हैं। इसमें समझौते के मुख्य नियम भी शामिल हैं। अब दोनों देश अपने अगले कदम खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं।</p>
<p></p>
<p>रूस ने यह भी कहा कि यदि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी नए खतरे का सामना करना पड़ा, तो वह उससे निपटने के लिए कड़े सैन्य और तकनीकी कदम उठाने के लिए तैयार है। समाचार एंजेसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि अगर सही हालात बनते हैं, तो रूस रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत के लिए भी तैयार है।</p>
<p></p>
<p>न्यू स्टार्ट समझौता रूस और अमेरिका के बीच वर्ष 2010 में हुआ था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले साधनों की संख्या को सीमित करना था। यह समझौता 5 फरवरी 2011 से लागू हुआ था। पहले इसकी अवधि 10 साल की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 5 फरवरी 2026 तक कर दिया गया।</p>
<p></p>
<p>रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में कहा था कि अगर अमेरिका ऐसे कदम नहीं उठाता जिससे रणनीतिक संतुलन बिगड़े, तो रूस समझौते की मूल सीमाओं का पालन समाप्ति के बाद भी एक साल तक करता रहेगा।</p>
<p></p>
<p>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में कहा था कि उन्हें इस समझौते के खत्म होने की ज्यादा चिंता नहीं है और उन्हें उम्मीद है कि दोनों देश किसी नए समझौते पर पहुंच सकते हैं।</p>
<p></p>
<p>गौरतलब है कि न्यू स्टार्ट समझौता ही अब रूस और अमेरिका के बीच हथियार नियंत्रण से जुड़ा आखिरी बड़ा समझौता बचा है। इससे पहले अमेरिका वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज ट्रीटी से बाहर निकल चुका है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नेपाल के ल्हासा कौंसुलर लक्ष्मी प्रसाद निरोला ने शीत्सांग ‘दो सत्रों’ में भाग लिया: चीन की सफलताओं की सराहना, नेपाल&#45;चीन संबंधों पर जोर</title>
<link>https://www.newstvindia.in/nepal-s-lhasa-consul-lakshmi-prasad-nirola-participates-in-shitsang-two-sessions-appreciating-china-s-successes-emphasis-on-nepal-china-relations</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/nepal-s-lhasa-consul-lakshmi-prasad-nirola-participates-in-shitsang-two-sessions-appreciating-china-s-successes-emphasis-on-nepal-china-relations</guid>
<description><![CDATA[ नेपाल के ल्हासा कौंसुलर लक्ष्मी प्रसाद निरोला ने शीत्सांग (तिब्बत) के ‘दो सत्रों’ के उद्घाटन में भाग लिया। गरीबी उन्मूलन, सांस्कृतिक संरक्षण और जातीय एकता में चीन की सफलता की सराहना। नेपाल-चीन के हिमालयी संबंध, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और बेल्ट एंड रोड पहल के तहत बढ़ते सहयोग पर जोर। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 21:05:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Lakshmi Prasad Nirola Tibet Two Sessions, Nepal Consul Lhasa Tibet 2026, Tibet Two Sessions 2026 Nepal, China Tibet achievements poverty alleviation, Nepal China BRI cooperation, हिमालय नेपाल चीन संबंध, शीत्सांग दो सत्र 2026, लक्ष्मी प्रसाद निरोला</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>बीजिंग : </strong>हाल ही में चीन के शीत्सांग की 12वीं जन प्रतिनिधि सभा का चौथा पूर्णाधिवेशन और 12वीं जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन का चौथा पूर्णाधिवेशन आयोजित हुआ। ल्हासा स्थित नेपाल के कौंसुलर लक्ष्मी प्रसाद निरोला को "दो सत्रों" के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।</p>
<p></p>
<p>लक्ष्मी प्रसाद निरोला ने शीत्सांग के दो सत्रों के उद्घाटन समारोह में दूसरी बार भाग लिया और उन्होंने दो सत्रों के सफल आयोजन पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि शीत्सांग में जन प्रतिनिधि सभा और जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन यानी "दो सत्र" लोकतांत्रिक परामर्श और वैज्ञानिक निर्णय लेने के महत्वपूर्ण मंच हैं, जो शीत्सांग की जनता की सामूहिक इच्छा को दर्शाते हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में, शीत्सांग ने बुनियादी संस्थापनों के निर्माण, गरीबी उन्मूलन, सांस्कृतिक संरक्षण और जातीय एकता में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। ये उपलब्धियां नेपाल के लिए सीखने और अनुकरण करने योग्य हैं।</p>
<p></p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि विशाल हिमालय पर्वतमाला नेपाल और चीन को आपस में जोड़ती है। दोनों देश शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में हैं, एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और आपसी लाभ वाले सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जो अच्छे पड़ोसी संबंधों और मित्रता का एक आदर्श उदाहरण है। नेपाल और शीत्सांग भौगोलिक निकटता और सांस्कृतिक समानताओं को साझा करते हैं, और इनके बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान का एक लंबा इतिहास रहा है। हाल के वर्षों में, बेल्ट एंड रोड पहल के तहत, नेपाल और शीत्सांग के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग तथा संपर्क लगातार मजबूत हुआ है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया ने झुकाया सिर! अमेरिका, रूस और भूटान के नेताओं ने दी बधाई; &amp;apos;क्वाड&amp;apos; से लेकर &amp;apos;स्थायी दोस्ती&amp;apos; तक का किया जिक्र</title>
<link>https://www.newstvindia.in/the-world-bowed-its-head-on-india-s-77th-republic-day-leaders-of-us-russia-and-bhutan-congratulate-mention-quad-to-permanent-friendship</link>
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<description><![CDATA[ 77वें गणतंत्र दिवस पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, भूटान के पीएम त्शेरिंग तोबगे और रूस के दूतावास ने भारत को शुभकामनाएं दीं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका और इसकी सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक स्तर पर सराहा गया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:55:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Marco Rubio Republic Day 2026 wishes for India, US-India strategic partnership Indo-Pacific, Bhutan PM Tshering Tobgay Republic Day message, Russian Embassy multilingual wishes for India 77th Republic Day, Australia-India Dosti and Republic Day 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन : </strong>भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर अमेरिका ने भारत को बधाई दी और दोनों देशों के बीच गहरे और मजबूत रिश्तों का जिक्र किया। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका और भारत के बीच एक ऐतिहासिक और मजबूत बंधन है, जो समय के साथ और अधिक व्यापक और प्रभावशाली हुआ है।</p>
<p>रुबियो ने अपने संदेश में कहा, "संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों की ओर से, मैं भारत के लोगों को आपके गणतंत्र दिवस पर दिल से बधाई देता हूं।" उन्होंने बताया कि अमेरिका और भारत की साझेदारी न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की शांति और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी अहम भूमिका निभा रही है।</p>
<p>अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और उभरती हुई तकनीकों जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही क्वाड मंच के तहत भी भारत और अमेरिका की सक्रिय भागीदारी क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत बना रही है।</p>
<p>रुबियो ने यह भी कहा कि अमेरिका-भारत संबंध दोनों देशों और पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए ठोस और सकारात्मक परिणाम ला रहे हैं। उन्होंने भविष्य की ओर देखते हुए कहा, "मैं आने वाले वर्ष में अपने साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हूं।"</p>
<p>पिछले दो दशकों में अमेरिका और भारत के रिश्ते रक्षा, व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच आपसी संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़े हैं। आज यह साझेदारी इंडो-पैसिफिक ढांचे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, जहां दोनों देश अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर स्थिरता, आर्थिक विकास और नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं।</p>
<p>इस बीच, भूटान के पीएम त्शेरिंग तोबगे ने संदेश जारी कर भारत को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। और लिखा, "मैं इस खुशी के गणतंत्र दिवस पर भारत सरकार और लोगों को गर्मजोशी भरी और दिल से शुभकामनाएं देने में भूटान के लोगों के साथ शामिल हूं। यह अवसर देश की समृद्ध यात्रा और उस भावना का सम्मान करता है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है, साथ ही यह हमारे दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों और गहरे संबंधों को भी दर्शाता है। जैसे ही हम इस सार्थक रास्ते पर पीछे मुड़कर देखते हैं, हमें भूटान और भारत के बीच स्थायी दोस्ती की याद आती है, और मुझे उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में हमारी साझेदारी और साझा आकांक्षाएं और मजबूत होती रहेंगी। भारत में हमारे प्यारे दोस्तों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।"</p>
<p>रूस के दूतावास ने भी भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं दीं, जिससे भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय सद्भाव और मित्रता का संदेश मजबूत बताया।</p>
<p>रूस के दूतावास ने अलग-अलग भाषाओं में 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। रूस के दूतावास ने कहा, "भारत एक ऐसी जगह है जहां पुरानी समझ और भविष्य के सपने साथ-साथ चलते हैं। भारत ने दुनिया को दिखाया है कि विविधता कोई कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत है। भारत का गणतंत्र हर इंसान की गरिमा में विश्वास पर आधारित है।" रूसी दूतावास की ओर भारत की विभिन्न भाषाओं में ये शुभकामनाएं दी गई।</p>
<p>ऐसे ही पंजाबी भाषा में कहा, "भारतीय लोकतंत्र सिर्फ कानूनों की एक प्रणाली नहीं है, बल्कि सम्मान का एक गहरा दर्शन है।" तमिल भाषा में शुभकामनाएं देते हुए कहा, "आपके लोग भविष्य बनाते हुए अपनी विरासत को बचाकर रखते हैं।"</p>
<p>बांग्लादेश के दूतावास ने भी भारत को 77 वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी।</p>
<p>वहीं, ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "26 जनवरी ऑस्ट्रेलिया और भारतीयों द्वारा मनाया जाने वाला एक खास दिन है। गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और ऑस्ट्रेलिया-भारत की मजबूत दोस्ती के एक और साल के लिए भी शुभकामनाएं।"</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Gaza Peace Plan: &amp;apos;न्यू गाजा&amp;apos; की तैयारी! ट्रंप के दूत कुशनर और विटकॉफ पहुंचे इजरायल; नेतन्याहू के साथ समुद्र किनारे रिसॉर्ट और सीजफायर पर होगी बड़ी डील</title>
<link>https://www.newstvindia.in/preparing-for-new-gaza-trump-envoys-kushner-and-witkoff-arrive-in-israel-big-deal-with-netanyahu-at-seaside-resort-and-ceasefire</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/preparing-for-new-gaza-trump-envoys-kushner-and-witkoff-arrive-in-israel-big-deal-with-netanyahu-at-seaside-resort-and-ceasefire</guid>
