चंडीगढ़: हरियाणा में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अनुराग ढांडा ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। एक रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए ढांडा ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के मामलों में बड़ी संख्या में आरोपी बरी हो रहे हैं और इसके पीछे कमजोर जांच तथा मुकदमों की कमजोर पैरवी जैसे कारण सामने आ रहे हैं।

ढांडा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सवाल किया कि अगर भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी अदालत से बरी हो रहे हैं तो सरकार यह बताए कि मुकदमों को मजबूत तरीके से क्यों नहीं लड़ा जा रहा।

‘भ्रष्टाचार को पनाह क्यों?’

अनुराग ढांडा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में हरियाणा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार को कथित तौर पर संरक्षण मिल रहा है और मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए कि भ्रष्टाचार के आरोपियों के खिलाफ मामले कमजोर क्यों पड़ रहे हैं।

ढांडा का यह बयान एक ऐसी रिपोर्ट के संदर्भ में आया, जिसमें भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपियों के बरी होने के पीछे गवाहों के मुकरने, सबूतों की कमी और जांच में खामियों जैसे कारणों का उल्लेख किया गया था।

हालांकि, ढांडा ने इन मामलों को सरकार की भूमिका से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। सरकार की ओर से इन आरोपों पर जवाब या संबंधित मामलों की विस्तृत स्थिति इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आई है।

70 फीसदी आरोपियों के बरी होने का दावा

ढांडा ने जिस रिपोर्ट को साझा किया, उसके संदर्भ में भ्रष्टाचार के मामलों में करीब 70 फीसदी आरोपियों के बरी होने का दावा किया गया है। इसमें मुकदमों की कमजोर स्थिति के पीछे गवाहों के बयान से मुकरने, अधूरे साक्ष्य और जांच से जुड़ी कमियों जैसे कारण बताए गए हैं।

लेकिन यह आंकड़ा किस अवधि के कितने मामलों से संबंधित है और इसमें किन-किन अदालतों के फैसले शामिल हैं, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं है। इसलिए 70 फीसदी का आंकड़ा ढांडा की प्रतिक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

गवाहों और जांच की खामियों पर उठे सवाल

रिपोर्ट में आरोपियों के बरी होने के पीछे कई कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें अदालत में गवाह का बयान बदलना या मुकर जाना, रिश्वत के लेनदेन से जुड़े मामलों में जांच की कमियां, प्रत्यक्षदर्शी गवाह का उपलब्ध नहीं होना और पर्याप्त साक्ष्य का अभाव शामिल है।

कुछ मामलों में शिकायत गलत साबित होने की बात भी सामने आने का दावा किया गया है।

अनुराग ढांडा ने इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि अगर भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन पक्ष मजबूत तरीके से पैरवी करे और जांच में खामियां न रहें तो दोष साबित होने की स्थिति अलग हो सकती है।

नायब सैनी सरकार से जवाब की मांग

AAP नेता ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सवाल किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी अदालत से बरी क्यों हो रहे हैं और सरकार इस स्थिति को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है।

उनका आरोप है कि केस कमजोर होने का सीधा फायदा भ्रष्टाचार के आरोपियों को मिलता है। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि जांच और अभियोजन की प्रक्रिया में अगर कोई कमी है तो उसे दूर क्यों नहीं किया जा रहा।

हालांकि, किसी आरोपी का अदालत से बरी होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सरकार ने जानबूझकर केस कमजोर किया। बरी होने के पीछे अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्य, गवाहों के बयान और अभियोजन की स्थिति जैसे कई कानूनी पहलू हो सकते हैं।

हरियाणा में भ्रष्टाचार पर फिर सियासी बहस

हरियाणा की राजनीति में भ्रष्टाचार का मुद्दा विपक्षी दलों के लिए सरकार को घेरने का एक प्रमुख विषय रहा है। अनुराग ढांडा भी इससे पहले भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक और सरकारी व्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं।

अब भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपियों के बरी होने को लेकर उनका ताजा हमला सरकार की जांच और अभियोजन व्यवस्था पर केंद्रित है।

इस पूरे मामले में फिलहाल दो बातें अलग-अलग देखना जरूरी है—एक तरफ अदालतों में मामलों के कमजोर पड़ने से जुड़े तथ्य और दूसरी तरफ इसे सरकार की कथित भूमिका से जोड़ने वाला राजनीतिक आरोप। उपलब्ध जानकारी में सरकार की ओर से इन आरोपों का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है।

आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और जिन मामलों का हवाला दिया जा रहा है, उनमें अदालतों के फैसलों और जांच रिकॉर्ड में वास्तव में क्या कारण दर्ज हैं।