Punjab News: पंजाब सरकार ने नशे की लत से जूझ रहे लोगों के इलाज के साथ उनके लंबे समय के मनो-सामाजिक पुनर्वास पर भी जोर देने की तैयारी की है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को सैद्धांतिक मंजूरी दी है.
इस पहल में मौजूदा चिकित्सकीय उपचार के साथ मनो-सामाजिक देखभाल भी जोड़ी जाएगी। सरकार के मुताबिक, आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के सहयोग से आध्यात्मिक वेलनेस कार्यक्रम तैयार किया जाएगा. यह कार्यक्रम OOAT यानी Outpatient Opioid Assisted Treatment क्लीनिकों और गुरदासपुर तथा कपूरथला की जेलों में लागू करने की योजना है.
दवाइयों के साथ मनो-सामाजिक देखभाल पर जोर
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि नशा मुक्ति केवल दवाइयों से इलाज तक सीमित नहीं है. उनके मुताबिक उपचार के शुरुआती महीनों में मरीजों को इलाज से जोड़े रखना एक बड़ी चुनौती है.
सरकार का प्रस्तावित कार्यक्रम इसी अंतर को कम करने पर केंद्रित होगा. इसमें मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक स्तर पर मरीजों की मदद करने की कोशिश की जाएगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पायलट वेलनेस कार्यक्रम मौजूदा चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं होगा, बल्कि मेडिकल स्टाफ के सहयोग से उसके समानांतर चलाया जाएगा. सरकार की योजना है कि प्रशिक्षित स्थानीय अमला धीरे-धीरे इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभाले।.
अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का में पायलट
पायलट प्रोजेक्ट के लिए सीमावर्ती जिलों अमृतसर, तरनतारन और फाजिल्का को चुना गया है. इसके अलावा गुरदासपुर और कपूरथला की जेलों तथा OOAT क्लीनिकों में भी कार्यक्रम से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने की योजना है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नशा विरोधी रणनीति में मेडिकल ट्रीटमेंट, काउंसलिंग, पुनर्वास, सामाजिक सहयोग और कानूनी कार्रवाई सभी को शामिल किया जाएगा.
उन्होंने इसे पंजाब सरकार की ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ मुहिम को पुनर्वास के स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश बताया.
सरकार ने नशा तस्करी पर क्या कहा?
बैठक में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सरकार ने नशे की सप्लाई चेन को तोड़ने और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि अब अगली प्राथमिकता नशे से प्रभावित लोगों का समय पर और प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करना है.
यह मुख्यमंत्री और पंजाब सरकार का दावा है. नशा विरोधी कार्रवाई और उसके प्रभाव से जुड़े आंकड़ों को अलग-अलग सरकारी तथा स्वतंत्र स्रोतों के आधार पर देखना जरूरी होगा.
मानसा और संगरूर में भूजल संरक्षण का पायलट
इसी बैठक में मुख्यमंत्री ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को मानसा और संगरूर में भूजल रिचार्ज और संरक्षण को लेकर एक अलग पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा.
सरकार के मुताबिक, इस परियोजना के तहत किसानों, युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के दूसरे वर्गों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. संबंधित सरकारी विभागों के साथ समन्वय कर जल संरक्षण की रणनीति तैयार करने की योजना है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआती चरण में परियोजना मानसा और संगरूर में लागू होगी और इसके अनुभव के आधार पर इसे राज्य के दूसरे हिस्सों तक बढ़ाया जा सकता है.
नहरी पानी के इस्तेमाल को लेकर CM का दावा
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब में नहरी सिंचाई से जुड़े आंकड़े भी साझा किए. उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई गई है और कृषि सिंचाई में नहरी पानी की हिस्सेदारी उनके मुताबिक सरकार के सत्ता में आने के समय के 22 प्रतिशत से बढ़कर 88 प्रतिशत हो गई है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि भूजल संकट वाले ब्लॉकों की संख्या 2022 के 166 से घटकर 2026 में 152 रह गई है. मुख्यमंत्री के मुताबिक इन 152 ब्लॉकों में से 90 में सुधार दर्ज किया जा रहा है और कुछ क्षेत्रों में भूजल स्तर करीब एक से डेढ़ मीटर तक ऊपर आया है. ये आंकड़े मुख्यमंत्री की ओर से बैठक में साझा किए गए सरकारी आंकड़े हैं.
पंजाब में नशा मुक्ति और जल संरक्षण पर दोहरी रणनीति
इस बैठक में पंजाब सरकार की दो अलग-अलग प्राथमिकताएं सामने आईं. एक तरफ नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट के साथ मनो-सामाजिक पुनर्वास पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ मानसा और संगरूर में भूजल संरक्षण का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना सामने आई.
मुख्यमंत्री के साथ बैठक में मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की ओर से व्यक्ति विकास केंद्र इंडिया के चेयरमैन ब्रह्मचारी प्रज्ञा चैतन्य और अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.