<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मिलने पहुंचे हैं। चर्चा का मुख्य केंद्र &#039;न्यू गाजा&#039; प्लान, राफा क्रॉसिंग को खोलना और बंधकों के अवशेषों की वापसी है। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 22:43:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Jared Kushner Steve Witkoff Israel visit, Donald Trump New Gaza redevelopment plan, Benjamin Netanyahu Gaza ceasefire talks, Rafah crossing reopening latest updates, Israel-Hamas hostage remains negotiation</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। इजरायल वॉर रूम की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राजदूत इजरायल पहुंच गए हैं। वे मुख्य रूप से गाजा पर चर्चा करने के लिए यहां आ रहे हैं।</p>
<p>इजरायली वॉर रूम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा, "सीनियर राजदूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मीटिंग के लिए इजरायल पहुंच गए हैं। इसके अलावा, सीईएनटीसीओएम कमांडर एडमिरल ब्रैडली कूपर के इजरायल की सिक्योरिटी लीडरशिप में सीनियर लोगों से मिलने की उम्मीद है।"</p>
<p>अमेरिका ने गुरुवार को इजरायल-हमास सीजफायर के तहत एक 'न्यू गाजा' के लिए प्लान की घोषणा की थी। इसमें रेजिडेंशियल टावर, डेटा सेंटर और समुद्र किनारे रिसॉर्ट शामिल होंगे। इजरायली मीडिया ने शुक्रवार को बताया कि कुशनर और विटकॉफ नेतन्याहू के साथ गाजा में बचे आखिरी बंधक रान ग्विली के अवशेषों की वापसी के लिए चल रही कोशिशों पर भी चर्चा करेंगे।</p>
<p>बता दें कि इजरायल के लोग सरकार से लगातार मांग कर रहे हैं कि जब तक रान ग्विली के अवशेषों को वापस नहीं लाया जाता है, तब तक सीजफायर के दूसरे चरण में आगे नहीं बढ़ना है। परिवार ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस हफ्ते दावोस में कहा कि हमें हैरानी है कि दबाव गलत जगह पर क्यों डाला जा रहा है। इजरायली सरकार पर समझौते के अपने हिस्से को पूरा करने का दबाव नहीं होना चाहिए, जबकि हमास पूरी दुनिया को धोखा दे रहा है और अपने हस्ताक्षर किए गए समझौते के अनुसार आखिरी किडनैप हुए व्यक्ति को लौटाने से इनकार कर रहा है।”</p>
<p>एक अमेरिकी अधिकारी और अरब राजनयिक ने शुक्रवार को द टाइम्स ऑफ इजरायल को बताया कि राफा क्रॉसिंग को फिर से खोलना इजरायल पर थोपा गया फैसला है। अरब राजनयिक ने कहा कि गाजा सीजफायर की मध्यस्थता कर रहे यूएस, मिस्र, कतर और तुर्किए ने माना कि इजरायल मिस्र और गाजा के बीच बॉर्डर गेट को फिर से खोलने के लिए खुद से राजी नहीं होने वाला है।</p>
<p>अरब राजनयिक ने कहा कि उन्होंने इस हफ्ते स्विट्जरलैंड के दावोस में बोर्ड ऑफ पीस के लिए साइनिंग सेरेमनी के दौरान राफा को फिर से खोलने की घोषणा करने का फैसला किया।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>&amp;quot;यूएन के अकेले मालिक बनना चाहते हैं ट्रंप&amp;quot;, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने अमेरिका पर साधा निशाना; दुनिया को दी बड़ी चेतावनी</title>
<link>https://www.newstvindia.in/trump-wants-to-be-the-sole-owner-of-the-un-brazilian-president-lula-attacks-the-us-gives-a-big-warning-to-the-world</link>
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<description><![CDATA[ ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने डोनाल्ड ट्रंप पर एकतरफावाद को बढ़ावा देने और सोशल मीडिया के जरिए दुनिया पर शासन करने की कोशिश का आरोप लगाया है। उन्होंने भारत, चीन और रूस जैसे देशों के साथ मिलकर बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपील की। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 10:02:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords></media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ब्रासीलिया : </strong>ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नया संयुक्त राष्ट्र बनाना चाहते हैं और उस पर अकेले अपना नियंत्रण रखना चाहते हैं।</p>
<p>लूला ने शुक्रवार को ब्राज़ील के बाहिया प्रांत में भूमिहीन ग्रामीण मजदूर आंदोलन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने कहा कि ट्रंप ऐसा संयुक्त राष्ट्र बनाना चाहते हैं, जिसका मालिक सिर्फ वही हों। यह जानकारी समाचार एजेंसी सिन्हुआ के माध्यम से सामने आई।</p>
<p>लूला ने कहा कि दुनिया इस समय बहुत नाज़ुक राजनीतिक दौर से गुजर रही है, जिसमें बहुपक्षवाद को छोड़कर एकतरफावाद को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ताकतवर की चल रही है और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को कमजोर किया जा रहा है।</p>
<p>ब्राजील के राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में उन्होंने कई देशों के नेताओं से बातचीत तेज की है। इनमें रूस, चीन, भारत, हंगरी और मैक्सिको जैसे देश शामिल हैं। उनका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग को मजबूत करना है।</p>
<p>लूला ने कहा कि वे एक ऐसी वैश्विक बैठक की संभावना तलाश रहे हैं, जिसमें सभी देश मिलकर बहुपक्षीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराएं और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी देश की ताकत, हथियार या असहिष्णुता दुनिया पर हावी न हो।</p>
<p>इससे पहले लूला ने ट्रंप पर सोशल मीडिया के जरिए दुनिया पर शासन करने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। ब्राजील के दक्षिणी राज्य रियो ग्रांडे डो सुल के एक नगर पालिका रियो ग्रांडे में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में लूला ने कहा, "क्या आपने देखा है कि ट्रंप ट्विटर के जरिए दुनिया पर राज करना चाहते हैं?"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा, "वह हर दिन कुछ अलग कहते हैं। यह संभव नहीं है। और क्या आपको लगता है कि अगर हम लोगों की आंखों में आंखें डालकर बात न करें तो उनका सम्मान करना संभव है? उन्हें इंसान के बजाय वस्तु समझना?"</p>
<p>लूला ने दक्षिणी ब्राजील में आवास योजना के तहत 1,276 घरों के हस्तांतरण समारोह में कहा कि समाज में मानवीय मूल्यों को फिर से मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से बचने की भी अपील की और प्राथमिक व माध्यमिक कक्षाओं में मोबाइल पर रोक लगाने की अपनी नीति का समर्थन किया।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ईरान&#45;अमेरिका में आर&#45;पार! राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की ट्रंप को दोटूक: &amp;apos;खामेनेई पर हमला यानी ईरान से सीधी जंग&amp;apos;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/iran-across-the-us-president-pezeshkian-to-trump-attack-on-khamenei-means-direct-war-with-iran</link>
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<description><![CDATA[ तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव चरम पर। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने डोनाल्ड ट्रंप की &#039;नेतृत्व परिवर्तन&#039; वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए इसे पूरे राष्ट्र के खिलाफ युद्ध करार दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 19 Jan 2026 09:44:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Iran US Tension 2026, Masoud Pezeshkian Warning Trump, Ayatollah Khamenei vs Donald Trump, Iran Economic Sanctions, Tehran Washington Relations News</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><span><strong>तेहरान :</strong> </span>ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक कड़वाहट अब सीधे टकराव की ओर बढ़ती दिख रही है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई को निशाना बनाया गया, तो इसे पूरे ईरानी राष्ट्र के विरुद्ध 'खुला युद्ध' (Full-scale War) माना जाएगा।</p>
<h4><span>ट्रंप के 'नेतृत्व परिवर्तन' वाले बयान पर पलटवार</span></h4>
<p><span>यह तीखी प्रतिक्रिया ट्रंप के उस हालिया इंटरव्यू के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान में 'नए नेतृत्व' की आवश्यकता पर जोर दिया था। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म </span><span>X</span><span> पर स्पष्ट किया, "हमारे महान नेता पर कोई भी हमला ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध के समान होगा।" उन्होंने ट्रंप की टिप्पणी को संप्रभुता का उल्लंघन करार दिया।</span></p>
<h4><span>आर्थिक संकट और 'अमानवीय' प्रतिबंध</span></h4>
<p><span>पेज़ेशकियन ने ईरान की वर्तमान आर्थिक बदहाली के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा लगाए गए </span><span>अमानवीय प्रतिबंधों</span><span> के कारण ईरानी जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रपति ने इसे पश्चिम की पुरानी दुश्मनी का हिस्सा बताया।</span></p>
<h4><span>ट्रंप बनाम खामेनेई: शब्दों की जंग</span></h4>
<p><span>इससे पहले, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई ने डोनाल्ड ट्रंप को एक 'अपराधी' घोषित किया था। ईरान का आरोप है कि देश में हाल ही में हुई अशांति और मौतों के पीछे ट्रंप प्रशासन की नीतियां और हस्तक्षेप है।</span></p>
<p><span>वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने रुख पर कायम रहते हुए कहा कि ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन जनता के गुस्से का स्वाभाविक परिणाम हैं। ट्रंप के अनुसार, ईरानी नेतृत्व डर और हिंसा के बल पर शासन कर रहा है और अब देश को राजनीतिक दबाव व मानवाधिकार उल्लंघन से मुक्ति मिलनी चाहिए।</span></p>
<h4><span>क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की राह</span></h4>
<p><span>ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिका की 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की नीति और ईरान का कड़ा रुख मध्य पूर्व में किसी बड़े सैन्य या रणनीतिक टकराव की आशंका को बढ़ा रहा है।</span></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>शेख हसीना को मिलेगी मौत की सजा? सुप्रीम कोर्ट 20 जनवरी को करेगा सजा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई</title>
<link>https://www.newstvindia.in/will-sheikh-hasina-get-the-death-penalty-supreme-court-to-hear-plea-for-enhancement-of-sentence-on-january-20</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल की उम्रकैद की सजा को मौत की सजा में बदलने वाली अपील पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है। आईसीटी अभियोजक ने &#039;जुलाई विद्रोह&#039; के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की मांग की है। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 16 Jan 2026 07:53:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Sheikh Hasina Death Penalty Appeal Bangladesh, International Crimes Tribunal Bangladesh Verdict 2026, Sheikh Hasina July Uprising Case Update, Bangladesh Supreme Court Hearing 20 January, ICT Prosecutor Gazi MH Tamim Statement</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका : </strong>बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की उम्रकैद की सजा को मौत में बदलने वाली याचिका पर 20 जनवरी को सुनवाई होगी। बांग्लादेशी मीडिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन ने गुरुवार को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) के अभियोजक की अपील पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है।</p>
<p>इस अपील में शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को जुलाई में हुए सामूहिक विद्रोह से जुड़े मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मिली सजा को बढ़ाने की मांग की गई है। अपीलेट डिवीजन के जज-इन-चैंबर जस्टिस एमडी रेजाउल हक की ओर से दिए गए ऑर्डर में कहा गया, "सुनवाई की तारीख 20 जनवरी को तय की गई है।"</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर जल्दी सुनवाई करने की अपील पर विचार करने के बाद यह आदेश दिया है। यह मामला सुबह अपीलेट डिवीजन चैंबर जज कोर्ट की कॉज लिस्ट में आइटम नंबर 58 के तौर पर लिस्टेड था। आईसीटी अभियोजन ने 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के अपीलेट डिवीजन में अपील फाइल की।</p>
<p>अपील में अभियोजक ने जुलाई में हुई हिंसा के दौरान किए गए मानवता के खिलाफ अपराधों के कुछ मामलों में उनकी सजा को बढ़ाकर मौत की सजा देने की मांग की थी।</p>
<p>आईसीटी अभियोजक गाजी एमएच तममी ने कहा था कि जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा काफी नहीं है और इसकी जगह मौत की सजा दी जानी चाहिए। हसीना और कमाल के लिए मौत की सजा की अपील के बाद ट्रिब्यूनल परिसर में एक प्रेस ब्रीफिंग में तममी ने कहा था, "पहला फैसला फिर से बने आईसीटी में सुनाया गया था। जुलाई विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में, हसीना और कमाल को सजा सुनाई गई थी। उन्हें एक आरोप में उम्रकैद और दूसरे में मौत की सजा मिली थी।"</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमने सुप्रीम कोर्ट की अपीलीय अदालत में अपील की है कि उम्रकैद की जगह मौत की सजा दी जाए। इसके लिए आठ वजहें बताई गई हैं। फैसला आने के तीस दिनों के अंदर अपील फाइल करनी होती है। हमने यह पहले ही कर दिया था। अपील के 60 दिनों के अंदर सेटलमेंट का नियम है। मुझे उम्मीद है कि इस अपील का निपटारा समय के अंदर हो जाएगा।"</p>
<p>बता दें कि 17 नवंबर को दिए गए इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल-1 ने दोनों नेताओं को एक बड़े आरोप में मौत की सजा और एक अलग आरोप में प्राकृतिक तरीके से मौत तक जेल की सजा सुनाई थी।</p>
<p>अपील दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान सोमवार को तमीम ने कहा था, "हमने आज 8 वजहों से अपील फाइल की है ताकि उन आरोपों में सजा बढ़ाई जा सके, जिनमें उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई थी।"</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Iran Protests: ईरान पर G&#45;7 का &amp;apos;हंटर&amp;apos;! प्रदर्शनकारियों के दमन पर दी कड़वे प्रतिबंधों की चेतावनी; जानें क्या है पूरा मामला</title>
<link>https://www.newstvindia.in/iran-protests-g-7-hunter-on-iran-warns-of-bitter-sanctions-on-the-repression-of-protesters-find-out-what-the-whole-matter-is</link>
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<description><![CDATA[ जी-7 देशों और यूरोपीय संघ ने ईरान में जारी हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई है। दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में हजारों की मौत के बाद, जी-7 ने ईरानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई की निंदा की है और अतिरिक्त प्रतिबंधों का संकेत दिया है। ]]></description>
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<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 09:06:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>G7 Statement on Iran Protests 2026, Iran Economic Crisis and Rial Devaluation, Human Rights Violations in Iran G7 Warning, Canada Japan Joint Statement on Tehran, Additional Sanctions on Iran 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ओटावा :</strong> सात बड़ी शक्तियों के संगठन जी-7 के विदेश मंत्रियों और यूरोपियन यूनियन के उच्च अधिकारियों ने ईरान के हालातों पर चिंता व्यक्त की है। इस दौरान, जी-7 देशों ने ईरानी अधिकारियों की ओर से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर किए जा रहे अत्याचार की निंदा करते हुए कहा कि अगर विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई जारी रहती है तो वे तेहरान के खिलाफ और कदम उठाने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>जी-7 संगठन में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इन देशों के मंत्रियों और यूरोपियन यूनियन के उच्च प्रतिनिधि ने एक संयुक्त बयान में कहा, "वे ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं।"</p>
<p>बयान में कहा गया है, "हम ईरानी अधिकारियों की ओर से ईरानी लोगों पर उनके बेहतर जीवन, गरिमा और स्वतंत्रता के लिए साहसिक रूप से आवाज उठाने पर किए जा रहे क्रूर दमन का कड़ा विरोध करते हैं, जो दिसंबर 2025 के अंत से जारी है।"</p>
<p>बयान में आगे कहा गया है, "हम विरोध प्रदर्शनों पर हमले, मनमानी गिरफ्तारी और सुरक्षा बलों की ओर से डराने-धमकाने की रणनीतियों की कड़ी निंदा करते हैं। हम ईरानी अधिकारियों से पूरी संयम बरतने, हिंसा से बचने और ईरान के नागरिकों के मानवाधिकार व बुनियादी स्वतंत्रताओं को सम्मान देने की अपील करते हैं, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना प्राप्त करने और साझा करने का अधिकार और शांतिपूर्वक एकत्र होने के अलावा संघ बनाने की स्वतंत्रता शामिल है।"</p>
<p>कनाडा और जापान के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान के अनुसार, जी-7 के सदस्य देशों ने यह स्पष्ट किया है कि अगर ईरान प्रदर्शनों और असहमति पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दायित्वों का उल्लंघन करता रहता है, तो वे अतिरिक्त प्रतिबंधात्मक उपाय लागू करने के लिए तैयार हैं।</p>
<p>बता दें कि ईरान में दिसंबर के आखिर से बिगड़ती आर्थिक स्थिति और अपनी करेंसी रियाल की कीमत गिरने को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हिंसा के दौरान हजारों की संख्या में लोगों के मारे जाने की सूचनाएं हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>नई दिल्ली पहुंचे ट्रंप के &amp;apos;खास&amp;apos; सर्जियो गोर, संभाला राजदूत का पद; जेडी वेंस और मार्को रुबियो ने दी बधाई, जानें क्या है उनका मिशन</title>
<link>https://www.newstvindia.in/trump-s-special-sergio-gore-takes-over-as-ambassador-j-d-vance-and-marco-rubio-congratulate-him-find-out-what-his-mission-is</link>
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<description><![CDATA[ सर्जियो गोर ने औपचारिक रूप से भारत में अमेरिका के नए राजदूत का कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार संभालते ही उन्होंने भारत को अमेरिका का सबसे जरूरी साझेदार बताया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस नियुक्ति को लेकर बड़ी प्रतिक्रिया दी है। पढ़ें कूटनीतिक गलियारों की ताजा हलचल। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 09:38:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Sergio Gor US Ambassador to India 2026, JD Vance message to Sergio Gor, Marco Rubio on India-US strategic partnership, Donald Trump foreign policy India news, US Embassy New Delhi latest updates</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन :</strong> अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सार्वजनिक रूप से सर्जियो गोर को बधाई दी है। सर्जियो गोर ने औपचारिक रूप से भारत में अमेरिका के नए राजदूत का पद संभाल लिया है। इन बधाइयों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भारत–अमेरिका संबंधों में निरंतरता और तेजी का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p>उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "राजदूत आपको बहुत बधाई, आप बेहतरीन काम करेंगे।" उन्होंने यह संदेश सर्जियो गोर के उस पोस्ट पर लिखा, जिसमें गोर ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में अपने पहले दिन की जानकारी दी थी।</p>
<p>वहीं, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी अलग पोस्ट में अपनी शुभकामनाएं दीं और लिखा कि आप बहुत अच्छा काम करेंगे।</p>
<p>ये संदेश उस समय आए जब सर्जियो गोर ने भारत पहुंचने और यहां अपना कार्यकाल शुरू करने की घोषणा की। अपने बयान में उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति को आगे बढ़ाने और भारत–अमेरिका साझेदारी को मजबूत करने की बात कही।</p>
<p>सर्जियो गोर ने लिखा, "नमस्ते। आज नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में मेरा पहला दिन है। इस समर्पित टीम का हिस्सा बनकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है और मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने तथा भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा करने के लिए काम शुरू करने को उत्सुक हूं।"</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में दोनों देशों के भविष्य को लेकर वह बेहद आशावादी हैं।</p>
<p>सर्जियो गोर की पोस्ट के साथ अमेरिकी दूतावास की कई तस्वीरें भी साझा की गईं। इनमें वे दूतावास के कर्मचारियों से मिलते हुए और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए नजर आए। तस्वीरों में अमेरिकी और भारतीय झंडे भी साफ दिखाई दिए।</p>
<p>उनके भारत पहुंचते ही नीति विशेषज्ञों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय में इस पर खूब चर्चा हुई। कई लोगों ने उनके पहले संदेश के लहजे और शब्दों की सराहना की।</p>
<p>भारतीय-अमेरिकी निवेशक और टिप्पणीकार आशा जडेजा मोटवानी ने इसे बहुत अच्छी खबर बताया। उन्होंने लिखा कि अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर दिल्ली पहुंच चुके हैं और सबसे पहले उन्होंने यही काम किया। उन्होंने अमेरिका और भारत, दोनों देशों की टीमों को बधाई दी और कहा कि यह एक शानदार शुरुआत है।</p>
<p>रक्षा मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक डेरेक जे ग्रॉसमैन ने भी एक्स पर लिखा कि भारत में राष्ट्रपति ट्रंप के नए राजदूत पूरे जोश के साथ काम शुरू कर रहे हैं। उन्होंने सर्जियो गोर के इस बयान का जिक्र किया कि भारत से ज्यादा जरूरी साझेदार कोई नहीं है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>India&#45;US Ties: &amp;apos;पड़ोसी देश नहीं, भारत ही है पहली पसंद!&amp;apos; व्यापारिक मतभेदों के बीच अमेरिकी सांसदों ने क्यों की PM मोदी के भारत की तारीफ? जानें 5 बड़ी बातें</title>
<link>https://www.newstvindia.in/not-a-neighbouring-country-india-is-the-first-choice-why-did-us-lawmakers-praise-pm-modi-s-india-amid-trade-differences-learn-5-big-things</link>
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<description><![CDATA[ वाशिंगटन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी सांसदों अमी बेरा और रिच मैककॉर्मिक ने भारत-अमेरिका संबंधों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शुल्क और वीजा विवादों को &#039;अस्थायी&#039; बताते हुए कहा कि अमेरिकी कंपनियां चीन या किसी पड़ोसी देश के बजाय भारत में निवेश को प्राथमिकता दे रही हैं। रूसी तेल से लेकर चंद्रयान तक, जानें अमेरिका का नया नजरिया। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 08:23:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>India-US Trade Relations 2026 CSIS Event, US Congressman Ami Bera on India Investment, Rich McCormick Statement on India Russia Oil, US Tech Partnership with India Moon Mission, H-1B Visa and Tariff Issues India-USA</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन : </strong>अमेरिकी कांग्रेसमैन्स ने माना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कुछ समय से मतभेद बने हुए हैं, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि इन छोटे-मोटे विवादों के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते लंबी अवधि में रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी पर ही टिके हुए हैं। उनका कहना है कि शुल्क, वीजा और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे अस्थायी हैं।</p>
<p>सीएसआईएस के एक इवेंट में बोलते हुए, रिप्रेजेंटेटिव अमी बेरा अमी बेरा ने कहा कि बीच-बीच में तनाव ज़रूर आता है, लेकिन भारत-अमेरिका संबंधों की दिशा मजबूत बनी हुई है। उन्होंने बताया कि कारोबारी वर्ग लंबी सोच के साथ काम करता है और हालात को अच्छी तरह समझता है।</p>
<p>अमी बेरा ने भारत यात्रा के दौरान की एक घटना याद करते हुए कहा कि उस समय वीजा और शुल्क को लेकर कई समस्याएं सामने आई थीं। एच-वन-बी वीजा और भारी शुल्क जैसे मुद्दों से तनाव बढ़ा था, लेकिन इसके बावजूद सच्चाई यही है कि दोनों पक्ष बड़ी तस्वीर को समझते हैं।</p>
<p>उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिकी कंपनियां निवेश के लिए भारत को ही अपनी पहली पसंद मानती हैं। उनका कहना था कि अमेरिका की बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश भारत में कर रही हैं, न कि किसी दूसरे पड़ोसी देश में।</p>
<p>वहीं दूसरे अमेरिकी प्रतिनिधि रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि आर्थिक मतभेदों को केवल झगड़े के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि व्यापक रणनीतिक दृष्टि से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतुलन जरूरी है, लेकिन हर मामले में पूरी बराबरी संभव नहीं होती, जैसे वैवाहिक जीवन में भी पूरी समानता नहीं होती।</p>
<p>रिच मैककॉर्मिक ने बताया कि वे व्यापार के समर्थक हैं और दंडात्मक शुल्कों के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार ज्यादा शुल्क पूंजी के विकास में बाधा बनते हैं। उन्होंने कहा कि खुले व्यापार से अंततः समाज को लाभ होता है। जब व्यापार अच्छा होता है तो लोगों की जिंदगी बेहतर होती है और तरक्की के अवसर बढ़ते हैं।</p>
<p>कृषि के मुद्दे पर भी दोनों सांसदों ने बात की, जो भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में हमेशा संवेदनशील विषय रहा है। मैककॉर्मिक ने कहा कि भारत जैसी बड़ी आबादी वाला देश कृषि के मामले में आत्मनिर्भर है, जो अपने-आप में बड़ी बात है, हालांकि कुछ विशेष क्षेत्रों में अभी संभावनाएं हैं।</p>
<p>अमी बेरा ने कहा कि भारत में कृषि से जुड़े फैसले आसान नहीं होते, क्योंकि बड़ी संख्या में छोटे किसान इससे जुड़े हैं और नीतियों को लेकर विरोध भी होता रहा है। मैककॉर्मिक ने यह भी कहा कि भारत की बड़ी आबादी और विकास की गति उसे लंबे समय में विशेष लाभ देती है। उन्होंने कहा, "भारत दुनिया की सिर्फ़ दो जगहों में से एक है जहां की आबादी अभी भी बढ़ रही है।"</p>
<p>उन्होंने भारत की तकनीकी क्षमता का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने बहुत कम लागत में चंद्रमा के उस हिस्से पर अंतरिक्ष यान भेज दिया, जहां पहले कोई नहीं पहुंचा था। यह भारत की कुशल तकनीक को दिखाता है।</p>
<p>अमी बेरा ने कहा कि कूटनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यापार और निवेश के आंकड़े लगातार बढ़ोतरी दिखा रहे हैं, जो यह साबित करता है कि आर्थिक सहयोग जारी है। उन्होंने कहा, "आप अभी भी ट्रेड और इन्वेस्टमेंट पर हाई-फ्रीक्वेंसी डाटा देख सकते हैं जो अभी भी असली बढ़ोतरी दिखा रहा है।"</p>
<p>अमेरिकी सांसदों ने यह भी माना कि भारत की अपनी घरेलू ज़रूरतें और सीमाएं हैं, खासकर ऊर्जा के मामले में। रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि सस्ता रूसी तेल खरीदना भारत के लिए आर्थिक मजबूरी है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा, "वह यह अपने देश के सबसे अच्छे हित के लिए कर रहे हैं ताकि वह सस्ती एनर्जी से अपनी इकॉनमी को बढ़ा सकें।"</p>
<p>दोनों सांसदों ने साफ कहा कि तमाम मतभेदों के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच सहयोग का तर्क बहुत मजबूत है। उनका मानना है कि दोनों देश तात्कालिक लाभ नहीं, बल्कि लंबी दूरी की साझेदारी पर ध्यान दे रहे हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Iran Crisis 2026: &amp;apos;हमारे पास पक्के सबूत हैं...&amp;apos; ईरान का अमेरिका और इजरायल पर बड़ा आरोप; ट्रंप की सैन्य स्ट्राइक की धमकी के बीच तेहरान में हाई&#45;लेवल मीटिंग</title>
<link>https://www.newstvindia.in/we-have-strong-evidence-iran-s-big-accusation-against-us-and-israel-high-level-meeting-in-tehran-amid-trump-s-military-strike-threat</link>
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<description><![CDATA[ ईरान में भड़की हिंसा के बीच विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ है। उन्होंने &#039;विदेशी ताकतों&#039; द्वारा घुसपैठियों को हथियार बांटने और हिंसा भड़काने के सबूत होने की बात कही है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सैन्य दखल की चेतावनी दी है। जानें क्या है तेहरान का पूरा दावा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 22:20:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Iran Protests January 2026, Abbas Araghchi, US Military Strike Threat Iran 2026, Trump vs Iran Foreign Minister Allegations, Mossad Involvement in Iran Protests Evidence, Iran Diplomatic Meeting Tehran</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिका और ईरान के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को तेहरान में विदेशी डिप्लोमैट्स के साथ हुई एक मीटिंग में आरोप लगाया कि ईरान के मौजूदा हालात के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।</p>
<p>ईरान में हिंसा शुरू होने के बाद अमेरिका ने कहा है कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया, तो अमेरिकी सेना ईरान पर स्ट्राइक करेगी। सोमवार को अराघची ने मीटिंग में कहा कि ईरान के पास ऐसे कई सबूत हैं जो दिखाते हैं कि देश में हाल की अशांति में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।</p>
<p>बता दें, ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद आया है, जिसमें ईरानी सुरक्षा बलों और आम लोगों में से कई लोगों की मौत हो गई है। प्रदर्शन के दौरान देशभर में कई मस्जिदों, मेडिकल सेंटरों और दूसरी इमारतों में आग लगा दी गई है। अराघची के मुताबिक, देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक और खूनी हो गए ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश में सैन्य दखल देने का बहाना मिल सके।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हमारे पास ईरान में हाल के दिनों में हुई आतंकवादी कार्रवाइयों में अमेरिका और इजरायल के शामिल होने के कई दस्तावेज और सबूत हैं।"</p>
<p>अराघची ने आगे कहा, “प्रदर्शन के दौरान कुछ हथियारबंद लोग भी नजर आए। तेहरान के पास ऐसे ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड हैं, जिनमें कथित तौर पर आतंकवादी गुर्गों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने, सुरक्षा और पुलिस बलों को निशाना बनाने और यहां तक कि शांतिपूर्वक रह रहे आम नागरिकों पर हमले के निर्देश दिए गए थे।”</p>
<p>ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि “मारे गए कई लोगों को पीछे से गोलियां लगीं। तेहरान के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि कुछ गुर्गों को विदेशी ताकतों से सीधे आदेश मिले थे। इस बात का जीता-जागता सबूत है कि इन आतंकवादी कामों में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है।”</p>
<p>अराघची ने यह भी दावा किया कि घुसपैठियों को इजराइल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी ने मदद की थी। उन्होंने कहा कि फारसी बोलने वाले मोसाद के गुर्गों ने इन विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की थी।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>गाजा में सेना भेजने की तैयारी में बांग्लादेश? &amp;apos;पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी&amp;apos; ने अंतरिम सरकार को दी चेतावनी; बताया फिलिस्तीन से धोखा</title>
<link>https://www.newstvindia.in/bangladesh-preparing-to-send-troops-to-gaza-palestine-solidarity-committee-warns-interim-government-accuses-palestine-of-cheating</link>
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<description><![CDATA[ बांग्लादेश की अंतरिम सरकार द्वारा गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की दिलचस्पी पर विवाद खड़ा हो गया है। पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी ने इसे इजरायल के हितों को साधने वाली साजिश करार देते हुए सरकार से पीछे हटने को कहा है। जानें क्यों बांग्लादेश के इस सैन्य कदम का हो रहा है भारी विरोध। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:19:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Bangladesh Troops for Gaza Stabilization Force, Palestine Solidarity Committee Bangladesh Statement, Muhammad Yunus Govt on Gaza Military Mission, NSA Lutfey Siddiqi Khalilur Rahman US Visit, Bangladesh Foreign Policy on Palestine 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>ढाका : </strong>बांग्लादेश में फिलिस्तीन के समर्थन में सक्रिय समूह 'पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी' ने सरकार को स्पष्ट हिदायत दी है कि वह प्रस्तावित गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स (अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल) में किसी भी प्रकार की भागीदारी न करे। समिति का कहना है कि बांग्लादेश का ऐतिहासिक और नैतिक रुख हमेशा से फिलिस्तीनी जनता के पक्ष में रहा है और ऐसे किसी अंतरराष्ट्रीय सैन्य या सुरक्षा ढांचे में शामिल होना इस परंपरागत नीति के विपरीत होगा।</p>
<p>मीडिया आउटलेट 'द डेली स्टार' के अनुसार, 'पैलेस्टाइन सॉलिडैरिटी कमेटी,' बांग्लादेश ने रविवार को अंतरिम सरकार की गाजा के लिए प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने की दिलचस्पी की कड़ी निंदा की।</p>
<p>समिति ने रविवार को अपने बयान में कहा कि गाजा इस समय गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है, जहां आम नागरिक लगातार हिंसा, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात में किसी “स्टेबिलाइजेशन फोर्स” का गठन, जो जमीनी सच्चाई में सैन्य उपस्थिति बढ़ा सकता है, शांति के बजाय तनाव को और गहरा कर सकता है। समिति के अनुसार, फिलिस्तीन की समस्या का समाधान सैन्य हस्तक्षेप से नहीं बल्कि न्यायपूर्ण राजनीतिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन से ही संभव है।</p>
<p>कमेटी के मेंबर सेक्रेटरी प्रोफेसर एमडी हारुन-ओर-रशीद ने कहा कि स्टेबिलाइजेशन फोर्स की मुख्य जिम्मेदारी इजरायल की सुरक्षा पक्की करने के बहाने गाजा में आजादी के लिए लड़ने वालों से हथियार छीनना और बदले में फिलिस्तीनी लोगों के विरोध आंदोलन को पूरी तरह खत्म करना होगा।</p>
<p>इसमें कहा गया, “बदकिस्मती से, अंतरिम सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, खलीलुर रहमान, जो अभी अमेरिका के दौरे पर हैं, ने वाशिंगटन में अमेरिका की राजनीतिक मामलों की अवर सचिव, एलिसन हुकर, और दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के सहायक विदेश मंत्री, पॉल कपूर के साथ मीटिंग में गाजा के लिए इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में हिस्सा लेने में बांग्लादेश की दिलचस्पी दिखाई है।” यह बात मुख्य सलाहाकार मोहम्मद युनूस के प्रेस विंग की ओर से जारी एक बयान का जिक्र करते हुए कही गई।</p>
<p>दरअसल, पाकिस्तान की तर्ज पर बांग्लादेश ने भी गाजा में अपनी सेना भेजने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश सरकार ने गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयारी के संकेत दिए। ये बात बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) खलीलुर रहमान ने अमेरिकी मंत्री एलिसन हुकर से मुलाकात के दौरान कही थी। विरोध इसी का हो रहा है।</p>
<p>पैलेस्टाइन सोलिडैरिटी कमेटी ने यह भी याद दिलाया कि बांग्लादेश का जन्म खुद संघर्ष और स्वतंत्रता आंदोलन के बाद हुआ था, इसलिए देश की जनता स्वाभाविक रूप से उत्पीड़न और कब्जे के खिलाफ खड़े लोगों के दर्द को समझती है।</p>
<p>बांग्लादेश ने अतीत में संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन किया है और इजरायली कब्जे की आलोचना की है। समिति का मानना है कि गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में शामिल होना इस नैतिक और कूटनीतिक रुख को कमजोर कर सकता है।</p>
<p>फिलहाल बांग्लादेश सरकार की ओर से इस अपील पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब मध्य पूर्व की स्थिति वैश्विक राजनीति का केंद्र बनी हुई है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>जर्मन चांसलर मर्ज़ का भारत दौरा, पीएम मोदी के साथ रक्षा और व्यापार पर बड़ी डील संभव; 25 साल की साझेदारी को मिलेगी नई धार</title>
<link>https://www.newstvindia.in/german-chancellor-merz-s-visit-to-india-big-deal-on-defence-and-trade-possible-with-pm-modi-25-years-of-partnership-to-get-a-new-edge</link>
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<description><![CDATA[ जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर गुजरात पहुंचे हैं। रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने पर पीएम मोदी और चांसलर मर्ज़ रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन, टेक्नोलॉजी और ग्रीन डेवलपमेंट पर अहम चर्चा करेंगे। साबरमती रिवरफ्रंट से शुरू होने वाला यह दौरा भारत-जर्मनी रिश्तों में एक नया अध्याय लिखेगा। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 09:48:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Friedrich Merz India Visit 2026, PM Modi German Chancellor Meeting Gujarat, India Germany Defense Cooperation 2026, India Germany Strategic Partnership 25 Years, Mahatma Mandir Bilateral Talks News</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत की आधिकारिक यात्रा पर सोमवार को गुजरात पहुंचे।</p>
<p></p>
<p></p>
<p></p>
<p>यह मर्ज की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसका मकसद भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जर्मन चांसलर का गर्मजोशी से स्वागत किया।</p>
<p>मर्ज़ का स्वागत करते हुए, विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, "भारत और जर्मनी भारत-जर्मनी राजनयिक संबंधों के 75 साल और भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 साल मना रहे हैं। चांसलर मर्ज़ की यात्रा और दिन में बाद में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात से भारत-जर्मनी साझेदारी और मजबूत होगी।"</p>
<p>मर्ज़ अहमदाबाद में पीएम मोदी के साथ बातचीत करेंगे, और दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लेंगे।</p>
<p>प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इसके बाद गांधीनगर के महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय बैठकें होंगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा, "दोनों नेता भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे, जिसने हाल ही में 25 साल पूरे किए हैं। उनकी चर्चा व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल विकास और मोबिलिटी में सहयोग को और मजबूत करने पर भी केंद्रित होगी, साथ ही रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान, नवाचार और अनुसंधान, हरित और सतत विकास, और लोगों के बीच संबंधों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।"</p>
<p>दोनों नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, साथ ही भारत और जर्मनी के व्यापार और उद्योग नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।</p>
<p>चांसलर मर्ज़ की यात्रा से पहले, भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने पिछले हफ्ते रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की और द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर चर्चा की, जिसमें रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p>रक्षा मंत्रालय के पब्लिक रिलेशंस डायरेक्टरेट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बताया, "जर्मन राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने आज रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से मुलाकात की। राजदूत ने जर्मन पक्ष की ओर से रक्षा सचिव को नए साल की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों सहित कई द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा मुद्दों पर भी चर्चा की।"</p>
<p>पिछले साल नवंबर में, पीएम मोदी ने दक्षिण अफ्रीका में जी20 शिखर सम्मेलन के मौके पर जर्मन चांसलर मर्ज़ से मुलाकात की थी। पीएम मोदी ने भारत और जर्मनी के बीच संबंधों को मजबूत और व्यापार, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन सहित प्रमुख क्षेत्रों में विस्तार करने वाला बताया था।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के सख्त तेवर, जेडी वेंस बोले&#45; &amp;apos;यूरोप इसे हल्के में न ले, हमें खुद करनी पड़ सकती है कार्रवाई&amp;apos;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/europe-should-not-take-it-lightly-we-may-have-to-take-action-ourselves-says-j-d-vance-us-tougher-on-greenland</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ग्रीनलैंड को लेकर दुनिया को बड़ी चेतावनी दी है। वेंस ने साफ किया कि मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए ग्रीनलैंड बेहद अहम है और अगर यूरोपीय सहयोगियों ने इसकी सुरक्षा पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो ट्रंप प्रशासन खुद एक्शन लेगा। जानें आखिर क्यों इस द्वीप पर टिकी है अमेरिका की नजर। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 09:21:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>JD Vance Greenland Statement, Donald Trump Greenland Purchase News, US Missile Defense System Greenland, US Denmark Diplomatic Tension 2026, Arctic Region Strategic Importance US</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन :</strong> अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूरोपीय देशों से ग्रीनलैंड के मुद्दे को 'गंभीरता से लेने' की अपील की है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह द्वीप न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।</p>
<p>व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेडी वेंस ने कहा कि ग्रीनलैंड वैश्विक मिसाइल रक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका के सहयोगी देश इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाते, तो अमेरिका को खुद कार्रवाई करनी पड़ सकती है।</p>
<p>यूरोप में इस विचार को लेकर विरोध के सवाल पर (कि ग्रीनलैंड बिक सकता है), वेंस ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन इस मुद्दे को कूटनीति के जरिए आगे बढ़ाता रहेगा।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हम कुछ बातें निजी तौर पर कहेंगे और कुछ सार्वजनिक रूप से। यह सिलसिला जारी रहेगा।"</p>
<p>वेंस ने कहा, "मुझे लगता है कि विदेश मंत्री रुबियो अगले हफ्ते या उसके बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं से मिल सकते हैं।"</p>
<p>उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों पर हुई आलोचनाओं पर कहा कि मीडिया और यूरोप के कुछ वर्ग इस मुद्दे पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "पहली बात, ग्रीनलैंड अमेरिका की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की मिसाइल सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। दूसरी बात, कुछ शत्रुतापूर्ण ताकतों ने इस क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई है।"</p>
<p>वेंस ने बताया कि अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगियों पर ग्रीनलैंड की सुरक्षा मजबूत करने का दबाव बना रहा है।</p>
<p>उन्होंने कहा, "हम अपने यूरोपीय दोस्तों से सिर्फ इतना कह रहे हैं कि इस भूभाग की सुरक्षा को ज्यादा गंभीरता से लें। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो अमेरिका को कुछ करना पड़ेगा।"</p>
<p>हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका की संभावित कार्रवाई क्या हो सकती है। वेंस ने कहा कि इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही करेंगे।</p>
<p>गौरतलब है कि ग्रीनलैंड, डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। आर्कटिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह द्वीप उत्तर अटलांटिक क्षेत्र में सुरक्षा और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के लिए लंबे समय से रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Russia&#45;US Conflict: अमेरिकी सेना ने जब्त किया रूसी ऑयल टैंकर, 3 भारतीयों समेत 28 क्रू मेंबर्स हिरासत में; रूस ने बताया &amp;apos;समुद्री डकैती&amp;apos;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/russia-us-conflict-us-forces-seize-russian-oil-tanker-28-crew-members-including-3-indians-detained-russia-says-piracy</link>
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<description><![CDATA[ नॉर्थ अटलांटिक में अमेरिकी और ब्रिटिश सेना ने एक बड़े ऑपरेशन में रूसी झंडे वाले ऑयल टैंकर &#039;मरीनेरा&#039; को पकड़ा है। जहाज पर सवार 3 भारतीय नागरिक भी अमेरिकी हिरासत में हैं। रूस ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और सीधी चुनौती करार दिया है। जानें क्या है पूरा विवाद। ]]></description>
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<pubDate>Fri, 09 Jan 2026 07:46:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Russian Oil Tanker Seized US, Marinera Tanker US Custody, Indian Crew Members Russian Ship, US UK Joint Maritime Operation, Russia US Diplomatic Tension 2026</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्थ अटलांटिक में अमेरिकी सेना द्वारा पकड़े गए रूसी झंडे वाले एक ऑयल टैंकर पर सवार 28 क्रू मेंबर्स में तीन भारतीय नागरिक भी शामिल थे।</p>
<p>मरीनेरा नाम का यह जहाज (जिसका पहले नाम पहले बेला 1 था) उसे एक लंबी समुद्री खोज के बाद पकड़ा गया। बताया जा रहा है कि यह खोज कैरेबियन सागर में शुरू हुई थी और उत्तरी अटलांटिक तक चल रही थी।</p>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक, टैंकर में एक मल्टीनेशनल क्रू था जिसमें 17 यूक्रेनी, छह जॉर्जियाई, तीन भारतीय और दो रूसी शामिल थे, जिसमें जहाज का कप्तान भी शामिल था। सभी क्रू सदस्य फिलहाल अमेरिकी हिरासत में हैं, हालांकि अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि उन्हें कब या किन शर्तों पर रिहा किया जाएगा।</p>
<p>यह जब्ती बुधवार को हुई, जिसे अमेरिकी एजेंसियों द्वारा ब्रिटिश सेना के समर्थन से एक कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन बताया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि टैंकर के संबंध वेनेजुएला से थे और यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की कोशिशों में शामिल हो सकता है।</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि यह ऑपरेशन अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सैन्य इकाइयों ने मिलकर किया था, जिसमें यूनाइटेड किंगडम से मदद मिली थी। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन को सपोर्ट करने के लिए ब्रिटिश एयरबेस का इस्तेमाल किया गया था, जबकि रॉयल एयर फोर्स के सर्विलांस विमानों ने टैंकर पर नजर रखी, जब वह आइसलैंड और यूनाइटेड किंगडम के बीच पानी से गुजर रहा था।</p>
<p>इस जब्ती पर रूस से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। मॉस्को ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया। रूस के परिवहन मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि किसी भी देश को दूसरे देश के झंडे के तहत कानूनी रूप से रजिस्टर्ड जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है।</p>
<p>रूसी सांसदों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। स्टेट ड्यूमा रक्षा समिति के उपाध्यक्ष एलेक्सी ज़ुरावलेव को मीडिया रिपोर्ट्स में इस जब्ती को समुद्री डकैती का काम और रूसी संप्रभुता के लिए सीधी चुनौती बताया है।</p>
<p>ज़ुरावलेव के हवाले से कहा गया, "यह समुद्री डकैती का सबसे आम रूप है - एक सशस्त्र अमेरिकी बेड़े द्वारा एक जहाज को जब्त करना।" उन्होंने आगे दावा किया कि ऐसे काम रूसी क्षेत्र पर हमले के बराबर हैं, क्योंकि टैंकर रूसी झंडे वाला था।</p>
<p>जैसे-जैसे राजनयिक तनाव बढ़ रहा है, मरीनेरा की जब्ती ने प्रतिबंधों को लागू करने, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा व्यापार से जुड़े बढ़ते टकराव को एक बार फिर से उजागर किया है। जांच जारी रहने और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं के सामने आने के साथ, इस घटना पर इसके व्यापक भू-राजनीतिक प्रभावों के लिए बारीकी से नजर रखी जा रही है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>US Student Visa: अमेरिका में भारतीय छात्रों को चेतावनी, नियम तोड़ा तो होंगे डिपोर्ट; दूतावास ने कहा&#45; &amp;apos;वीजा अधिकार नहीं, विशेषाधिकार है&amp;apos;</title>
<link>https://www.newstvindia.in/us-student-visa-indian-students-in-us-warned-of-deportation-if-they-break-rules-embassy-says-visa-is-privilege-not-right</link>
<guid>https://www.newstvindia.in/us-student-visa-indian-students-in-us-warned-of-deportation-if-they-break-rules-embassy-says-visa-is-privilege-not-right</guid>
<description><![CDATA[ ट्रंप प्रशासन के सख्त रुख के बीच भारत में अमेरिकी दूतावास ने छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की है। गिरफ्तारी या कानून के उल्लंघन पर वीजा रद्द कर तुरंत देश से निकाला जा सकता है। जानें 2025 में कितने हजार छात्रों के वीजा रद्द हुए और क्या हैं नए नियम। ]]></description>
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<pubDate>Wed, 07 Jan 2026 22:15:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>US Student Visa Warning India, US Embassy India Student Advisory, Donald Trump Visa Rules 2026, Indian Students Deportation US, US Welfare Benefits Immigrant List</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : </strong>अमेरिका में भारतीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल, भारत में अमेरिकी दूतावास ने भारतीय छात्रों के लिए चेतावनी जारी की है। अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि अगर छात्रों ने नियमों का उल्लंघन किया तो उन्हें देश से निकाला जा सकता है।</p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारत में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने कहा, अमेरिकी कानून तोड़ने पर आपके स्टूडेंट वीजा पर गंभीर असर पड़ सकता है। अगर आपको गिरफ्तार किया जाता है या आप कोई कानून तोड़ते हैं, तो आपका वीजा कैंसल हो सकता है, आपको डिपोर्ट किया जा सकता है, और आप भविष्य में अमेरिकी वीजा के लिए अयोग्य हो सकते हैं। नियमों का पालन करें और अपनी यात्रा को खतरे में न डालें। अमेरिकी वीजा एक विशेषाधिकार है, अधिकार नहीं।</p>
<p>बता दें, अमेरिका की तरफ से यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल 2025 में अमेरिकी वीजा नियम और प्रवासी नियम में बड़े बदलाव किए हैं।</p>
<p>इससे पहले अमेरिकी दूतावास ने एक्स पर ही अवैध प्रवासियों को लेकर चेतावनी जारी करते हुए कहा था, अवैध प्रवासी हिंसक कार्टेल, मानव तस्करों और भ्रष्ट अधिकारियों के टारगेट होते हैं। गैर-कानूनी प्रवासियों का शोषण किया जाता है और उन्हें शिकार बनाया जाता है, जो आखिर में एक बेकार सफर साबित होता है। अवैध प्रवासियों से सिर्फ तस्करों को ही फायदा होता है।</p>
<p>पिछले साल 30 दिसंबर 2025 को भी अमेरिकी एंबेसी ने कानून तोड़ने और आपराधिक सजा को लेकर कहा था कि अगर आप अमेरिका में कानून तोड़ते हैं, तो आपको भारी आपराधिक सजा दी जाएगी। ट्रंप सरकार अमेरिका में अवैध प्रवास को खत्म करने और हमारे देश की सीमाओं और हमारे नागरिकों की सुरक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में अमेरिका में पढ़ाई करने वाले लगभग 6000 विदेशी छात्रों का वीजा रद्द किया गया है। इसमें कई भारतीय छात्र भी शामिल थे। अमेरिका में तीन लाख के करीब विदेशी छात्र पढ़ाई करते हैं।</p>
<p>हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार से लाभ लेने वाले प्रवासी देशों की लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में भारत का नाम शामिल नहीं था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर प्रवासी कल्याण पाने वालों की देश के हिसाब से रैंकिंग के आंकड़ों की एक लिस्ट साझा की है। इस लिस्ट में भारत का नाम ना होना कोई सामान्य बात नहीं है। यह अमेरिका के बड़े प्रवासी माहौल में भारतीय प्रवासियों की खास आर्थिक प्रोफाइल को दिखाता है।</p>
<p>ये आंकड़े दो टेबल में दिखाए गए हैं, जिन्हें मिलाकर एक सिंगल डेटासेट बनाया गया है। ये अमेरिका में सरकारी मदद पाने वाले प्रवासी परिवारों का हिस्सा दिखाते हैं। यह दर 80 फीसदी से ज्यादा से लेकर 40 फीसदी से थोड़ा कम तक है।</p>
<p>इस लिस्ट में सबसे ऊपर भूटान है, और भूटानी प्रवासियों का अमेरिकी सरकार से मदद पाने की दर 81.4 फीसदी है। इसके बाद यमन (उत्तर) 75.2 फीसदी, सोमालिया 71.9 फीसदी और मार्शल आइलैंड्स 71.4 फीसदी के साथ हैं। कई दूसरे देशों में भी कल्याणकारी भागीदारी का स्तर ऊंचा है।</p>
<p>इसके अलावा, लिस्ट के दूसरे पेज पर वे देश शामिल हैं जिनमें वेलफेयर में कम, लेकिन फिर भी उल्लेखनीय, भागीदारी है। आइवरी कोस्ट इस लिस्ट में 49.1 फीसदी के साथ सबसे आगे है, इसके बाद लाइबेरिया 48.9 फीसदी और अल्जीरिया 48.1 फीसदी के साथ दूसरे नंबर पर हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>Greenland विवाद: ट्रंप की जिद पर भड़का यूरोप, डेनमार्क और ब्रिटेन ने दी कड़ी चेतावनी; &amp;apos;किसी और का हक नहीं&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। डेनमार्क की पीएम और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दोटूक कहा है कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और इसकी सीमाओं का सम्मान होना चाहिए। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 21:19:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump Greenland Statement, Denmark PM Mette Frederiksen Response, Keir Starmer Supports Denmark, US Greenland Acquisition Debate, NATO Allies Conflict Greenland</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ग्रीनलैंड को लेकर नई बहस छेड़ दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यूएस की रक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है। ऐसे में डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने ट्रंप को चेतावनी दी। फिर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की।</p>
<p>ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने स्काई न्यूज की राजनीतिक मामलों की एडिटर बेथ रिग्बी से डेनमार्क की पीएम फ्रेडरिक्सन को समर्थन देते हुए कहा, "डेनमार्क एक करीबी यूरोपियन सहयोगी है, एक करीबी नाटो सहयोगी है। और इसलिए भविष्य ग्रीनलैंड, किंगडम ऑफ डेनमार्क, और सिर्फ ग्रीनलैंड और किंगडम ऑफ डेनमार्क का होना चाहिए।"</p>
<p>स्टार्मर ने कहा, "मैं उनके साथ हूं। ग्रीनलैंड के भविष्य के बारे में वह सही हैं।" इसके अलावा, ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने हाउस ऑफ कॉमन्स को बताया, "यूके सुरक्षा मामलों पर डेनमार्क के साथ मिलकर काम करता रहेगा। ग्रीनलैंड का भविष्य ग्रीनलैंडर्स और डेन्स का मामला है, किसी और का नहीं।"</p>
<p>ट्रंप ने रविवार को एक इंटरव्यू में द अटलांटिक से कहा था, “हमें ग्रीनलैंड की बिल्कुल जरूरत है।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी और चीनी नौसेनाओं के साथ मुकाबले का जिक्र किया।</p>
<p>सोमवार को डेनिश ब्रॉडकास्टर डीआर के साथ एक इंटरव्यू में, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कहा कि अगर अमेरिका किसी दूसरे नाटो सदस्य देश के खिलाफ ताकत का इस्तेमाल करता है तो सब कुछ रुक जाएगा।</p>
<p>पॉडकास्ट के दौरान फ्रेडरिक्सन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई नई टिप्पणी की भी आलोचना की।</p>
<p>डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने कहा, "दुर्भाग्य से, मुझे लगता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को गंभीरता से लेना चाहिए जब वह कहते हैं कि उन्हें ग्रीनलैंड चाहिए। डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने बार-बार ग्रीनलैंड के अमेरिका का हिस्सा बनने के किसी भी विचार को खारिज कर दिया है।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि हालांकि वह अमेरिकी कार्रवाइयों का हिसाब नहीं दे सकतीं, यूरोप से इस बात का पूरा समर्थन है कि सीमाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।</p>
<p>वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद ट्रंप ने अब ग्रीनलैंड को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने ग्रीनलैंड हासिल करने का विचार फिर से सामने रखा और आर्कटिक इलाके को अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी बताया। इसके बाद से यूरोपीय नेता डेनमार्क की मजबूती के लिए उसके समर्थन में खड़े हो गए हैं।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>BRICS 2026: भारत की अध्यक्षता पर दुनिया की नजर, रूसी मीडिया ने अमेरिका और चीन के मुकाबले भारत को बताया बेहतर विकल्प</title>
<link>https://www.newstvindia.in/brics-2026-world-watches-india-s-presidency-russian-media-calls-india-a-better-choice-than-the-us-and-china</link>
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<description><![CDATA[ रूस के सरकारी मीडिया &#039;RT&#039; ने ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता संभाल रहे भारत की जमकर सराहना की है। लेख के अनुसार, वेनेजुएला संकट और अमेरिकी चुनौतियों के बीच भारत का संतुलित नेतृत्व चीन के मुकाबले अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। ]]></description>
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<pubDate>Tue, 06 Jan 2026 21:17:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>India BRICS Presidency 2026, Global South Leadership India, RT News on India BRICS, US Venezuela Action BRICS Response, India Russia China Geopolitics</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली :</strong> रूस के सरकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल आरटी (आरटी) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक लेख में वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई पर भारत की संतुलित प्रतिक्रिया की सराहना करते हुए कहा गया है कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समूह, अमेरिका जैसी विरोधी शक्ति की चुनौतियों से निपटने के लिए चीन के वर्चस्व वाले नेतृत्व की तुलना में अधिक सक्षम साबित हो सकता है।</p>
<p>लेख में कहा गया है कि भारत के सामने ब्रिक्स जैसे विशाल समूह के आर्थिक और राजनीतिक एजेंडे को दिशा देने की बड़ी जिम्मेदारी है। इसके साथ-साथ उसे वैश्विक शक्तियों के साथ भू-राजनीतिक संतुलन भी साधना होगा, जिनके हित अर्थव्यवस्था, तकनीक, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे विविध क्षेत्रों में फैले हुए हैं।</p>
<p>भारत ने औपचारिक रूप से वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल ली है। इस दौरान भारत से ग्लोबल साउथ के विकास और व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने की उम्मीद की जा रही है, वहीं उसे भू-राजनीतिक तनावों और विस्तारित सदस्यता वाले समूह को भी संभालना होगा।</p>
<p>वर्तमान में ब्रिक्स में 11 सदस्य देश शामिल हैं। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा हाल ही में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान इस समूह में शामिल हुए हैं।</p>
<p>ब्रिक्स का विस्तार वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में इसके बढ़ते महत्व को दर्शाता है। यह समूह विश्व की बड़ी आबादी और वैश्विक जीडीपी के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। इसे पश्चिमी देशों के प्रभुत्व वाले संस्थानों के विकल्प के रूप में देखा जाता है और इसका उद्देश्य बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देना है।</p>
<p>यह मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने का कार्य करता है। साथ ही, यह वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ के देशों की भूमिका बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र व विश्व बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की वैधता और प्रभावशीलता में सुधार की दिशा में काम करता है।</p>
<p>रिपोर्ट में शनिवार को वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है। लेख के अनुसार, यह घटना ब्रिक्स देशों को संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की कथित विफलताओं को उजागर करने का अवसर प्रदान करती है।</p>
<p>लेख में कहा गया है कि नए वर्ष में भारत द्वारा ब्रिक्स अध्यक्षता संभालने के साथ ही अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया। इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी निंदा हुई, खासकर चीन, ब्राजील और रूस जैसे ब्रिक्स देशों की ओर से।</p>
<p>आरटी की रिपोर्ट में भारत की सतर्क और संतुलित प्रतिक्रिया की सराहना की गई है और कहा गया है कि ब्रिक्स की अध्यक्षता करते हुए भारत को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बेहद संतुलन साधना होगा।</p>
<p>रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ब्रिक्स समूह अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना चाहता है और भारत की 2026 की अध्यक्षता पर सभी की निगाहें टिकी होंगी, खासकर ऐसे समय में जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ब्रिक्स के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है।</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई से चीन नाराज़, बोला– कोई देश दुनिया का पुलिसवाला नहीं</title>
<link>https://www.newstvindia.in/china-outraged-by-us-action-on-venezuela-says-no-country-is-a-policeman-of-the-world</link>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला में अमेरिकी हमले और पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और संयुक्त राष्ट्र में इमरजेंसी बैठक का समर्थन किया। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 19:35:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>China US Tension, Venezuela Crisis, Nicolas Maduro Arrest, UN Security Council, International Law</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली : </strong>वेनेजुएला में अमेरिका के हमले और पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने को लेकर चीन भड़का हुआ है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने कहा कि चीन यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का मजबूती से बचाव करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने के लिए तैयार है।</p>
<p>वहीं, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि हम नहीं मानते कि कोई भी एक देश दुनिया का पुलिसवाला बन सकता है या खुद को इंटरनेशनल जज होने का दावा कर सकता है।</p>
<p>वेनेजुएला में अचानक हुए बदलावों को लेकर विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, "हम कभी नहीं मानते कि कोई भी देश दुनिया का पुलिसवाला बन सकता है, और न ही हम इस बात से सहमत हैं कि कोई भी देश खुद को इंटरनेशनल जज होने का दावा कर सकता है। चीन हमेशा ताकत के इस्तेमाल या धमकियों का विरोध करता है। इसके साथ ही एक देश की मर्जी को दूसरे पर थोपने का विरोध करता है।"</p>
<p>चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने कहा, "चीन, वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका के खुलेआम बल प्रयोग की निंदा करता है। यह अंतर्राष्ट्रीय कानून और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में बुनियादी नियमों का गंभीर उल्लंघन करता है, वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन करता है और लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है।"</p>
<p>उन्होंने आगे कहा कि चीन पार्टियों से वेनेजुएला के स्वतंत्र रूप से विकास का रास्ता चुनने के अधिकार का सम्मान करने और वेनेजुएला में स्थिरता और व्यवस्था वापस लाने के लिए काम करने की अपील करता है।</p>
<p>इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र ने इमरजेंसी बैठक बुलाई। चीन ने इस बैठक का समर्थन किया।</p>
<p>विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "चीन वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य हमलों पर चर्चा करने के लिए इमरजेंसी मीटिंग करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन करता है। चीन यूएनएससी को अपने मैंडेट के अनुसार सही भूमिका निभाने का भी समर्थन करता है। चीन यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का मजबूती से बचाव करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने के लिए तैयार है।"</p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला में सत्ता का सवाल: अमेरिका भी असमंजस में</title>
<link>https://www.newstvindia.in/question-of-power-in-venezuela-after-maduro-s-arrest-us-also-confused</link>
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<description><![CDATA[ वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद सत्ता किसके हाथ जाएगी, इस पर स्थिति साफ नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने माना कि जमीनी हकीकत और सुरक्षा बलों की भूमिका आने वाले बदलाव में निर्णायक होगी। ]]></description>
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<pubDate>Mon, 05 Jan 2026 10:12:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Nicolas Maduro Arrest, Venezuela Political Crisis, US Foreign Policy, Delcy Rodriguez, Venezuela Power Transition</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन : </strong>वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद देश की सबसे ताकतवर राजनीतिक पहचान तो सामने से हट गई है, लेकिन अब असली सवाल यह है कि आगे देश कौन चलाएगा और सत्ता का बदलाव किस तरह होगा। खुद अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस पर अभी काफी अनिश्चितता है।</p>
<p>अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि अमेरिका मादुरो या उनके उत्तराधिकारियों को वैध नहीं मानता। फिर भी, जमीनी हालात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।</p>
<p>एनबीसी के 'मीट द प्रेस' पर एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा, "हमें उन लोगों से निपटना होगा जिनके पास बंदूकें हैं।" उनका इशारा वेनेजुएला की सुरक्षा एजेंसियों और सरकारी ढांचे की ओर था, जो अभी भी सक्रिय हैं।</p>
<p>रुबियो ने एबीसी न्यूज और सीबीएस न्यूज़ के साथ इंटरव्यू में पुष्टि की कि उन्होंने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज से बात की थी, जिन्होंने मादुरो की गिरफ्तारी के बाद नेतृत्व की भूमिका संभाली है। उन्होंने यह नहीं बताया कि बातचीत में क्या सहमति बनी। उनका कहना था कि असली महत्व इस बात का है कि आगे वे क्या कदम उठाते हैं।</p>
<p>रुबियो ने दोहराया कि किसी से बातचीत करने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका उसे वैध नेता मान रहा है। रविवार को वैधता का मुद्दा चर्चा का केंद्र रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि डेल्सी रोड्रिग्ज पर पहले से ही अमेरिका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंध हैं और वह मादुरो सरकार का अहम चेहरा रही हैं।</p>
<p>सीएनएन पर न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार डेविड सेंगर ने कहा कि मौजूदा अमेरिकी सरकार लोकतांत्रिक प्रतीकों से ज़्यादा व्यवहारिक रास्ता अपना रही है और फिलहाल उनसे काम ले रही है, जो तुरंत सहयोग कर सकें।</p>
<p>इस बीच, कुछ विशेषज्ञों ने विपक्षी नेताओं मारिया कोरीना मचाडो और एडमोंडो गोंजालेज का भी जिक्र किया, जिन्होंने 2024 के विवादित चुनाव में जीत का दावा किया था। फिलहाल वे सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया से बाहर हैं।</p>
<p>रुबियो ने विपक्ष के प्रति सम्मान जताया, लेकिन कहा कि इतने सालों के तानाशाही शासन के बाद तुरंत चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने एबीसी न्यूज़ से कहा, "हर कोई कल चुनाव चाहता है। यह बेतुका है। इन चीज़ों में समय लगता है और एक प्रक्रिया होती है।"</p>
<p>सैन्य जानकारों ने चेतावनी दी कि वेनेज़ुएला वेनेजुएला के सशस्त्र बल शक्तिशाली और एकजुट बने हुए हैं। पूर्व अमेरिकी दक्षिणी कमान प्रमुख एडमिरल जेम्स स्टावरिडिस ने सीएनएन पर कहा कि अमेरिका के सामने मुश्किल विकल्प हैं या तो मौजूदा ढांचे के साथ काम किया जाए, या फिर अराजकता का खतरा उठाया जाए।</p>
<p>रुबियो ने बताया कि अमेरिका तेल से जुड़े प्रतिबंधों और समुद्री निगरानी के ज़रिए दबाव बनाए रखेगा और देखेगा कि अंतरिम नेतृत्व कैसे व्यवहार करता है।</p>
<p>फिलहाल निकोलस मादुरो अमेरिका की हिरासत में हैं और उन पर मुकदमा चल रहा है। लेकिन जैसा कि अधिकारियों और विशेषज्ञों ने माना, एक नेता की गिरफ्तारी से शासन से जुड़ा मूल सवाल हल नहीं हुआ है। आगे क्या होगा, यही सबसे बड़ी और कठिन चुनौती है।</p>
<p></p>]]> </content:encoded>
</item>

<item>
<title>वेनेजुएला ऑपरेशन पर ट्रंप का बड़ा बयान, मादुरो की गिरफ्तारी को बताया सबसे सटीक अमेरिकी मिशन</title>
<link>https://www.newstvindia.in/trump-s-big-statement-on-the-venezuelan-operation-calling-maduro-s-arrest-the-most-accurate-us-mission</link>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने काराकास में हुए गुप्त सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को बिना किसी अमेरिकी नुकसान के हिरासत में लिया गया। ट्रंप ने इसे अब तक के सबसे जटिल और सफल अमेरिकी ऑपरेशनों में से एक बताया। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 12:33:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Donald Trump Statement, Venezuela US Operation, Nicolas Maduro Arrest, US Military Mission</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>वाशिंगटन :</strong> राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि काराकास में रात भर चले अमेरिकी ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन को अमेरिकी सेना की ओर से अब तक के सबसे जटिल और सटीक ऑपरेशनों में से एक बताया।</p>
<p>मार-ए-लागो में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस ऑपरेशन में जबरदस्त अमेरिकी मिलिट्री पावर (आसमान, जमीन और समुद्र) का इस्तेमाल किया गया। ऑपरेशन को गुप्त रखने के लिए अंधेरे में अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला की सभी सैन्य क्षमताओं को विफल किया गया।</p>
<p>डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बिना किसी अमेरिकी सैन्य नुकसान के मादुरो और उनकी पत्नी सेलिया फ्लोरेस को पकड़ा गया। उन्होंने कहा, "एक भी अमेरिकी सैनिक मारा नहीं गया और किसी उपकरण को नुकसान नहीं हुआ।"</p>
<p>राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि मादुरो को एक सुरक्षित जगह पर पहुंचने की कोशिश करते समय पकड़ा गया। अमेरिकी सेना ने उम्मीद से ज्यादा तेजी से कार्रवाई की।</p>
<p>बता दें कि मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाया जा चुका है, जहां उनके खिलाफ फेडरल कोर्ट में नार्को-टेररिज्म का केस चलेगा।</p>
<p>वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका और ऑपरेशन कर सकता है। अमेरिकी सेनाएं इस क्षेत्र में तैनात हैं।</p>
<p>वहीं, अमेरिका के जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' महीनों की प्लानिंग के बाद शुरू किया गया था और इसमें अमेरिकी सेना व खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय शामिल था। उन्होंने कहा, "20 अलग-अलग बेस से 150 से ज्यादा एयरक्राफ्ट भेजे गए। सेनाएं पकड़े जाने से बचने के लिए कम ऊंचाई पर ऑपरेट कर रही थीं।"</p>
<p>केन ने कहा कि ऑपरेशन के दौरान हेलीकॉप्टरों पर फायरिंग हुई, लेकिन वे सुरक्षित लौट आए।</p>
<p>रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इसे 'एक बहुत बड़ा संयुक्त सैन्य और कानून प्रवर्तन ऑपरेशन' बताया, जिसे बिना किसी गलती के अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से यह साबित होता है कि अमेरिका अपनी कार्रवाई कहीं भी, कभी भी कर सकता है।</p>
<p>जब पूछा गया कि क्या कांग्रेस को पहले से बताया गया था, तो इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, "यह संभव नहीं था। यह उस तरह का मिशन नहीं था, जिसके बारे में आप कांग्रेस को पहले से बता सकें।"</p>
<p>उन्होंने इसे एक 'ट्रिगर-बेस्ड मिशन' बताया और कहा कि सफलता को खतरे में डालने से बचने के लिए गोपनीयता जरूरी थी।</p>]]> </content:encoded>
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<title>अमेरिकी कार्रवाई पर वेनेजुएला मुद्दे को लेकर UN सुरक्षा परिषद की आपात बैठक, गुटेरेस ने जताई चिंता</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में किए गए सैन्य अभियान और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हिरासत के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सोमवार को आपात बैठक करेगी। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए खतरनाक मिसाल बताया है। ]]></description>
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<pubDate>Sun, 04 Jan 2026 12:31:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>UN Security Council Meeting, Venezuela Crisis, US Military Operation, Nicolas Maduro Detention, International Law Concern</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संयुक्त राष्ट्र :</strong> संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई कार्रवाई पर सोमवार को आपात बैठक करेगी। यह जानकारी सुरक्षा परिषद की प्रेसिडेंसी की ओर से दी गई।</p>
<p>संयुक्त राष्ट्र में सोमालिया के स्थायी मिशन की प्रवक्ता खदीजा अहमद ने कहा, "यह आपात बैठक सोमवार सुबह 10 बजे होगी।" समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, सोमालिया जनवरी महीने के लिए सुरक्षा परिषद की रोटेटिंग प्रेसीडेंसी संभाल रहा है।</p>
<p>अमेरिका ने शनिवार को वेनेजुएला में एक सैन्य अभियान चलाया। इस दौरान राजधानी काराकास से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया गया।</p>
<p>इस कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई बेहद खतरनाक उदाहरण बन सकती है।</p>
<p>महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस को आशंका है कि इस सैन्य कदम के पूरे क्षेत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि वेनेजुएला की स्थिति चाहे जैसी भी हो, ऐसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए खतरनाक मिसाल हैं।</p>
<p>उन्होंने कहा, "महासचिव सभी के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से सम्मान करने के महत्व पर जोर देते रहते हैं। इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है। वह इस बात से बहुत चिंतित हैं कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के नियमों का सम्मान नहीं किया गया है।"</p>
<p>गुटेरेस ने वेनेजुएला में मानवाधिकारों और कानून के शासन का सम्मान करते हुए सभी पक्षों के बीच संवाद की जरूरत पर जोर दिया है।</p>
<p>अमेरिका के अनुसार, तड़के किए गए इस अभियान में अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला के एक सैन्य अड्डे पर हमला किया और महीनों की सैन्य तैयारी का नतीजा था। इसके बाद राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया।</p>
<p>अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि दोनों को युद्धपोत के जरिए न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर संघीय अदालत में "नारको-टेररिज्म" के आरोप दायर किए गए हैं।</p>]]> </content:encoded>
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<title>वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र की कड़ी प्रतिक्रिया, गुटेरेस ने बताया “खतरनाक मिसाल”</title>
<link>https://www.newstvindia.in/un-strongly-reacts-to-us-action-in-venezuela-guterres-says-dangerous-precedent</link>
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<description><![CDATA[ संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी हिरासत पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के लिए खतरनाक उदाहरण बताया और सभी पक्षों से संयम व संवाद की अपील की। ]]></description>
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<pubDate>Sat, 03 Jan 2026 15:28:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>News Tv India हिंदी</dc:creator>
<media:keywords>Venezuela Crisis, UN Secretary General Statement, Nicolas Maduro Arrest, US Military Action, International Law Violation</media:keywords>
<content:encoded><![CDATA[<p><strong>संयुक्त राष्ट्र : </strong>संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शनिवार को वेनेजुएला में हुई अमेरिकी कार्रवाई पर गहरी चिंता जताते हुए इसे “खतरनाक मिसाल” करार दिया है। इस कार्रवाई में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया।</p>
<p></p>
<p></p>
<p>महासचिव के प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक ने एक बयान में कहा कि गुटेरेस को इस सैन्य कार्रवाई के क्षेत्रीय स्तर पर गंभीर और चिंताजनक प्रभावों की आशंका है।</p>
<p></p>
<p>प्रवक्ता ने कहा, “वेनेजुएला की आंतरिक स्थिति से अलग हटकर भी, इस तरह के घटनाक्रम एक खतरनाक उदाहरण पेश करते हैं।”</p>
<p></p>
<p>दुजारिक के अनुसार, महासचिव लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सभी देशों द्वारा पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुटेरेस इस बात से बेहद चिंतित हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों का पालन नहीं किया गया।</p>
<p></p>
<p>महासचिव ने मानवाधिकारों और कानून के शासन का पूरा सम्मान करते हुए “समावेशी संवाद” की अपील की है और सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया है।</p>
<p></p>
<p>इस बीच, अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, शनिवार तड़के एक सैन्य अभियान के तहत अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला के एक सैन्य अड्डे पर हमला किया और राष्ट्रपति मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में ले लिया। दोनों को एक युद्धपोत पर न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ संघीय अदालत में “नार्को-आतंकवाद” से जुड़े आरोप दर्ज किए गए हैं।</p>
<p></p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, “वे एक जहाज पर हैं और न्यूयॉर्क जा रहे हैं। वे हेलीकॉप्टर से एक अच्छी उड़ान भरकर गए। मुझे यकीन है कि उन्हें यह पसंद आया होगा।”</p>]]> </content:encoded>
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